सिविल सर्जन ने की जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान की शुरुआत

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सहरसा/17 मई – जिले के सदर अस्पताल में बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार द्वारा बच्चे को टीका लगाकर जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण(जेई) अभियान की शुरुआत की गई. यह टीका सभी बच्चों में होने वाले जापानी इंसेफेलाइटिस यानी चमकी बुखार से बचाव में सहायक होगा।

साथ ही सिविल सर्जन डॉक्टर अवधेश कुमार ने बताया कि
कोरोना के कारण देश में हुए लॉकडाउन से जिले में 23 मार्च से टीकाकरण स्थगित कर दिया गया था। जिसे भारत सरकार के निर्देश पर 17 मई से प्रारंभ कर दिया गया है.कोविड-19 के अनिश्चितता को देखते हुए, कोविड-19 संक्रमण के बचाव का अनुपालन करते हुए आज से जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण प्रारंभ किया गया है। जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान की शत-प्रतिशत सफलता के लिए सिविल सर्जन डॉक्टर अवधेश कुमार बताया टीकाकरण अभियान मे 287409 बच्चों का प्रतिरक्षण करने का लक्ष्य रखा गया है।

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आवश्यक दिशा-निर्देश:

सिविल सर्जन डॉक्टर अवधेश कुमार ने इस अभियान की सघन पर्यवेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सभी स्वास्थ कर्मी को कोविड 19 के निर्देशों का पालन करते हुए अपने अपने क्षेत्र के 01 से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों का प्रतिरक्षण करवाने का निदेश दिया गया है। इसके लिए घर – घर जाकर लोगों को जेई एवं अन्य टीका के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया।

01- 15 साल तक के बच्चों को किया जाएगा प्रतिरक्षण :- डॉ कुमार विवेकानंद

जिला प्रतिरक्षण स डॉक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया टीकाकरण 01 से 15 साल तक के बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लगाकर टीकाकृत किया जाए। इसके लिए प्रत्येक सत्र पर 10 वायल जेई वैक्सीन दिया गया है. टीकाकरण के लिए शारीरिक दूरी का अनुपालन करना अनिवार्य होगा विद्यालय के संचालन प्रारंभ होने के बाद 05 साल से के उपर के बच्चों 15 साल तक के बच्चों का विद्यालय में अभियान चलाकर टीकाकृत किया जाएगा।

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस:-डॉक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया कि

इन्सेफेलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण ज्यादा गंदगी वाली जगह पर पनपता है साथ हा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है।

जपानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण:डॉक्टर कुमार विवेकानंद ने कहा कि –

जापानी इन्सेफेलाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है. और 1 से 15 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है.

इस मौके मे यूनिसेफ एसएमसी बनटेश नारायण महेता,मजहरुल हसन, यूएनडीपी के मोहम्मद खालिद, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि सूरज कुमार, पाथ के जिला समन्वयक मोहम्मद नौशाद , अस्पताल मैनेजर अमित कुमार चंचल, जिला प्रतिरक्षण कार्यालय के कर्मी दिनेश कुमार दिनकर , प्रमोद कुमार तथा अन्य, स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

युगेश्वर कुमार
कोशी की आस@सहरसा

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