“दंगल” से सीख बेटियों के लिए घर में बनाया अखाड़ा

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दिसंबर 2016 में रिलीज आमिर खान अभिनीत हिन्दी सिनेमा की मशहूर फिल्म “दंगल” बाक्स आफिस पर काफी सफल रही थी। फिल्म की सफलता का कारण आमिर खान का बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ कहानी का सच्ची और प्रेरक घटना पर आधारित होना था।

आमिर खान ने जिस महान व्यक्ति का किरदार निभाया था, वे थे हरियाणा के एक गाँव के मशहूर पहलवान “महावीर सिंह फोगट” जिनका एक महत्वपूर्ण डायलॉग था- “म्हारी छोरियां छोरों से कम है के”। यूँ तो लाखों लोगों ने इस फिल्म को देखा होगा लेकिन इस डायलॉग ने बिहार के बेगूसराय के बखरी गांव की दो सगी बहनें शालिनी और निर्जला के पिता “श्री मुकेश” पर ऐसा प्रभाव डाला कि उन्होंने अपनी बेटियों को पहलवान बनाने की चाहत ठान ली। और अपनी बेटियों के कुश्ती के अभ्यास के लिए उन्होंने घर में ही अखाड़ा बना डाला।

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अपनी बेटियों को पहलवान बनाने की चाहत ठान लेने के बाद “श्री मुकेश” खुद कोच बनकर दोनों बेटियों को नियमित अभ्यास कराने लगे।

बिहार के बेगूसराय के बखरी गाँव की दो सगी बहनें शालिनी और निर्जला राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिछले साल अक्टूबर में शालिनी ने सोनीपत (हरियाणा) में और निर्जला ने मेरठ (उप्र) हुई राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का नाम रोशन किया। अब “श्री मुकेश” ने अपनी दोनों बेटियों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए गोंडा, उत्तर प्रदेश स्थित “नंदनी नगर महाविद्यालय” के कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में भेजा है।

 

गीता व बबीता फगोट बनी आदर्श:- हरियाणा की दंगल गर्ल गीता व बबीता फगोट ने पौराणिक रीति-रिवाजों की बेड़ियों से निकल कर कुश्ती को जुनून बनाकर जिस तरह से अपना मुकाम देश-दुनियाँ में बनाया, ठीक उसी तर्ज पर ये दोनों बहनें भी दिन-रात अभ्यास करती हैं। ये दोनों गीता व बबीता फगोट को अपना आदर्श मानती हैं। शालिनी 14 व निर्जला 13 वर्ष की है। दोनों अपने पिता की इच्छा को जुनून मानकर पिछले 3 वर्ष से लगातार मेहनत कर रही है।

 

      आसान नहीं था सफर:- शालिनी और निर्जला माता-पिता बताते हैं कि इनका सफर इतना आसान नहीं था। वर्तमान परिवेश में भी सामाजिक बेड़ियाँ पग-पग पर बाधक बनती रही, लेकिन उसकी परवाह न करते हुए मेहनत करता रहा। शालिनी और निर्जला की मम्मी बताती हैं कि समाज में लोगों के द्वारा ताना मारा जाता था कि बेटियों को पहलवान बना दिया, अब उनकी शादी कैसे करोगे। आगे इनकी माँ कहती हैं कि मैं इन तानों की चिंता किये बगैर चाहती हूँ कि मेरी बेटी राज्य के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन करे।

 

 

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टीम- “कोसी की आस” ..©

 

 

 

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