मधेपुरा : युवा पीढ़ी, मोबाइल फोन और पोर्न साईट पर परिचर्चा।

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युवा वर्ग सोशल नेटवर्किंग साइट जैसी आभासी दुनिया में भटक रहे हैं। न तो इंटरनेट गलत है और न ही सोशल नेटवर्किंग साइट, गलती इसके उपयोग की सरलता है। सोशल नेटवर्किंग साइट के उपयोग संबंधी नियमों में बदलाव जरूरी है। ताकि युवा वर्ग इसके दुरूपयोग से बच सकें।

उक्त बातें बाबा विशु राउत महाविद्यालय,चौसा के प्राचार्य प्रो उत्तम कुमार ने कही। पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध को लेकर चल रहे अभियान के तहत शंभू डिजिटल वर्ल्ड परिसर में सामाजिक शैक्षणिक कल्याण संघ चौसा द्वारा आयोजित परिचर्चा ”युवा पीढ़ी, मोबाइल फोन और पोर्न साईट” को संबोधित कर रहे थे। परीक्षा नियंत्रक डॉ सुरेश प्रसाद साह

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ने कहा कि पॉर्नोग्राफी के बढ़ते चलन से नई पीढ़ी नैतिक रूप से बर्बाद हो रही है। संघ का यह पहल अनोखा है। ऐसे मुद्दों को उठाने के लिए साहस चाहिए। उन्होंने कि हमें इसे एक मुहिम की तरह शुरू करना होगा। सिर्फ पोर्न बैन से काम नहीं चलेगा बल्कि इस बाबत मानसिकता में भी बदलाव लाना होगा। नाबालिकों को हरहाल में मोबाईल से परहेज करना चाहिए।

नवचयनित अंचल अधिकारी चन्द्रजीत प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते साल के आखिर में 827 पोर्नोग्राफिक साइटों पर पाबंदी लगाई थी। लेकिन इससे खास अंतर नहीं आया है। युवा पीढ़ी अपने मतलब की चीजों के लिए नई-नई साइटें तलाश रही है, साथ ही जिन साइटों पर पाबंदी लगी थी वह भी नए नाम के साथ आ रही हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद बीते कुछ वर्षों से यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

पूर्व सांसद प्रतिनिधि अभिनंदन मंडल ने कहा कि देश में जिस तरह से डिजीटल क्रांति के कई फायदे हुए हैं, लेकिन इसके बहाने आसानी से बेची जा रही अश्लीलता युवा पीढ़ी को पथभ्रष्ट भी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए  सरकार से अधिक समाज को जिम्मेदारी लेनी होगी ।

साहित्यकार याहिया सिद्दीकी ने कहा कि “पॉर्नोग्राफी एक वैश्विक समस्या है। भारत में एक विशेष कानून बनाने की जरूरत है। इससे यौन शोषण, पॉर्नोग्राफी और बाल तस्करी पर अंकुश लगाया जा सकेगा। स्कूलों में यौन शिक्षा के जरिए भविष्य में जीवन में आने वाले यौन हिंसा पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों के रवैये के प्रति माता-पिता की सतर्कता से भी ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। अगर इस समस्या पर रोक लगाने के ठोस उपाय नहीं किए गए तो इंटरनेट व स्मार्टफोनों की सुलभता भविष्य में इस समस्या को बेहद जटिल बना सकती है। इससे परिवारों के टूटने का खतरा भी बढ़ सकता है।

चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश रंजन ने कहा कि पोर्न फिल्में देखने का स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। पोर्न फिल्में देखने के दौरान जहां मूड-बूस्टिंग हॉर्मोन का स्त्रावण बढ़ जाता है वहीं दिमाग पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। पोर्न फिल्में देखने वाले मर्दो के दिमाग संकुचित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकगण  अपने बच्चों को कभी भी अकेलापन महसूस न होने दें। उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ें।

 

युवा समाजसेवी मनोज शर्मा ने कहा कि समस्या की जड़ में समाज की संकुचित शोच है । लोग अपने बच्चों को सेक्स, पीरियड आदि जैसे शब्दों से दूर रहने की बात कहते हैं। जबकि, हमें उन्हें हर चीज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्न के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जन जागरुकता की जरूरत है, इसमें मीडिया की भूमिका अहम है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार सह सामाजिक शैक्षणिक कल्याण संघ के सचिव संजय कुमार सुमन ने कहा कि कहा कि इंटरनेट पोर्न के माध्यम से समाज मे फैल रही विकृतियों व समाज के मूल्य मान्यता सहित सामाजिक सदभाव में ख़लल पड़ता है। जिसके कारण समाज मे यौनजन्य हिंसा बढ़ रही है। बिहार सहित पूरे देश में पोर्न साइट पर रोक लगाई जाए, ताकि कोई गंदी चीजों को न देख पाए। हम एक स्वस्थ समाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहें। उनका कहना है कि भावी पीढ़ी को पोर्न के कुप्रभावों से बचाना जरूरी है।

कार्यक्रम में बाबा विशु राउत महाविद्यालय चौसा के प्राचार्य प्रोफेसर उत्तम कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ सुरेश प्रसाद साह,चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश रंजन, नव चयनित अंचल अधिकारी चन्द्रजीत प्रकाश, पूर्व सांसद प्रतिनिधि अभिनंदन मंडल,साहित्यकार याहिया सिद्दिकी, शंभूशरण चौरसिया, जवाहर चौधरी, सुधाकर यादव, कुमार साजन, प्रमोद पासवान, सत्यप्रकाश गुप्ता ”विदुरजी” ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

राहुल यादव

कोशी की आस@मधेपुरा

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