18 वर्षों की कानूनी-लड़ाई के बाद दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का प्रकाशन और बिक्री बन्द

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मुंगेर 23 मार्च : वर्ष 2001 से लगातार संसद में तारांकित-प्रश्न, केन्द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली में बहस और अवैध मुंगेर संस्करण के मामले में जांच के आदेश, बिहार सरकार की आडिट-जांच रिपोर्ट, मुंगेर न्यायालय में मुकदमा, कोतवाली में प्राथमिकी, पटना उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में लगातार 18 वर्षों से कानूनी-लड़ाई के बाद हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लि0 ने अवैध और बिना निबंधन वाले दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का प्रकाशन और बिक्री आज से बन्द किया, नया पूर्बी बिहार, नगर संस्करण की शुरूआत कीं। बिहार सरकार ने दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का सरकारी विज्ञापन विगत दो वर्षों से बन्द रखा है।

प्रथम नामजद अभियुक्त व पूर्व कांग्रेस सांसद शोभना भरतिया की एफ0आई0आर0 रद्द करने वाली याचिकाओं के खारिज होने के बाद मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, कोरपोरेट कार्यालय- द्वितीय फलोर, 18-20, कस्तुरवा गांधी मार्ग, नई दिल्ली।-110001 ने हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध और बिना निबंधनवाले कथित “मुंगेर-संस्करण”  का मुंगेर जिले में आज से प्रकाशन और बिक्री अचानक बन्द  कर दिया।

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कंपनी ने आज से मुंगेर जिले के हिन्दी पाठकों के लिए दैनिक हिन्दुस्तान का नया पूर्वी बिहार संस्करण का प्रकाशन और बिक्री शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस संस्करण का नया नाम “नगर संस्करण, पूर्वी बिहार” जमुई, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, बांका दिया है। 22 मार्च तक कंपनी ने मुंगेर जिले में लगभग 19 वर्षों तक अवैध ढंग से बिना निबंधन का “दैनिक हिन्दुस्तान”  के मुंगेर संस्करण का प्रकाशन और वितरण किया।

संस्करण बदलने से क्या फर्क पड़ा? 

22 मार्च 2020 को मुंगेर जिले में प्रकाशित और बिक्री किए गए दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण में प्रथम पृष्ठ के शीर्ष पर दाहिनी ओर “मुंगेर-संस्करण” मुद्रित और प्रकाशित था। इस संस्करण में पृष्ठ-04 पर मुंगेर समाचार, पृष्ठ-05 पर मुंगेर समाचार, पृष्ठ-07 पर जमालपुर समाचार, पृष्ठ-11 पर मुंगेर आसपास के समाचार प्रकाशित हुए। मुंगेर संस्करण केवल मुंगेर जिले के पाठकों के बीच ही प्रकाशित और बिकते थे। आज से अर्थात 23 मार्च से मुंगेर जिले में कंपनी ने दैनिक हिन्दुस्तान के नए “नगर संस्करण, पूर्वी बिहार” का प्रकाशन और बिक्री शुरू कर दिया है। कंपनी ने आज के नए संस्करण का नया नाम “नगर संस्करण, पूर्वी बिहार” जो जमुई, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर और बांका के लिए प्रकाशित और वितरित किया जाएगा। दैनिक हिन्दुस्तान के आज के मुंगेर जिले के नए संस्करण-नगर संस्करण, पूर्वी बिहार में मुंगेर जिले की सभी खबरों को मात्र एक पृष्ठ  पृष्ठ संख्या- 04 में सिमट गया है। आज के नए संस्करण में कंपनी ने अखबार के प्रथम पृष्ठ पर दाहिनी ओर नए संस्करण का नाम भी मुद्रित और प्रकाशित किया है और लिखा है — नगर संस्करण जमुई, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, बांका। मुंगेर के नए संस्करण में पृष्ठ संख्या -03 पर आज से “पूर्वी बिहार” संस्करण कंपनी ने छापना शुरू कर दिया है। आज के मुंगेर के नए संस्करण में पृष्ठ-03 पर “पूर्वी बिहार” पृष्ठ-04 पर ‘मुंगेर‘, पृष्ठ-05 पर ‘बांका‘‘, पृष्ठ-06 पर ‘बांका‘‘, पृष्ठ-07 पर ‘‘खगड़िया‘‘ और पृष्ठ-08 और 09 पर ‘‘ जमुई‘‘ प्रकाशित हुए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दैनिक हिन्दुस्तान का जो नया संस्करण मुंगेर में बिकना आज से शुरू हुआ है,  वह संस्करण एक साथ जमुई,  लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर और बांका जिलों में प्रकाशित और बिक्री होंगें।

कंपनी की ओर से दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध मुंगेर संस्करण का प्रकाशन आज से बन्द करने की काररवाई से दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध मुंगेर संस्करण के जरिए सरकारी विज्ञापन मद में सरकारी खजाने की लूट के मुकदमे को और भी कानूनी बल मिल गया है।

अभी-अभी मुंगेर जिले की पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह ने कोतवाली कांड संख्या- 445, वर्ष 2011 में पूरे प्रकरण में बिहार के ला-सेके्रेटरी से कानूनी मंतव्य लेने की घोषणा बहस के बाद की थीं। एस0पी0 लिपि सिंह की घोषणा के तुरंत बाद कंपनी ने दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध और बिना निबंधन के मुंगेर संस्करण का प्रकाशन और बिक्री मुंगेर जिले में आज से बन्द कर दिया है। कानून की नजर में यह एक बहुत बड़ी घटना है।

स्मरणीय हो कि बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग,पटना ने दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर, भागलपुर सहित बारह जिलों के जिलावार संस्करणों का सरकारी विज्ञापन प्रकाशन विगत दो वर्षों से बन्द कर रखा है। कंपनी अपनी त्रुटि को छिपाने के लिए झारखंड राज्य के सरकारी विज्ञापनों को छापकर जनता और सरकार के तंत्र को भ्रमित करने का काम विगत दो वर्षों से करती आ रही थीं।

दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध मुंगेर संस्करण के जरिए सरकारी खजाने की लूट से जुड़ी पुलिस प्राथमिकी – कोतवाली कांड संख्या- 445, वर्ष 2011, के सूचक और सामाजिक कार्यकर्ता मन्टू शर्मा ने इस घटना को कानूनी लड़ाई में पहली सीढ़ी पर छोटी सी कानूनी जीत की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा है कि आगे की कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

सामाजिक कार्यकर्ता मन्टू शर्मा

मैं, श्रीकृष्ण प्रसाद, अधिवक्ता, अपने स्वर्गीय पिता व अधिवक्ता, पत्रकार और अंग्रेजी शिक्षक स्व0 श्री काशी प्रसाद को विशेष रूप से नमन करता हूँ और उनके आशीर्बाद की आगे भी कामना करता हूँ। विगत 18 वर्षों तक अपने पिता स्व0 श्री काशी प्रसाद, अधिवक्ता के मार्गदर्शन में हिन्दुस्तान अखबार के अवैध मुंगेर और अन्य जिलाबार संस्करणों और सरकारी खजाने की लूट की कानूनी लड़ाई संसद से केन्द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली, मुंगेर न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली तक लड़ पाया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता पी0एन0 पांडेय, आर0के0 चैधरी, दिल्ली के स्वतंत्र पत्रकार चन्द्रशेखरम्, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ए0के0 वर्मा,  मुंगेर व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार द्वितीय, जमालपुर, दिलीप सिंह अधिवक्ता, आनन्द सिन्हा अधिवक्ता एवं अन्य को इस कानूनी लड़ाई में निःशुल्क कानूनी परामर्श के लिए कृतज्ञता प्रकट करता हूँ।

मुंगेर के यशस्वी पूर्व सांसद ब्रह्मानन्द मंडल को विशेष कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। श्री मंडल ने सर्वप्रथम देश में मीडिया हाउस के आर्थिक अपराध के विरूद्ध संसद में सवाल उठाने का साहस किया और दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के अवैध जिलावार संस्करण के मामले को संसद में तारांकित प्रश्न के जरिए उठाया और मीडिया जगत के आर्थिक भ्रष्टाचार के विरूद्ध कानूनी जंग की शुरूआत कीं। पूर्व सांसद ब्रह्मानन्द मंडल के संसद में तारांकित प्रश्न के उठने के बाद ही केन्द्र सरकार ने बिहार सरकार को पूरे प्रकरण में आडिटर्स-टीम से जांच कराने का आदेश दिया था। साथ ही मुंगेर व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता बिपिन कुमार मंडल को भी कृतज्ञता प्रकट करता हूँ, जिन्होंने इस मुकदमे में सहयोग किया।

श्रीकृष्ण प्रसाद, अधिवक्ता

मैं, श्रीकृष्ण प्रसाद, अधिवकता मात्र इतना कहना चाहता हूँ कि देश के खजाने की रक्षा के सूचक मन्टू शर्मा की ओर से मैंने निःशुल्क मुंगेर न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अभियोजन-पक्ष की ओर से बहस कीं और ईश्वर की असीम कृपा से प्रमुख अभियुक्त व कंपनी की चेयरपर्सन व पूर्व कांग्रेस सांसद शोभना भरतिया की एफ0आई0आर0 रद्द करनेवाली याचिकाएं खारिज हो गईं।

श्रीकृष्ण प्रसाद, अधिवक्ता की कलम से

(यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं, कोशी की आस का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)

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