मधेपुरा : बच्चों को गुड टच और बैड टच का फर्क बताने के साथ उनके अंदाज में पढ़ावें।

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राहुल यादव
कोसी की आस@मधेपुरा

जिले के प्रखण्ड संसाधन केंद्र चौसा में एनसीईआरटी की ओर से चल रहे “निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम” द्वितीय बैच का प्रशिक्षण तीसरे दिन भी जारी रहा।

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प्रशिक्षण में प्रशिक्षक कुन्दन कुमार ने कहा कि शिक्षण कार्य के दौरान शिक्षक बच्चों को पढ़ाने से पहले खुद पढ़ें। शिक्षक को अध्ययन करते रहना चाहिए। शिक्षक जिस पाठ्यक्रम को पढ़ाने वाले हैं, उसकी समुचित तैयारी और पूर्वाभ्यास कर छात्र-छात्राओं को पढ़ाने जाएं। शिक्षक बच्चों को रूचिकर तरीके से पढ़ाएं। बच्चों को उसी के अंदाज में पढ़ाएं, जिस अंदाज में बच्चे पढ़ना चाहते हैं। इससे बच्चों को पढ़ाई बोझिल नहीं लगेगा।

वहीं प्रशिक्षक राजीव रंजन ने शिक्षकों को बताया कि देश में जिस तरह से बाल शोषण और बच्‍चों की हत्‍याओं के केसों में इजाफा दर्ज हुआ है, ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने बच्‍चों को गुड टच और बैड टच का फर्क सिखाएं। बच्‍चे को सिखाएं कि नो का मतलब है नो। बच्‍चे को बताएं कि किसी भी सूरत में वे बॉडी पॉर्ट्स को टच करने के लिए नो ही कहेंगे। अगर इसके बावजूद भी बच्‍चे के साथ ऐसा हो, तो वे डरे नहीं और मदद के लिए चिल्‍लाएं। उन्‍हें बताएं कि उनकी एक आवाज पर कितने लोग उनकी मदद के लिए पहुंच जाएंगे। बच्‍चे को यह भी बताएं कि वे परिस्थिति को देखें-समझें और किसी सेफ जगह पहुंचकर चिल्‍लाएं या अलार्म बजाएं। वे हवां से तेजी से भाग सकते हैं।

मौके पर वरीय बीआरपी रामप्रकाश कुमार रेणु, बीआरपी अनिल कुमार, राजीव अग्रवाल, संकुल समन्वयक विजय कुमार, पंकज कुमार, प्रधानाध्यापक कृष्ण गोपाल पासवान, इम्तियाज आलम , उमर फारूक, शाहनवाज, पुरूषोत्तम कुमार,निरंजन कुमार, शिक्षक यहिया सिद्दीकी , पंकज कुमार भगत, मंसूर नदाफ, संजय कुमार पासवान, निरंजन कुमार सिंह समेत दर्जनों शिक्षक-शिक्षिका उपस्थित थे।

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