सुविधाओं की भारी कमी के बाबजूद चिकित्सक अपनी जान हथेली पर रखकर कर रहे वायरस से लोगों का इलाज

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जहाँ पूरी दुनिया वायरस के भयंकर महामारी का दंश झेल रहा है। वायरस के संक्रमण से पूरा देश हलकान है। वहीं दूसरी तरफ उदाकिशुनगंज के स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मी अपने जान को हथेली पर रखकर अपने दायित्वों की पूर्ति कर रहे हैं। अभी के दौड़ में लोग वायरस का नाम सुनते ही दहल उठते हैं। वायरस से संबंधित या संदिग्ध मरीजों से बात करना तो दूर की बात है। कोई भी व्यक्ति उसके नजदीक जाने से कतराते हैं।

वहीं उदाकिशुनगंज के चिकित्सा दल के सदस्य वैसे व्यक्तियों के पास जाकर बिना किसी भय के अपने जान की परवाह किये बगैर उसकी स्वास्थ्य के स्थिति की जांच पड़ताल करते हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन अपने विभाग को दैनिक प्रतिवेदन वरीय पदाधिकारियों को उपलब्ध कराते हैं।चिकित्सकों की मानें तो उन्हें ना मास्क उपलब्ध कराया गया है, ना ही पी पी ई कीट (पर्सनल प्रोटेक्शन कीट) उपलब्ध कराया गया है। ये चिकित्सक बिना किसी सुरक्षा कवच के सिर्फ सर्जिकल मास्क और कैप लगा कर आवंटित क्षेत्र के क्वारेंटाइन सेंटर पर एवं डोर टू डोर जाकर बाहर से आए लोगों का स्क्रीनिंग करने या क्षेत्र के ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के द्वारा दिये गए सूचना के आधार पर बाहर से आए हुए लोगों की स्क्रीनिंग एवं फॉलो-अप करने के लिए निकल पड़ते हैं।

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प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ इंद्र भुषण कुमार ने बताया कि करोना से लड़ने के लिए फ्रंट लाइन में चिकित्सक हैं। जो बिना किसी सुरक्षा कवच के अपनी जान को हथेली पर रखकर बाहर से आए हुए लोगों का स्क्रीनिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हम लोगों का हाल आगे कुंआँ पीछे खाई वाला हो गया है। वहीं अस्पताल के अन्य चिकित्सक डॉ ए के मिश्रा, डॉ पी पी राजन, डॉ इरफान आलम, डॉ दीपक कुमार, डॉ राजन, डॉ सुमन कुमार, डॉ मिथिलेश कुमार, ए एन एम तृप्ति कुमारी सिंह, रिंकू कुमारी, रंजना कुमारी, कंचन ज्योति अर्चना,शालिनी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा वायरस फाइटर के रूप में प्रतिदिन मानवता को देखते हुए ईमानदारी एवं निष्ठा पूर्वक जोखिम भरा कार्य किया जा रहा है।

धर्मेंद्र कुमार मिश्रा
कोशी की आस@मधेपुरा

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