कोरोना को लेकर सूबे में जारी अलर्ट मोड, आइसोलेशन वार्ड के गेट पर ही गंदगी का लगा अंबार

0
41
- Advertisement -

रितेश : हन्नी

कोशी की आस@सहरसा

- Advertisement -

कोरोना को लेकर पूरा बिहार अलर्ट मोड में है। सरकार के आदेशानुसार स्कूल-कॉलेज, सिनेमा हॉल, सार्वजनिक पार्क 31 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड को छोड़कर स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई है। मेला और सार्वजनिक आयोजन पर भी रोक लगा दी गई है। सभी स्वास्थ्यर्मियों की छुट्टियां रद कर दी गई है। लेकिन  सदर अस्पताल सहरसा में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है।

 

सहरसा के सदर अस्पताल में कोरोना वायरस से ग्रसित एवं संदिग्घ मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तो बना दिया गया है लेकिन आइसोलेशन वार्ड के द्वार पर ही गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जलजमाव की वजह से सड़न और बदबू से अस्पताल परिसर की स्थिति नरकीय बनी हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के कोरोना वायरस की रोकथाम के सारे दावे फिलहाल खोखले साबित हो रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीज भी स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी लापरवाही को देखकर दंग हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य महकमा यहाँ सिर्फ खानापूर्ति मात्र कर रहा है।

सिविल सर्जन ने अस्पताल निरक्षण के दौरान पत्रकारों से कहा कि बिहार में पटना एवं भागलपुर में ही कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों का जाँच सम्भव है। स्वास्थ्य राज्य मुख्यालय एवं जिला पदाधिकारी के विशेष निर्देश पर सदर अस्पताल में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों का प्राथमिक उपचार हेतु आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। उन्होंने दावा किया है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए सारा प्रबंध हो चुका है।

सिविल सर्जन के सारे दावे की उस समय पोल खोल गई जब सिविल सर्जन अपने अधिकारी को अस्पताल के पुरूष वार्ड में दिशानिर्देश दे रहे थे। वहीं पर एक विकलांग मरीज जमीन पर अपने इलाज के लिए करा रहा था लेकिन उस मरीज को न तो सिविल सर्जन देखना उचित समझा और न ही कोई स्वास्थ्य पदाधिकारी। वहीं तस्वीर में आइसोलेशन वार्ड के द्वार पर लगे गंदगी का अंबार स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।

- Advertisement -