4 यूनिट खून का वसूला जा रहा 40 हजार, चल रहा है निजी क्लीनिक में मरीजों को लूटने का गोरखधंधा

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सहरसा जिले में गरीब मरीजों के इलाज के नाम पर जमकर शोषण किया जाता है। वही लाल रक्त के काले कारोबार का फिर से बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जिसमें स्थानीय भीआईपी रोड, पूरब बाजार स्थित पेट्रोल पंप के सामने अवस्थित टेकरीवाल भवन में चल रहे अनुराग हॉस्पिटल के संचालक डॉ० रविंद्र कुमार सिंह द्वारा 4 यूनिट ब्लड की कीमत मरीज से 40 हजार रुपए वसूल की गई।

वहीं एक मरीज को बीते 3 दिनों में 4 यूनिट ब्लड चढ़ाई गई। इतना ही नहीं 30 हजार रुपए में हुए ऑपरेशन के सौदे के बाद चार यूनिट ब्लड, दवाई समेत आईसीयू के चार्ज लगाकर 1 लाख 69 हजार रुपए की बिल मरीज के परिजन को दे दी गई, जिसे देख परिजन सकते में आए। जिसके बाद उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता एवं कोसी युवा संगठन के संयोजक सोहन झा से संपर्क किया।

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उन्होंने जब अनुराग हॉस्पिटल पहुंचकर मैनेजर मनु कुमार से मरीज को दी गई बिल की जानकारी मांगी। ऐसे में खुलेआम कैमरे पर स्वीकार किया कि उन्होंने चार यूनिट ब्लड खरीद करवाई थी। जिस 4 यूनिट ब्लड की कीमत 40 हजार रुपए ब्लड के दलाल द्वारा ले ली बताई गई। फिर मामला कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री सह स्थानीय विधायक डॉ० आलोक रंजन के समक्ष रखी गई। मंत्री द्वारा संज्ञान लेते हुए मामले को सिविल सर्जन तक पहुंचाया गया। ऐसे में मंत्री द्वारा दिए गए निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ० अवधेश कुमार सहित सदर अस्पताल की टीम द्वारा आनन-फानन में रविवार को अनुराग अस्पताल पहुंचकर जांच-पड़ताल की गई। जिसमें चिकित्सक के सर्टिफिकेट पर भी सवाल खड़े हुए। साथ ही चार यूनिट ब्लड के 40 हजार रुपए वसूलने की भी बातें सामने आई।
हालांकि सिविल सर्जन द्वारा एक अन्य जांच टीम के गठन किए जाने की बात कही जा रही है।

वहीं सिविल सर्जन के निजी अस्पताल से निकल जाने के बाद अस्पतालकर्मी द्वारा जहां मरीज को डराया-धमकाया गया। वही उनके परिजन के साथ मारपीट करने की बातें भी सामने आई। ऐसे में मरीज के परिजन इसकी शिकायत सदर थाना पहुंचकर दी। जिसके बाद सदर थाना की टीम अनुराग अस्पताल पहुंची। जहां बंधक बनाए गए मरीज को रिहा कराया गया। वहीं सिविल सर्जन के जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

सहरसा जिले के सोनबरसा राज प्रखंड क्षेत्र के टेंधराहा गांव निवासी ननकू शर्मा की पत्नी 35 वर्षीय पत्नी सीता देवी दूसरी बार गर्भवती हुई। उन्हें गांव के ही आशा कार्यकर्ता द्वारा भीआईपी रोड स्थित अनुराग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सक और मैनेजर ने एकमुश्त उसके इलाज की कुल कीमत 30 हजार बताई गई। जिसमें ऑपरेशन सहित सभी दवा की खर्च बताई गई थी। बीते 12 फरवरी को मरीज को भर्ती कराया गया। वही 12 तारीख की देर रात ही मरीज का ऑपरेशन किया गया। जिसमें बच्चे की मृत्यु हो गई।

ऑपरेशन के बाद क्या हुआ ?

ऑपरेशन में मृत बच्ची निकलने के बाद परिजनों को मरीज के शरीर में खून नहीं होने की सूचना दी गई। साथ ही उन्हें चार यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने की बातें भी कही गई। ऐसे में पर मरीज के परिजन ब्लड की अनुपलब्धता की बातें बताएं। जिसके बाद ठेके पर ब्लड खरीदने की बातें कही गई। फिर बीते 20 फरवरी को पेशेंट के परिजन को जब 1 लाख 69 हजार रुपए की बिल दी गई। जिसे देख मरीज के परिजन सकते में आ गए। मरीज को अस्पताल में बंधक बना लिया गया।

मामला कैसे आया संज्ञान में?

मरीज के परिजन द्वारा कोसी युवा संगठन के संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता सोहन झा तक इसकी शिकायत पहुंची। मरीज के परिजनों की शिकायत के बाद सोहन झा अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के मैनेजर मन्नू सहित अन्य कर्मियों से बात की। जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी बना ली गई। जिसमें अस्पताल के मैनेजर मनु मनु ने चार यूनिट ब्लड की कीमत 40 हजार में खरीदने की बात स्वीकार की।

वाइरल वीडियो में क्या था?

वीडियो में सोहन झा और मैनेजर की बातचीत रिकॉर्ड है।
सोहन झा – यही बिल है ना?
मैनेजर मन्नू – हाँ।
सोहन झा – इनका बिल जो लिखा हुआ है। उसमें मेडिसिन 23 हजार, ऑपरेशन भी 35 हजार एवं ब्लड 4 यूनिट 40 हजार रुपए। यानी ब्लड का 40 हजार लिख दिए हैं।
मैनेजर मन्नू – परिजन को बता दिया गया था कि आप ब्लड अरेंज करा दीजिए। हॉस्पिटल में कोई व्यवस्था नहीं है। ब्लड जो देता है। वह पैसा तुरंत ले लेता है।
सोहन झा – 10 हजार एक यूनिट हो गया।
मैनेजर मन्नू – सारा बात बता दिया गया था।
सोनम झा – ब्लड सदर अस्पताल से ले लेते।
मैनेजर मन्नू – वही ना, हमलोग थोड़े बंधन में थे। हमलोगों ने परिजन को कहा आप ले आइए। नहीं लाए तो हम लोगों ने व्यवस्था करा दी।
सोहन झा – यानी 4 यूनिट ब्लड चढ़ाए उसका कीमत 40 हजार का बिल हुआ।
मैनेजर मन्नू – जी। यानी वीडियो में मैनेजर ने साफ-साफ 4 यूनिट ब्लड की कीमत 40 हजार बताई गई है। ऐसे में आगे देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जाती है?

रितेश : हन्नी
कोशी की आस@सहरसा

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