हर 100 वर्ष के बाद आती है महामारी : बांग्ला समाज।

0
179
- Advertisement -

मुंगेर : एक सौ वर्ष पूर्व किया गया था, काली भक्त वामा खेपा ने महामारी में दक्षिणेश्वर काली की स्थापना, स्थापित काली की आज भी होती है पूजा। बिहार राज्य का जमालपुर क्षेत्र इतिहास के आईने में महामारी जैसे इतिहास को भी अपने आंचल में समेटे हैं और यह साक्ष्य भी है कि यहां प्रख्यात काली भक्त बामाखेपा ने दक्षिणेश्वर काली की स्थापना कर संक्रमण जैसे महामारी से मुक्ति दिलाया था। इसका जिक्र आज भी तारापीठ भैरव में मिलता हैं। ब्रिटिश हुकूमत जब भारत के कोलकाता में अपना पांव पसारा तो उसके बाद जमालपुर को अपना केंद्र बनाया और यहां अपनी संस्कृति भी स्थापित की, जो आज तक कायम है।

इधर शहर के जुवली वेल के समीप प्रवासी बंगाली समाज ने बारोबारी तल्ला स्थापित की थी और इसका पहला नाम सरस्वती बाड़ी था। एक सौ वर्ष पूर्व भी रेल नगर जमालपुर में महामारी फैल गई और यहां पर चारों और त्राहिमाम था। जिसके बाद तारापीठ से आए महान सिद्ध पुरुष काली भक्त बामा खेपा को एक शिष्य ने जमालपुर लाया था और बामाखेपा ने यहां पर दक्षिणेश्वर काली की पूजा अपने अंदाज में किया। जिसके बाद यहां हैजा व कोलरा सहित अन्य बीमारी दूर हो गया था।

- Advertisement -

इस घटना की पुष्टि प्रह्लाद घोष सहित मानिक सरकार, काली सरकार, दीपंकर चटर्जी, विवेक तनु मुखर्जी सहित अन्य समाज के लोगों ने किया तथा कहा उनके द्वारा स्थापित काली की आज तक पूजा की जा रही है और बलिप्रथा पर रोक लगा मंत्र प्रथा आरंभ किया, जो एक इतिहास है। पश्चिम बंगाल में बामाखेपा काली भक्त पुजारी का अपना इतिहास है तथा बंगाली समाज में परमहंस स्वामी माता शारदा सहित अन्य काली माता के पुजारी है। कालीघाट दक्षिणेश्वर काली तारापीठ सहित अन्य जगह पर काली की पूजा ऐतिहासिक है।

गंगा रजक और विवेक कुमार यादव
कोशी की आस@मुंगेर

- Advertisement -