घर के सामने दीये अथवा मोमबत्ती जलाने का आह्वान कर प्रधानमंत्री गरीबों का उड़ा रहे हैं मजाक : गुड्डू पासवान

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अनिश चौरसिया
कोशी की आस@खगड़िया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना से जारी सामूहिक संघर्ष को बल देने के लिये 5 अप्रैल को पूरे देश के लोगों को अपने-अपने घरों के सामने और बॉलकनी में रात के 9 बजे दीये, टार्च या मोमबत्ती जलाने को कहा है। इस सामूहिक प्रयास का समर्थक हूँ, किन्तु उन्हें 22 मार्च को हजारों लोग एक साथ थाली पीटते रोड पे नजर आए। सामाजिक दूरी, जिसकी इस बीमारी में निहायत जरूरत है, को भारी धक्का पहुंचा था, जिन पर गौर करना चाहिए था। उक्त बातें खगड़िया जिला कांग्रेस कमिटी के जिला अध्यक्ष कुमार भानू प्रताप उर्फ गुड्डू पासवान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।

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श्री पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के गरीबों को नजर में रखकर कोई आह्वान करना चाहिए। जिन गरीबों के घरों के चूल्हे लॉकडाउन के चलते बन्द हैं, जिनके पास टार्च या मोबाइल नहीं है और ना ही उनके पास मोमबत्ती या किरोसीन खरीदने के पैसे हैं, वे क्या करेंगें? बिहार सहित देश के सम्पूर्ण गरीब लोगों जिसमें बड़ी संख्या में बेघर हुए हैं। वे उस दिन कहाँ दिए जलायेगें? जिनके पास घर है भी तो खर-पतबार के वे अगर किसी तरह से घरों के सामने दीए जला भी देते हैं, तो इस अप्रैल की तेज पछुआ हबा में जहाँ आगजनी की घटनाएं शुरु हो चुकी है। पता नहीं कितने गरीब के घरों को आग अपनी जद में ले लेगा। इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लॉकडाउन की स्थिति में हर घर के सामने दीये अथवा मोमबत्ती जलाने का फरमान जारी कर गरीबों का मजाक उड़ाने का काम नहीं करना चाहिए।

बतौर पासवान हमारा देश और पूरी दुनियां आज तरह-तरह के प्रदूषण का दंश झेल रही है। प्रकृति प्रदूषण की मार के चलते मानवता पर रोज तरह-तरह की बीमारियाँ थोप कर कहर बरपा रही है। जब सम्पूर्ण मानवता ही महाविनाश के किनारे खड़ा खुद के बचाव हेतु युद्ध में हो, तो ऐसे समय में दिये जलाने जैसी भावनात्मक सलाह देने से बेहतर होता कि समाज के निचले स्तर तक इस महामारी के खिलाफ जन-जागरण अभियान चलाने के तरफ ठोस कदम उठाया जाय। इसके लिये निहायत जरूरी होगा कि इस महामारी के चलते जिन गरीबों की बड़ी आबादी हैंड टू माउथ के हालत में चले गए हैं और भविष्य में भी उनके सामने इन्हीं समस्यायों का जो खतरा है, उसका ठोस समाधान उनके सामने रखने होंगें।

इसके साथ-साथ इस संक्रमणकारी बीमारी से युद्ध के मैदान में डटे सबसे पहले मोर्चे पर जो हमारे स्वस्थकर्मी और चिकित्सक हैं, वे निहत्थे हैं। उनके पास ना तो पी.पी.पी.है, ना ही आवश्यक मानक के मास्क और ना ही दूसरे आवश्यक उपकरण। इसलिए जरूरी है कि उनके इन सभी जरूरतों को तुरंत पूरी की जाय। ताकि हमारी स्वस्थकर्मी सेनाएँ निर्भीकतापूर्वक इस जंग को लड़ सकें। अस्पतालों के अंदर संक्रमित रोगियों या संदिग्ध लोगों के प्रोपर ईलाज या जाँच हेतु आवश्यक उपकरण और सारी व्यवस्था को मुहैया कराने के तरफ तुरन्त ठोस कदम बढ़ाने होंगें। तभी पूरा देश एक साथ मिलकर इस विकट परिस्थिति में पूरे भरोसे के साथ मानवता के इस महाविनाशकारी वायरस का मुकबला करने में सामर्थ्यवान साबित हो सकते हैं।

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