सहरसा: रैपिड एंटीजन किट से जांच के लिए कर्मियों को मिला प्रशिक्षण

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सहरसा: राज्य में कोविड-19 के संक्रमण के प्रभाव को कम करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। जांच की संख्या भी अब पहले की तुलना में वृहद स्तर पर हो रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित कोविड-19 रैपिड एंटीजन टेस्ट पर कर्मियों के लिए दो घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले में एंटीजन टेस्ट के लिए प्रतिनियुक्त सभी नोडल अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों में एंटीजन टेस्ट के लिए कार्यरत नोडल अधिकारी और संबंधित लैब टेक्नीशियनों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम एसडी बायोसेंसर द्वारा होस्ट किया गया।

नये-नये उपकरणों की भी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है:

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डीपीएम विनय रंजन ने बताया कि कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की बेहतर सुविधा के लिए लगातार कवायद जारी है। स्वास्थ्य विभाग के दिशानिर्देशों में चिकित्सक कार्य कर रहे हैं। नमूनों की जांच की संख्या बढ़ाई जा रही है। नये-नये उपकरणों की भी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सहरसा जिले में अब रैपिड एंटीजन कीट से भी कोरोना संक्रमण की जांच की जा रही है। जिले में रैपिड एंटीजन कीट उपलब्ध करायी गयी है। जहां भी मरीज मिलेंगे, उस क्षेत्र में इस किट का इस्तेमाल कर वायरस के संक्रमण विस्तार को रोका जा सकता है।

रैपिड एंटीजन किट हो रहा कारगर साबित:

डीपीएम विनय रंजन ने बताया कि किसी भी जांच के लिए प्रशिक्षण नये तरीके और सुविधा के विस्तार के लिए जरूरी होता है। कोविड-19 की जांच के लिए रैपिड एंटीजन कीट सबसे ज्यादा कारगर साबित हो रहा है। टेस्ट की रिपोर्ट भी जल्द मिल जा रही है। इस टेस्ट के लिए नाक में एक पतली से नली से सैंपल ली जाती है। नाक से लिए गए उस लिक्विड को टेस्ट किट में डाला जाता है। सैंपल डालने के बाद अगर 2 रेड लाइन आती है तो इसका मतलब है कि व्यक्ति संक्रमित है और अगर सिर्फ एक लाइन आती है तो मतलब व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव है।

एंटीजेन टेस्ट और आरटी-पीसीआर महत्वपूर्ण:-
विनय रंजन

देश में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जा रहे हैं। इसमें आरटी-पीसीआर और एंटीजेन टेस्ट सबसे महत्वपूर्ण है। चिकित्सकों के अनुसार नाक और गले के पिछले हिस्से में दो ऐसी जगहें हैं जहां वायरस के मौजूद होने की संभावना ज्यादा होती है। जांच ​के लिए स्वैब के जरिए इन्हीं कोशिकाओं को उठाया जाता है। स्वैब को ऐसे सॉल्यूशन में डाला जाता है जिनसे कोशिकाएं रिलीज होती हैं। स्वैब टेस्ट का इस्तेमाल सैंपल में मिले जेनेटिक मैटेरियल को कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड से मिलाने में किया जाता है।

मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया है निर्देश:

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लोगों की जांच की संख्या बढ़ाने के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की गति तेज कर दी है। जिले में भी कोरोना के उपचाराधीन मरीजों की जांच रैपिड एंटीजन किट से शुरू कर दी गई है। रैपिड एंटीजन किट से आधे घंटे में जांच की रिपोर्ट मिल जाती है। रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही इलाज की प्रक्रिया आरंभ करने में सुविधा होती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के 50 प्रतिशत बेड को संक्रमितों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड के रूप में चिह्नित कराया गया है। मरीजों को आसानी से संबंधित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भर्ती कर इलाज करने की दिशा में व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

योगेश्वर कुमार
कोशी की आस@सहरसा

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