सहरसा:पुलिस के अनुचित कार्यवाही पर सवाल खड़ा करना छात्र को पड़ा महंगा, घंटों बैठाया थाने में

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सहरसा – लॉकडाउन के दूसरे चरण के निर्धारित मापदंडों के पालन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त दिखती तो है। लेकिन इस दौरान पुलिस प्रशासन के कारवाई पर सवाल भी उठने लगें है। ऐसा ही एक मामला बसनही थाना क्षेत्र के महुआ बाजार का सामने आया है। सोमवार को बसनही थानाध्यक्ष श्वेत कमल के नेतृत्व में लॉकडाउन के निर्देशों के पालन को लेकर बिना मास्क पहने लोगों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान पुलिस द्वारा महुआ बाजार निवासी सब्जी विक्रेता के कलकत्ता से बी०कॉम की पढाई कर रहे पुत्र दिलखुश कुमार को मास्क नहीं पहना देख ₹50 का जुर्माना काटा गया। लेकिन मामले ने तब तुल पकड़ लिया जब छात्र ने बाजार घूम रहे बिना मास्क के अन्य लोगों को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। तथा जुर्माने की राशि अदा करने पर भी सिर्फ पुलिस द्वारा एक ही मास्क उपलब्ध कराए जाने पर भी अड़ गया। जिसके बाद छात्र व पुलिस के बीच ठन गई यह बात छात्र के लिए भारी पड़ गया।

बसनही थानाध्यक्ष उक्त छात्र को पकड़ थाने ले गई। पीड़ित छात्र ने घटना के सम्बंध में बताया कि वो अपने पिता के सब्जी दुकान पर मदद के लिए खड़ा था तभी बसनही पुलिस की गाड़ी आयी और मेरे हाथ में चालान देते हुए ₹50 देने को कहा। छात्र ने कहा कि मास्क नहीं पहने पर मुझे ₹50 रूपये का चालान काट दिया गया, बाकयदा मैंने रूपये भी दे दिए बावजूद दो मास्क की जगह एक ही दिए जाने पर सवाल करते हुए मैंने बाजार में बिना मास्क के घूम रहे और अन्य लोगों को भी चालान करने तथा एक मास्क दिए जाने पर सवाल उठाया। जिस कारण पुलिस ने मुझे कानून सिखाने की बात कहकर थाने ले आयी। पीड़ित युवक ने बातचीत में बताया कि पुलिस द्वारा दिए हुए मास्क को नहीं पहना और पास में रखे पहले से खुद का मास्क पहन लिया जिस कारण से बसनही पुलिस ने मेरे साथ इस तरह का वर्ताव किया और मुझे पुलिस जीप में बैठाकर थाने ले गई और और घण्टों थाने में बैठा मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है।

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उक्त बाबत सोनवर्षाराज के सीओ उपेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि जुर्माना अदा करने के बावजूद अगर बसनही थाना पुलिस ने एक ही मास्क दिया तो ये अनुचित है। इस सम्बन्ध में घटना के करीब 4 घण्टे बाद बसनही थाना प्रभारी से उनका पक्ष जानना चाहा तो बसनही थानाध्यक्ष श्वेत कमल ने कहा कि लड़के ने मास्क सड़क पर फेंककर बत्तमतिजी दिखाया था इसलिए उसे थोड़ी देर के लिए थाने में बैठाया गया था, जिसे समझाकर छोड़ा दिया गया।

रितेश हन्नी
कोशी की आस@सहरसा

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