हड़ताली शिक्षकों ने मौन धारण कर प्रदर्शित की अपनी वेदना

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सहरसा में टीइटी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सह शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष मंडल सदस्य सुभाष कुमार ने बताया कि 17 फरवरी 2020 से नियोजित शिक्षकों के जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के दरम्यान कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए पूरे भारत में लॉक डाउन घोषित कर दिया गया।

दूसरी तरफ बिहार के लाखों नियोजित शिक्षक लॉकडाउन का पालन करते हुए व अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए हड़ताली शिक्षक सोशल मीडिया के माध्यम से कोरोना विषाणु के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का कार्य कर रहे हैं। सरकार के तरफ से वार्ता को लेकर किसी तरह का पहल नहीं होता देख लॉक डाउन में भी हड़ताल में जमें हुए हैं और अपनी जायज मांगो के प्रति संघर्षरत हैं तथा अपनी चट्टानी एकता प्रदर्शित करते आ रहे हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले हड़ताल में शामिल सहरसा जिले के सभी प्रखण्डों के हड़ताली शिक्षकों ने सपरिवार शनिवार को महात्मा फुले की जयंती पर मौन व्रत धारण कर मुंह पर काली पट्टी लगाकर वेदना प्रदर्शित किया। टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सह जिला समन्वय समिति के सदस्य सुभाष कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि राज्य संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर हड़ताल अवधि में आर्थिक तंगी के कारण अब तक राज्य भर में 42 हड़ताली शिक्षकों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है। आज हड़ताली शिक्षकों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित किया।

साथ ही जिले के सभी हड़ताली शिक्षकों ने आज सपरिवार मुँह पर काली पट्टी बांधकर मौन व्रत धारण करके सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया। सहायक शिक्षक व राज्यकर्मी का दर्जा, समान सेवाशर्त, नवप्रशिक्षित शिक्षकों के वेतन विसंगति दूर करने सहित 7 सूत्री जायज मांगों को लेकर विगत 55 दिनों से हड़ताल जारी है लेकिन आजतक सरकार द्वारा शिक्षकों के मांगों पर न तो कोई विचार किया गया है और न ही हड़ताली शिक्षकों से वार्ता के लिये पहल की गई। बल्कि इसके विपरीत सरकार द्वारा हड़ताली शिक्षकों का वेतन रोक एवं उनके ऊपर दमनात्मक कार्रवाई यथा बर्खास्तगी निलंबन मुकदमा आदि कर मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा है।

जिला समन्वय समिति के नेता कमलेश कुमार कमल, दीपक झा, अजय कुमार, अशोक कुमार अग्रवाल अमित सिंह, पियूष रंजन, रौशन भगत,अमित अमन राकेश कमार, बिरेन्द्र कुमार, नन्दन भगत आदि ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को हड़ताली शिक्षकों से बात करनी चाहिए तथा जायज मांगों की पूर्ति करते हुए हड़ताल स्थगित करने की पहल करनी चाहिए अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 14 अप्रैल को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर संकल्प दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश व बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति का पालन करते हुए मांगे पूरी होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल अनवरत जारी रहेगा।

रितेश : हन्नी
कोशी की आस@सहरसा

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