पूर्णियाँ की बेटी प्रीति के परिवारिक संघर्ष गाथा “मेरे सपने हुए सच” प्रकाशित

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प्रफुल्ल कुमार सिंह

कोशी की आस@पूर्णियाँ

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‘हर संघर्ष को उसका स्थान मिले’ को अपना ध्येय वाक्य मानने वाली प्रीति कुमारी सामाज में ‘पॉज़िटिव रिपोर्टिंग’ को अपना लेखन मानती है। परिवारिक संघर्ष गाथा मेरे सपने हुए सच’ भारत के ग्रामीण परिवेश जानकीनगर गाँव से एक शिक्षित किसान पिता द्वारा अपने कमजोर आर्थिक स्थिति और साधनहीनता के बावजूद अपने प्रतिभाशाली बच्चों को सफल जिंदगी देने की संघर्ष गाथा है।

पुस्तक के बारे में:

मेरे सपने हुए सच’ एक पिता के साधनहीन होने के बावजूद अपने पुत्र को शिक्षा के औजार से सक्षम और शक्तिमान् बनाने की महागाथा है। यह जीवन-कथा व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की जिजीविषा को समय के प्रत्येक पल और समाज के प्रत्येक संसाधन के सर्वोच्च उपयोग का शास्त्र है। यह चारों ओर से बेवस कर दिए गए एक पिता का जीवन-समर में अपने असहाय पुत्र को कर्मक्षेत्र में अर्जुन बनने के लिए दिया गया व्यावहारिक ज्ञान का दास्तावेज है। यह पुस्तक एक पूरे परिवार की संघर्ष-यात्रा का चित्र है।

यह जीवन-कथा सामाजिक परिस्थितियों का सटीक बयान है और ढहते परिवारिक मूल्यों के बीच संस्कारों पर आधारित जीवनशैली की स्थापना है। व्यापारिक लेन-देन को ही जीवन-मूल्य माननेवाले समाज में निस्स्वार्थ भाव से मदद करनेवाले उज्ज्वल चरित्र भी पुस्तक के प्राणबिंदु है। कुल मिलाकर पुस्तक इस दौर की जीवन-व्यवस्था में व्यक्ति के चारित्रिक साहस की विजय-गाथा है, जो दुर्गम दुरवस्थाओं के दावानल से बाहर निकालने में समर्थ मार्ग दिखाती है। यह एक दिशा है- जीवन को सही मायनों में जीने और सपने को साकार करने के जज्बे की।

प्रीति के बारे में:

बनमनखी के ग्रामीण अंचल सहुरिया सुभाय मिलिक पंचायत के जानकीनगर गाँव में किसान पिता ओमप्रकाश यादव एवं गृहिणी माता नमिता देवी के घर 23 मार्च 1986 को जन्मी प्रीति दो भाई एवं दो बहन में सबसे बड़ी है। इग्नू से हिन्दी में एम.ए. और जम्मू से बीएड की शिक्षा प्राप्त की है। प्रीति अभी नई दिल्ली में सफल उद्दमी के साथ बच्चों की पढ़ाई और लेखन की जिम्मेदारी बखूबी सम्भाल रही है। वे बताती है कि घर में बड़ी होने के नाते अपने परिवार के संघर्ष और सफलता को नजदीक से जानती हूँ। कैसे परिवार विषम परिस्थिति को भेदते हुए मंजिल को प्राप्त किया है, जिसे आज के ग्रामीण परिदृश्य में रोजगार की आश लगाये बैठे निराश युवाओं को बताना अपना सामाजिक दायित्व समझती हूँ। “मेरे सपने हुए सच” प्रभात पेपरबैक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। पाठक की सुविधा के लिए यह पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध है जिसे फ्लिपकार्ट और अमेजन से खरीदा जा सकता है।

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