एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पत्र में प्रवासी मजदूरों को विधि व्यवस्था के लिए खतरा बताना शर्मनाक:- जाप (लो0)

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पटना /5 जून : बिहार पुलिस के ADG (लॉ एंड आर्डर) अमित कुमार के द्वारा जारी किए गए पत्र जो सूबे के सभी डीएम-एसपी को 29 मई को भेजा गया है, तथा जिसमें बाहर से लौटे बिहार के अप्रवासी मजदूरों को विधि व्यवस्था के लिए खतरा बताना, उनपर क्राइम बढ़ाने को लेकर आशंका जताने पर जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के युवा प्रदेश प्रवक्ता रजनीश कुमार तिवारी ने बयान जारी कर कहा है कि यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि एडीजी मुख्यालय के इस पत्र में बिहार के अप्रवासी मजदूर जो कि बिहार के नागरिक हैं, जो देश के विकास के लिए अन्य राज्यों में मेहनत मजदूरी कर अपना भरण-पोषण करते हैं। वैसे मजदूर जो गरीब शोषित वंचित तबके से आते हैं उन पर अपराध और विधि व्यवस्था भंग करने को लेकर आशंका जताया जा रहा है। उसमें उन्हें लूटपाट और संगीन अपराधिक घटनाओं में आने वाले समय में संलिप्तता बताना, बेहद ही दुखद बात है।

उन्होंने कहा कि इस पत्र को राजनीति से प्रेरित होकर और सरकार के इशारे पर जारी किया गया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार के इरादे कमजोर और अप्रवासी मजदूरों के हित में ठीक नहीं, वह उन्हें बिहार के लिए बोझ मानते हैं और अपनी नाकामियों को छुपाने हेतु इस तरह के पत्र को जारी किया गया है।

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रजनीश तिवारी ने कहा कि बिहार सरकार ओछी मानसिकता अपनाई हुई है। बिहार के मजदूर जो हाल में आए हैं, उनको अपराधी बता रहे हैं, उन पर अपराध बढ़ाने और लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ने की आशंका जता रहे हैं, हद है ऐसे मुख्यमंत्री और ऐसे शासन प्रणाली जो अपने गरीब शोषित कमजोर तबके के लोगों को मजदूरों को अपराध बढ़ने को लेकर उन पर निशाना साधा जा रहा है। पत्र में उन पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। उन पर नजर बनाए रखने की बात हो रही है। शर्म आनी चाहिए ऐसी सरकार को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। मुख्यमंत्री जिन्हें सिर्फ अपने कुर्सी, वोट और सियासत के पड़ी है, लॉक डाउन में विभिन्न प्रदेशों में दर-दर की ठोकरें खा रहे है। भूख से अपनी जानो को गवा रहे हैं। अपने परिजनों को खोए हुए अप्रवासी मजदूरों को 50 दिन तक नीतीश कुमार बिहार लाने का काम नहीं किए। जब केंद्र सरकार ने गाइडलाइन जारी किया तो मजबूरन उन्हें बिहार इन मजदूरों को लाना पड़ा और अब यह इनके लिए बोझ बन गए आखिर 15 वर्षों में पलायन रोकने के लिए बिहार सरकार ने क्या किया अपनी गलतियों का खामियाजा इन मजदूरों पर दोषारोपण कर क्या दर्शाना चाहते हैं मुख्यमंत्री बिहार की जनता सब भली भांति देख रही है और समझ रही है।

रजनीश तिवारी ने आगे कहा कि इस पत्र की जानकारी पूरी बिहार सरकार को थी। किसी अधिकारी ने एवं सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लिहाजा सब इससे सहमत है यह स्पष्ट हो चुका है।

पत्र में साफ दर्शाया गया है कि आर्थिक चुनौतियों के कारण वे सभी परेशान और तनावग्रस्त हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद उन सबों को बिहार में रोजगार मिल पाने की संभावना कम है। इस कारण वे अपना खर्च जुटाने के लिए अनैतिक और विधि विरूद्ध काम में शामिल हो सकते हैं. इससे अपराध में वृद्धि हो सकती है और विधि व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है क्या सरकार के पास जब कोई संसाधन नहीं है तो बड़े-बड़े वादे क्यों कर रही है मनरेगा, मखाना, कौशल और अन्य से रोजगार देने के वायदे कर रही सरकार को अब चिंता क्यों हो रही है और उन्हें अपने अप्रवासी मजदूरों को अपराधी बताना अपनी नाकामियों और सरकार के पास कोई संसाधन नहीं होने के खुलासा पत्र के माध्यम से हो चुका है। जन अधिकार पार्टी इस पत्र की कड़ी निंदा करती है और सरकार से मांग करती है कि इस पत्र का स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद आकर दें एवं सभी लौटे प्रवासी मजदूरों की रोजगार को सुनिश्चित करें।

वहीं जन अधिकार पार्टी मजदूर विरोधी रवैया अपनाए हुए सरकार को 7 जून को फेसबुक लाइव पर पार्टी के एक कार्यकर्ता नेता इस सरकार का पोल खोलने का काम करेंगे। “यह सरकार एक धोखा है, बिहार बचा लो मौका है” हेस्टैक अभियान सोशल प्लेटफॉर्म ऑफर पार्टी के द्वारा चलाया जाएगा।

विवेक कुमार यादव
कोशी की आस@पटना

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