स्वदेशी और स्वरोजगार के माध्यम से सबका उदय पर किया गया परिचर्चा

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खगड़िया : क्विज मास्टर गोपाल पांडेय द्वारा विषय-स्वदेशी और स्वरोजगार के माध्यम से सबका उदय” online परिचर्चा का आयोजन किया गया। आजादी बचाओ आंदोलन पिछले 8-10 वर्षों से विदेशी कंपनियों के खिलाफ लगातार जनजागृति और संघर्ष का काम करता रहा है। शुरूआत के 3-4 वर्षों में आंदोलन बहुत व्यापक नहीं था। न तो आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि बहुत व्यापक थी और न ही आंदोलन का विस्तार। 1995 के बाद से धीरे-धीरे आंदोलन ने लोगों के बीच अपनी उपस्थिति का आभास कराना शुरू कर दिया।

उन्होंने बताया कि शुरूआत में तो आंदोलन केवल उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के क्षेत्र में ही सक्रिय था। लेकिन 1995 के बाद महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में सक्रियता शुरू हुई। 1998 के बाद तो इन राज्यों के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिण भाषी इलाकों में भी आंदोलन बहुत तेजी से फैला।
विदेशी कंपनियों के सामानों का बहिष्कार करवाने के लिए गाँव-गाँव घूमने के दौरान नये-नये अनुभव हुए। अधिकांश अनुभवों में ऐसा महसूस होता था कि हिन्दुस्तान के गाँवों में रहने वाली आबादी शहरी विकास से बहुत दूर है। इसका सबसे बड़ा कारण यह समझ में भी आया कि देश का विकास शहर केंद्रित विकास है। इसलिए इस विकास में गाँव की उपेक्षा स्वाभाविक है।

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आगे बताया कि गाँव के सभी तरह के संसाधन शहर की ओर जा रहे हैं। गाँव के नौजवान क्या बूढ़े तक शहरों में काम करने के लिए जाते हैं और न्यूनतम मजदूरी पर काम करते हैं। शहरों में उनका शोषण ही होता है। इसलिये हमें लगने लगा कि अब हमें अपने आंदोलन की दिशा बदलनी पड़ेगी। अभी तक तो हमारे आंदोलन में केवल विदेशी कंपनियों के बहिष्कार की बात दिखाई देती थी। लेकिन अब आंदोलन स्वदेशी उत्पादकों की फौज का निर्माण करने के लिए एक नई दिशा की ओर बढ़ने के लिए तैयार है।
यह दिशा स्वदेशी और स्वावलंबन की दिशा होगी। जिसमें आंदोलन गाँव-गाँव में जाकर नौजवानों को स्वदेशी रोजगार के लिए तैयार करेगा और उन्हें अपने जीवनयापन के लिए आवश्यक आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लायक बनायेगा।

इस अभियान में आंदोलन जगह-जगह स्वावलंबन शिविरों का आयोजन भी करेगा, जिसमें नौजवान प्रशिक्षित होकर निकलेंगे और देश भर में स्वदेशी की अलख जगाएंगे। गाँधीजी के स्वदेशी भारत का सपना यही नौजवान साकार करेंगे। उक्त बातें आयोजक गोपल पांडेय ने बताया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ प्रवेश कुमार चौधुरी (जेएनयू प्रोफेसर) के आलावे मुरली कुमार, राघव कुमार, राहुल कुमार, शिवण कुमार, आदित्य कुमार, राम कुमार, सोनू कुमार, ज्ञानदीप कुमार मौजूद थे।

अनीश चौरसिया
कोशी की आस@खगड़िया

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