पोषण पुनर्वास केंद्र में पोषित होंगे कुपोषित बच्चे, बच्चों को मिलेगा नया जीवन

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सहरसा, 11 सितंबर : कुपोषण को मात देने के लिए सामुदायिक स्तर पर बड़ा प्रयास किया जा रहा है। पोषण को लेकर लोगों को जागरुक कर कुपोषण को मात देने का प्रयास किया जा रहा है। कुपोषण की मात झेल रहे बच्चों को जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में नया जीवन मिल रहा है। पोषणयुक्त आहार देकर डाक्टरों की टीम उनका इलाज करती है। यहां पर माता के साथ ही 6 माह से 5 वर्ष तक के उम्र के बीमार कुपोषित बच्चों की भर्ती कर उपचार किया जाता है। 20 बेड के पोषण पुनर्वास केन्द्र बच्चों के लिए आक्सीजन से कम नहीं है। बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने का प्रयास काफी सार्थक है।

मानसिक और शारीरिक विकास में वृद्धि

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जिला प्लानिंग कोऑर्डिनेटर प्रणव कुमार का कहना है कि ऐसे बच्चे जो कुपोषण के साथ गंभीर बीमारियों की भी गिरफ्त में आ जाते हैं उनको भर्ती कर इलाज केंद्र में ही किया जाता है। ऐसे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है। उनका आइक्यू लेवल बढ़ाने के लिए केंद्र में 7 से 21 दिनों तक भर्ती कर निगरानी की भी की जाती है। यहां पर बच्चों के साथ मां को भी रखा जाता है। केंद्र में अभी तक 1441 बच्चों का भर्ती कर इलाज किया गया है, जो अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। जिला प्लानिंग कोऑर्डिनेटर प्रणव कुमार का कहना है कि यहां पर बच्चों को मां के साथ रखने से काम आसान होता है। इससे बच्चे की वे भी निगरानी करती हैं। इसके साथ ही मां को पोषण डाइट के बारे में भी जानकारी दी जाती है। भर्ती करने और अन्य सुविधा को लेकर लोगों को जागरुक किया जाता है।

कुपोषण को लेकर मेगा अभियान

जिला प्लानिंग कोऑर्डिनेटर प्रणव कुमार का कहना है कि जिले में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के लिए कई कार्यक्रमों का संचालन स्वास्थ विभाग और अन्य स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से किया जा रहा है। इसके तहत सामुदायिक प्रबंधन से लेकर आरोग्य दिवस आदि का भी आयोजन किया जाता है। इसमें पोषक आहार आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। ऐसे बच्चे जो अति कुपोषित हों और बीमार भी हों जिनका उचित पोषण नहीं मिलने के कारण शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाया हो उन्हें यहां नया जीवन मिल जाता है। कुपोषण के कारण शारीरिक विसंगति है और चलने तक में परेशानी होती है, इसमें भी सुधार हो जाता है। ऐसे बच्चों को सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में कुछ दिन भर्ती कर उपचार किया जाता है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक और डायटिशियन केंद्र में मौजूद रहते हैं। एएनएम सोनी देवी, डायटिशियन कुमारी रेशमा तथा रूपम कुमारी का कहना है कि जागरुकता लाने के साथ ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान रखा जाता है।

युगेश्वर कुमार
कोशी की आस@सहरसा

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