सहरसा : कोशी में शोक की लहर, नहीं रहे, महिषी विधायक व पूर्व मंत्री अब्दुल गफूर।

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रितेश : हन्नी
कोशी की आस@सहरसा

बिहार के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की दु:खद खबर सामने आ रही है। सहरसा जिले के महिषी विधानसभा क्षेत्र से विधायक व पुर्व मंत्री अब्दुल गफूर की मौत हो गई। वे आरजेडी के पुराने नेताओं में गिने जाते थे। अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र सहित जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। आरजेडी विधायक अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार थे, पहले उन्हें इलाज के लिए पटना के प्रसिद्ध पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। पारस हॉस्पिटल में सेहत में सुधार आने के बजाय हालत और ख़राब हो जाने के बाद उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाया गया। दिल्ली में एक सप्ताह से उनका ईलाज चल रहा था लेकिन आज उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके परिजनों के अनुसार पहले भी उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था, लेकिन कुछ दिनों पहले उन्हें  पटना  लाया गया था, लेकिन पटना के पारस में भर्ती कराने के बाद उनकी हालत और भी ख़राब हो गई।

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लम्बे समय से थे बीमार, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस, लीवर कैंसर से थे पीड़ित

जहाँ इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। बताते चलें कि आरजेडी विधायक अब्दुल गफ्फूर लिवर कैंसर से पीड़ित थे। लगातार उनका इलाज चल रहा था। 5 मई 1959 को उनका जन्म सहरसा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। सिमरी बख्तियारपुर से स्कूली शिक्षा पाने वाले डॉ० अब्दुल गफूर ने सहरसा कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और फिर पटना विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने उर्दू में पीएचडी की उपाधि भी ली।  1995 में अब्दुल गफूर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता लहटन चौधरी को महिषी विधानसभा सीट पर मात देकर सनसनी फैला दी थी। जनता दल से अलग होकर लालू यादव ने जब राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया तब अब्दुल गफूर उनके साथ आ गए। वह लगातार महिषी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। बिहार में 2015 में बनी महागठबंधन की सरकार में अब्दुल गफूर अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री भी रहे।  उनकी मौत से कोशी ने एक नेता खो दिया जिसकी भरपाई निकट भविष्य में सम्भव नहीं है।

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