पूर्णियाँ: हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित

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प्रफुल्ल कुमार सिंह
कोशी की आस@पूर्णियाँ

प्रेस विज्ञप्ति,
सेवा में संपादक महोदय पूर्णिया
विषय _ हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित
महाशय
सादर निवेदन पूर्वक कहना है आज दिनांक 14 सितंबर 2019 को सहयोग संस्थान रेडियो स्टेशन रोड के प्रांगण में हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम मैं उपस्थित छात्र एवं सदस्यों को संबोधित करते हुए डॉ अजीत प्रसाद ने कहा की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा 1917 में भरुच (गुजरात) में सर्वप्रथम राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता प्रदान की गई थी। तत्पश्चात 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिए जाने का निर्णय लिया तथा 1950 में संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के द्वारा हिन्दी को देवनागरी लिपि में राजभाषा का दर्जा दिया गया।
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से 14 सितंबर को ‘हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह हमारी विडंबना रही है कि देश में राजभाषा के रूप में हिन्दी को संविधान लागू होने के पूर्व कभी भी आधिकारिक मान्यता नहीं मिली थी। मुगलों के समय राजभाषा के रूप में अरबी-फारसी का बोलबाला था, तो अंग्रेजों ने अंग्रेजी और उर्दू को राजकाज चलाने में इस्तेमाल किया। दरअसल, हिन्दुस्तान में खड़ी बोली और हिन्दी जनभाषा के रूप में मान्य रही और पुष्ट होती चली गईl आज भी सरकार ने राष्ट्रभाषा के रूप में राजभाषा को स्वीकार नहीं किया है, मगर जनता ने इसे राष्ट्रभाषा के रूप में अंगीकार ‍कर लिया है। इसकी व्यापक स्वीकृति शीघ्र इसे विश्वभाषा का दर्जा प्रदान करवा देगी। इसके पीछे देवनागरी का सांस्कृतिक होना भी है।

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हरिवंश राय बच्चन जी कहा करते थे की हिंदी दिवस के दिन हिंदी बोलने वाले व्यक्ति दूसरे हिंदी बोलने वाले व्यक्ति को हिंदी में बोलने की सलाह देते हैं
सहयोग संस्थान के द्वारा छात्रों एवं सदस्यों के बीच हिंदी जागरूकता विषय पर निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता करवाया गया प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को संस्थान अध्यक्ष डॉ अजीत प्रसाद सिंह के द्वारा हिंदी पुस्तक देकर पुरस्कृत किया गया कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान सदस्य डॉ राजेश गोस्वामी डॉक्टर बबीता गोस्वामी राहुल कुमार शर्मा रमेश कुमार गोस्वामी हनी कुमार मणि कुमार गुंजेश कुमार सिंह सतीश कुमार ठाकुर प्रीतम कुमार रंजीत कुमार रमन रूपेश कुमार गांधी सुधांशु कुमार सिंह का सहयोग बहुत ही सराहनीय रहा।

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