कभी टीवी तो कभी मोबाइल देख कर, किसी तरह समय काट रहा इंसान, अपनी ताकत समझ गया इंसान – ललित।

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धर्मेंद्र कुमार मिश्रा
कोशी की आस@मधेपुरा

कलाम यूथ लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित एवं समस्तीपुर, बांका, वैशाली, मधेपुरा के अलावे कई जिलों में गरीब मेधावी एवं लगनशील छात्र एवं छात्राओं को मार्गदर्शन देने हेतू नि:शुल्क बीपीएससी क्लासेज की सुविधा प्रदान कर वर्षों से अनोखी मिसाल पेश करते आ रहे मधेपुरा जिला के उदाकिशुनगंज में पदस्थापित भूमि सुधार उप समाहर्ता ललित कुमार सिंह ने चीन से फैले विश्व के कोने-कोने के साथ-साथ भारत में फैले कोरोना वायरस जैसे संक्रमण पर, प्रकृति से मानव द्वारा छेड़छाड़ करने को बेहद सरल तरीके से कविता के माध्यम द्वारा लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया है…

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“देख तेरे संसार की हालत,
क्या हो गई भगवान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
आज आदमी बना है तोता,
घर के पिंजरा में तड़प रहा है।
कभी टीवी तो कभी मोबाइल,
किसी तरह समय काट रहा इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
घर के पिंजरे के बाहर से,
तो कभी घर के पिंजरे में घुसकर।
चुनौती दे रहा कोरोना भूत पिशाच,
मौत का पैगाम ला रहा खुद इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
चला था मानव गगन चुमने,
धरती को उजाड़ फेंकते,
चींटी से लेकर हाथी तक को,
अपने स्वार्थ में नाश करते।
अब खुद नाश हो रहा इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
मोबाइल और मिसाइल के सहारे,
चला था दुनिया को मुट्ठी में करने,
कभी महाशक्ति बनने की चाहत,
तो कभी विश्वयुद्ध की होड़।
आज खुद मुट्ठी भर पिंजरे में,
कैद हो गया इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
अब भी सब कुछ बचा हुआ है,
जल जीवन हरियाली भी,
पशु पक्षी सब तेरे लिए है,
इसे सजाओ इसे सभालो इसे संभालो।
यही उपहार कुदरत का रह गया इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।
देख तेरे संसार की हालत,
क्या हो गई भगवान,
मुंक और बौना बना हुआ है इंसान,
अपनी ताकत समझ गया इंसान।”

उन्होंने अपनी इस कविता के माध्यम से कहा कि यह गलती मानव ने ही की है और कर भी रहे। उन्होंने पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ने और इसकी देखरेख में कमी करने, इसको सुधारने का प्रयास कम करने के चलते इस स्थिति को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि मानव यदि अब भी पर्यावरण संतुलन को ना समझे और पर्यावरण से संबंधित पेड़-पौधे, जीव-जंतु,जल, तालाब, कूऐं आदि को संरक्षित ना कर सके तो आने वाले दिनों में और विभीषिका झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

साथ हीं साथ उन्होंने बिहार के लोगों के साथ-साथ सभी छात्र-छात्राओं को इस संकटपूर्ण समय में कोरोना वायरस जैसे संक्रमण से घर में रहकर बचने, सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रहने और खुद को संयमित होकर कार्य करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब-जब प्रकृति के साथ अति छेड़छाड़ हुआ है, तब-तब ऐसी परिस्थिति से लोगों को सामना करना पड़ा है। उनके स्वरचित कविता का नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता, राष्ट्रीय महासचिव संजय कुमार सुमन, राष्ट्रीय महासचिव कुमुद रंजन सिंह, बिहार प्रदेश के अध्यक्ष अबोध ठाकुर, बिहार प्रदेश के वरीय उपाध्यक्ष सी.के.झा, कोसी प्रमंडल के संयोजक धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, मधेपुरा जिलाध्यक्ष सिकंदर कुमार सुमन, सहरसा जिला अध्यक्ष तेजस्वी ठाकुर, उदाकिशुनगंज अनुमंडल अध्यक्ष अभिमन्यु कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी बिनोद विनीत, कोषाध्यक्ष रजनीकांत ठाकुर, दिलीप कुमार दीप, कन्हैया महाराज, संजीव झा, सुमन कुमार सिंह, साजन कुमार, घनश्याम सहनी, प्रदीप आर्या, अभिषेक आचार्य, नीरज कुमार झा, राहुल यादव, सुरेन्द्र सहनी, सहित एनजेए के दर्जनों सदस्यों ने सराहना किया है।

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