“ज्ञान जरूरी या मार्क्स” – आरके श्रीवास्तव

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स्पेशल डेस्क
कोसी की आस@पटना

समूचे देश में मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव ने “ज्ञान जरूरी या मार्क्स” टॉपिक पर अपना वक्तव्य दिया। श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में बताया कि ऐसे कइयों के उदाहरण हैं, जो पढ़ाई में औसत थे, अच्छे मार्क्स नहीं ला पाए, लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान, अपनी काबीलियत से जीवन में अकल्पनीय सफलता हासिल की है।

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उन्होंने आगे सवाल परीक्षा में नंबर अच्‍छे नहीं आए तो क्‍या हुआ? टैलेंट कोई नहीं छीन सकता। नंबर, तो महज़ कागज के टुकड़ों जैसा है। दुनिया के अधिकांश महान शख्‍स ने एग्‍जाम में टॉप नहीं किया, तो तुम्‍हारा टॉप न करना, पाप कैसे हो गया?

आरके श्रीवास्तव ने बताया कि केवल बेहतर मार्क्स ही जिंदगी के स्थायी सफलता का आखिरी मुकाम नहीं होता। लेकिन इन बातों के बीच यह एक सच है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि परीक्षा में बेहतर नंबर आने चाहिए, क्योंकि परीक्षा आपके उस विषय के समझ का परिचायक है। इसलिए यदि विषय की अच्छी समझ होगी तो अच्छे अंक आएंगे ही।

उन्होंने आगे बताया कि माना किसी स्‍टूडेंट का टैलेंट बोर्ड एग्‍जाम में मिले नंबर तय नहीं कर सकते, लेकिन उसी स्‍टूडेंट को अपने टैलेंट के लिए प्‍लेटफॉर्म चाहिए जो मिलता है अच्‍छे रिजल्‍ट से, अब आप कहेंगे कि इंसान अपना मुकाम अपने दम पर बनाता है, फिर चाहे नंबर कैसे भी हों, हाँ आपकी इस बात से भी मुझे कोई गुरेज नहीं है, लेकिन सच्‍चाई उन स्‍टूडेंट्स से पूछिए जनाब जो अच्‍छे कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए नंबरों के गणित लगाते रहते हैं।

गूगल बॉय कौटिल्य पंडित के गुरु आरके श्रीवास्तव ने बताया कि आज पढ़ाई का स्तर काफी हद तक बदल गया है। बच्चे अब नंबर की तरफ भाग रहे हैं, टैलंट पर कम ध्यान दिया जा रहा है। हर साल सीबीएसई 10वीं और 12वीं के रिजल्ट जब निकलते हैं, तो हम देखते हैं कि बड़ी संख्या में बच्चों के 90 से 99 प्रतिशत तक मार्क्स आते हैं। इन नंबरों के बीच हर साल ये बहस भी शुरू हो जाती है कि “ज्ञान जरूरी है या मार्क्स”। अगर आज के कॉम्पिटिशन के युग में देखें, तो दोनों का अपनी-अपनी जगह पर खास महत्व है। हालांकि ज्ञान का होना बहुत जरूरी है। अधिकतर लोग भी मानते हैं बिना नॉलेज आप बहुत ज्यादा देर तक कामयाबी की बुलंदी पर नहीं रह सकते। आज हम बात करेंगे कि आखिर “मार्क्स जरूरी है या फिर ज्ञान”।
Importance of Numbers For Student:-

बेशक नंबर ही सबकुछ नहीं हैं। दुनिया में कई ऐसे लोग हैं, जो पढ़ने में कमजोर थे, लेकिन आज सबसे सफल व धनी लोगों में गिने जाते हैं। पर इन सबके बीच नंबरों के महत्व को झूठलाया नहीं जा सकता। आज किसी भी प्रतियोगी परीक्षा से लेकर नामी यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए हर जगह पर्सेंटेज की अनिवार्यता है, जिसके मार्क्स कम होते हैं, वह रेस से बाहर हो जाता है, सिर्फ अच्छे मार्क्स वालों को एंट्री मिलती है। ऐसे में सिर्फ टैलेंट से ही काम नहीं चलता। बहुत सारी यूनिवर्सिटीज है, जहाँ नंबरों के आधार पर ही दाखिला मिलता है। अब जैसे की एक उदाहरण दिल्ली यूनिवर्सिटी का ही ले लेते हैं। देश भर के बच्चों की ख्वाहिश होती है कि उनका एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी में हो जाए लेकिन वहाँ के नामांकन प्रक्रिया में नंबरों को ही महत्व दिया जाता है। बच्चों को अपना टैलेंट दिखाने के लिए प्लेटफॉर्म रिजल्ट से ही मिलता है। आज ऐसा सिस्टम बन गया है, जिसमें 100 फीसदी तक कटऑफ जाती है और नंबर वाले छात्र ही पूछे जाते हैं। इसके अलावा नामी कंपनियां कैंपस सिलेक्शन के दौरान स्टूडेंट्स के मार्क्स पर ज्यादा ध्यान देती हैं।

Importance Of Knowledge For Students:–

अब बात अगर ज्ञान की करें, तो इसका भी अपना खास महत्व है। बेशक आपके मार्क्स अच्छे हों, लेकिन आपके पास ज्ञान यानी नॉलेज नहीं है तो ज्यादा दिन आप किसी भी फील्ड में टिके नहीं रह सकते। मान लीजिए कि नंबर के दम पर आपने बीकॉम ऑनर्स में दाखिला ले लिया, लेकिन आपकी नॉलेज विषय में कम है, तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। यही बात जॉब में भी फिट बैठती है। अगर आपको नंबरों के आधार पर नौकरी मिल गई है और आप कंपनी में दाखिल हो गए। लेकिन वहाँ आपका ज्ञान व काम ही आपको आगे लेकर जाएगा। अगर आपकी नॉलेज कमजोर है, तो आप पीछे छूट जाएंगे। ऐसे कई लोग हैं, जो पढ़ाई में औसत थे, उनके मार्क्स अच्छे नहीं आए, लेकिन उन्होंने अपनी नॉलेज अपनी काबीलियत से आज काफी सफलता हासिल की है। ऐसे में कहा जा सकता है कि नॉलेज भी जरूरी है। इसके बिना आपका विकास रुक जाता है।

उन्होंने सभी अभिभावकों से “कोसी की आस परिवार” के माध्यम से कहा कि जरूरी है आप अपने बच्चे को ज्ञान और नंबर में संतुलन बनाए रखने को कहें। सिर्फ नंबर हासिल कर लेना ही किसी छात्र का उद्देश्य नहीं होना चाहिए बल्कि अपने विषय पर अच्छी पकड़ और ज्ञान का होना भी अनिवार्य है।

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