रमज़ान में इबादत के साथ खुद को और दूसरों को रखें महफूज़ – मुस्लिम बुद्धिजीवियों की अपील

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खगड़िया : रमज़ान का महीना इस बार 25 अप्रैल से शुरू हो रहा है, ऐसे में वर्तमान संकट के मद्देनजर मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने घरों में ही इबादत करने की अपील की।
आने वाले 25 अप्रैल रोज़ शनिवार से रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने जा रहा है। इस महीने में मुसलमान खूब इबादत करते हैं। अपने गुनाहों की माफी के लिए दुआ करते हैं। दिन रात पवित्र कुरान की तिलावत करते हैं, रात में भी तरावीह के नमाज़ में खड़े हो कर पूरे महीने क़ुरान को सुनते हैं और साथ ही साथ साहब ए हैसियत लोग अपनी संपत्ति का 2.5% ज़कात के नाम पर ग़रीब, लाचार, विधवा आदि को देते हैं।

मगर इस वर्ष रमज़ान ऐसे समय शुरू हो रहा है कि पूरा विश्व एक खतरनाक कोरोना वायरस की महामारी के दौर से गुजर रहा है। दुनिया के लगभग सभी मुल्को में इससे बचाव के लिए तरह तरह की तरकीब की जा रही है, जिसमें लोगों को एक दूसरे से दूर रहकर (social distancing) से जान बचाने की कोशिश की जा रही है।

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उक्त संबंध में शहर के जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुजहिदुल इस्लाम कासमी जमीयित उलेमा ए हिन्द के जिला अध्यक्ष अल हाज सैयद खालीद नजमी, जिला महासचिव कारी मो सरफ़राज़ आलम, जिला सचिव मो अमजद नज़ीर एवं जिला उपाध्यक्ष मो मोहिउद्दीन ने अपील किया है कि इस बार नमाज़ ए तराबीह अपने घरों ने ही अदा करें और लोगों से इस रमजानुल मुबारक में इबादत के लिए मस्जिद नहीं आने का आग्रह किया है।

जलकौड़ा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एस जेड रहमान कहते हैं कि इंसानी जान अनमोल है, इसकी हिफाज़त हर हाल में करनी चाहिए। जिस काम से पूरे समाज पर खतरा मंडराए, हमें उस काम से परहेज़ करना चाहिए। कोशी कॉलेज के प्रोफेसर तौसीफ मोहसिन कहते हैं कि रमज़ान में हमे रोज़े रखने हैं और तरावीह भी पढ़ना है, मगर शारीरिक दूरी सबसे अधिक ध्यान हो।

डॉ अताउर रहमान हिजमा सेंटर जलकौड़ा का कहना है कि हम स्वास्थ्य रहेंगे, तभी हम नेकी कर सकेंगे, हमारे नबी साहब ने भी अपने जान की हिफाज़त करने का हुक्म दिया है और वबा में परहेज करने कि ताकिद फ़रमाया है। रोसड़ा कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर एस एम सोहैल साहब कहते हैं कि घरों में अकेले अकेले ही इबादत करनी है। ऐसा न हो कि हम लोगों को अपने अपने घरों में लोगों को जमा कर लें।
इसलिए बुद्धिजीवी के साथ आलिम (धार्मिक विद्वान्) भी हमें झुंड के बजाए सिर्फ अपने घरों में अपने परिवार के साथ ही इबादत करने की तलक़ीन कर रहे हैं। इसलिए हम सभी को उनकी बातें माननी चाहिए और उसपर अमल भी करना चाहिए। ताकि अपने साथ पुरे देश का भला हो सके।

अनिश चौरसिया
कोशी की आस@खगड़िया

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