हड़ताली शिक्षकों ने सपरिवार लिया मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल में डटे रहने का संकल्प।

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सहरसा : अपनी विभिन्न मांगों के लिए पिछले 58 दिनों से हड़ताल पर डटे नियोजित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मंगलवार को बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर लॉक डाउन का पालन करते हुए सपरिवार अपने-अपने घरों पर संकल्प दिवस मनाया। टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष कुमार ने बताया कि सपरिवार आयोजित संकल्प दिवस में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने वेतनमान तथा अन्य सारी सुविधाओं की मांग पूरी होने तक सरकार से लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि मार्च के मध्य में कोरोना वैश्विक महामारी के दस्तक ने बिहार समेत पूरे देश-दुनिया के समक्ष नये हालात पैदा किये हैं। हड़ताल में बने रहते हुए हम सब भी कोरोना संकट से जूझ रहे हैं। हालात बुरे हैं, पर हम चार लाख शिक्षकों और हमारे वेतन पर आश्रित हमारे लाखों परिवारिक सदस्यों के प्रति बिहार सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री को इस बात की चिंता नहीं है कि किस प्रकार से उनके शिक्षक अपने परिवार के साथ बगैर वेतन इस महामारी का सामना कर रहे होंगे, और कई शिक्षक हड़ताल के दौरान दुनिया छोड़ गए। जबकि कोरोना संकट में विभिन्न सरकारों के द्वारा अलग-अलग विभागों में अग्रिम वेतन भुगतान तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में एक मुश्त अग्रिम भुगतान किया जा रहा है।

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सरकार के इस निरंकुश रवैये के खिलाफ लॉकडाउन का पालन करते हुए नियोजित शिक्षकों ने लगातार कोरोना जागरुकता अभियान के साथ- साथ मौनव्रत सहित विभिन्न स्वरूपों में अपने आंदोलन को निरंतर जारी रखा है। जहां लॉकडाउन के बाबजूद घर पर रहकर शिक्षकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाने कार्य करते आ रहे हैं। वहीं हड़ताली शिक्षकों के प्रति सरकार के उदासीन रवैए को लेकर हड़ताली शिक्षकों में काफी रोष है।

संकल्प दिवस पर संघ के संयोजक अजय कुमार, वरिय उपाध्यक्ष दीपक कुमार झा, प्रवक्ता कमलेश कुमार कमल, अशोक कुमार अग्रवाल के अलावा विरेन्द्र कुमार, रौशन भगत, पियूष रंजन, विकाश सिंह, राकेश कुमार, ज्ञानेश कुमार आदि ने संकल्प लिया। संकल्प ले रहे नियोजित शिक्षक-शिक्षिकाओं की एकजुटता के लिए शिक्षकों ने एक- दूसरे हड़ताली शिक्षकों को बधाई दी।

रितेश : हन्नी
कोशी की आस@सहरसा

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