उपचुनाव में बिखरता दिख रहा महागठबंधन, कई घटक दल के उम्मीदवार चुनावी मैदान में

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रितेश : हन्नी
कोसी की आस@सहरसा

लोकसभा चुनाव में एकजुट दिखने वाला महागठबंधन इस बार सिमरी बख्तियारपुर के विधानसभा उपचुनाव में पूरी तरह से बिखरता हुआ नजर आ रहा है। महागठबंधन में शामिल राजद के अलावा वीआइपी ने यहाँ से अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी है। जहाँ वीआइपी के उम्मीदवार को हम पार्टी और रालोसपा का समर्थन मिलता दिख रहा है, वहीं कांग्रेस ने अब तक पत्ता नहीं खोला है। ऐसे में राजद को सिर्फ लोजद से ही कुछ आस दिख रही है।

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बताते चलें कि जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से एक सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिनेश चंद्र यादव अब मधेपुरा से जदयू के सांसद हैं, किन्तु यह विधानसभा क्षेत्र खगड़िया लोकसभा के अंतर्गत आता है। सीट खाली होने के कारण एनडीए ने यहाँ से पूर्व विधायक अरुण कुमार को मैदान में उतारा है। लेकिन महागठबंधन में पेंच फंसा हुआ है। टिकट की चाह में वैसे तो कई नेता थे। परंतु राजद ने पार्टी के वर्तमान जिलाध्यक्ष मो० जफर आलम को मैदान में उतारा है। राजद प्रत्याशी इससे पूर्व दो बार यहां से भाग्य आजमा चुके हैं। जबकि महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी ने यहां से दिनेश निषाद को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित सभा में वीआइपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी ने स्पष्ट कर दिया कि लड़ाई एनडीए से है। परंतु राजद से दोस्ताना संघर्ष होगा।

उनका कहना है कि खगड़िया लोकसभा की सीट पर लोकसभा चुनाव वीआइपी ने लड़ा था जिस कारण विधानसभा उपचुनाव में उनकी प्रबल दावेदारी थी। इसको लेकर गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व से बात भी हो चुकी थी। परंतु राजद ने यहां से प्रत्याशी दे दिया। वीआइपी के सभा में हम के जिलाध्यक्ष रामरतन ऋषिदेव की मौजूदगी से यह स्पष्ट हो गया कि हम वीआइपी के साथ है। जबकि रालोसपा नेता शिवेन्द्र सिंह जीशू कहते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर रालोसपा सिमरीबख्तियारपुर उपचुनाव में वीआइपी के प्रत्याशी को मदद करेगी। यानि यह तो साफ हो गया कि महागठबंधन में शामिल कांग्रेस को छोड़कर लगभग सभी दल ने अपनी राय दे दी है। वैसे राजद प्रत्याशी के समर्थन में लोजद नेता रितेश रंजन मैदान में कूद गये हैं। महागठबंधन से टिकट की चाह इन्हें भी थी लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो राजद प्रत्याशी के साथ हो गये। सबसे अहम बात है कि एनडीए यहां पूरी तरह से एकजुट दिख रही है। एनडीए प्रत्याशी के नामांकन में भाजपा और लोजपा नेताओं की उपस्थिति देखी गई थी। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो विधानसभा का फाइनल चुनाव 2020 में होना है। लेकिन सेमीफाइनल में ही महागठबंधन के बिखराव का लाभ एनडीए को मिल सकता है। अब देखना है कि नामांकन व नाम वापसी तक यह बिखराव बना रहता है या महागठबंधन एकजुट होती है।

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