बीते 30 साल से राजद और जदयू सरकार की अक्षमता की वजह से, कोरोना ने बिहार के मजदूरों को बेबस कर दिया है- उमेश ठाकुर

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बिहार के मजदूरों के दुर्दशा पर आजपा के प्रदेश अध्यक्ष उमेश ठाकुर, लोकसभा प्रभारी मक्खन साह, महिला विकास सेवा संस्थान के राष्ट्रीय संरक्षक मधुबाला देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल केवल बिहार वासियों को आश्वासन एवं बिना दूध के बच्चों को प्रोत्साहन देने समान वक्तव्य दे रहे हैं।

श्री ठाकुर ने बताया कि हिंदुस्तान में आज कोरोना संक्रमण के वजह से किये गए लॉक डाउन के 49 दिन हो चुके हैं। बिना राशन कार्ड धारी मजदूर एवं गरीबों के साथ-साथ आम आदमी को एक मुट्ठी अनाज या ₹5 का राशि तक उपलब्ध नहीं हुआ है। दूसरी तरफ नेताओं द्वारा बयानबाजी सुचारू रूप से चल रहा है। यह समझ नहीं आ रहा है कि किस तथ्य पर अपना वक्तव्य जनता के बीच दे रहे हैं।

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श्री ठाकुर ने बताया कि पूरे बिहार में बिना राशन कार्ड धारी लगभग 30 लाख यूनिट है जबकि मुख्यमंत्री बिहार सरकार 16 लाख यूनिट का नया /पुराना दर्शा रहे हैं। आपूर्ति विभाग के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान मात्र 14 लाख यूनिट देने की तैयारी में है। इस परिस्थिति में बिहार की आबादी के अनुसार आधा से अधिक राशन कार्ड धारी पुनः वंचित रह जाएंगे। साथ ही बिहार के मजदूर गरीब व्यवसाय को कोई देखने वाला नहीं है कोरोना से मरने वालों की संख्या बिहार में 5 है। लेकिन भूख और बेरोजगारी के कारण बिहार के मजदूर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे है और रास्ते में सड़क और रेल दुर्घटना में मौत की शिकार हो रहे हैं।

रेलवे की लापरवाही के कारण 1 मिनट में 16 मजदूरों की मौत एवं दर्जनों घायल हैं। उस मजदूर के हालत देखकर पता चलता है कि उसे कोरोना से नहीं, उसे मृत्यु से नहीं, उसे डर है तो सिर्फ भूख से, वे सड़कों और रेल मार्ग पर चलते जा रहे हैं, कब कहां मौत हो रही है, इसका कुछ अंदाजा नहीं हैं। बिहार में 15 साल राजद, 15 साल जदयू द्वारा शासन किया जा रहा है लेकिन किसान, मजदूर, विधवा, गरीब, असहाय को आज तक क्या मिला? सिर्फ बेरोजगारी, गरीबी और मृत्यु। हमारा देश और बिहार विकासशील तो हो रहा है पर मजदूरों का पलायन कोई सरकार नहीं रोक पा रही जिसके कारण आज मजदूर अपने वतन अपने प्रदेश लौटने के दौरान मौत के शिकार हो रहे हैं। हाय रे कोरोना वायरस तूने बिहार के मजदूर, गरीब निःसहाय की दुर्दशा का इतिहास दिखा दिया। सरकार केवल मजदूर के मौत पर सरकारी सहायता के रूप में रुपये तो दे रहे है, पर मौत न हो मजदूरों का पलायन न हो, इस पर कोई विचार नही हो रहा हैं।

अनिश चौरसिया
कोशी की आस @खगड़िया

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