सहरसा : चापाकल से निकलता है बीमार करने वाला लाल पानी

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◆ राजेश कुमार सहरसा- सवांददाता◆

 

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सरकार के द्वारा चलाए जा रहे “सात निश्चय योजना” में हर घर नल का जल योजना सतह पर असफल दिख रहा है। प्रखंड क्षेत्र के मुरादपुर व खरका तेलवा पंचायत में लोग आयरन युक्त पानी पीने को विवश बने हुए हैं। गरीब तबके के लोग जो मेहनत मजदूरी कर अपने जीवन का गुजर-बसर करते हैं, वह पानी कैसे प्रतिदिन खरीद कर पिएंगे, यह बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। खरका तेलवा पंचायत में पिछले पंचवर्षीय योजना 2013-18 में पंचायत समिति के फंड से पीएचडी द्वारा नल लगाया गया था, जिस नल के सहारे लोगों को आयरन मुक्त पानी मिल पाता है। हालांकि खरका तेलवा पंचायत में दर्जनों जगह नल लगाया गया, लेकिन कुछ लोग निजी उपयोग के कारण तो कुछ विभागीय अधिकारी के उदासीनता और देख-रेख नहीं होने के कारण खराब हो गया और पानी पहुंचना ही बंद हो गया। खरका तेलवा पंचायत के दिवरा में वर्ष 2013 में ही पीएचडी द्वारा नल लगाया गया, जहाँ खरका तेलवा पंचायत के आलवे मुरादपुर पंचायत के लोग भी नल पर पानी भर कर ले जाते हैं और शुद्ध जल पीते हैं। दिवरा निवासी अजय कुमार चौधरी ने बताया कि मेरे घर के समीप जो नल लगा हुआ है, इस नल से ब्राह्मण टोली, ओरिया, दिबरा, मुरादपुर सहित आसपास के दो तीन मुहल्ला के लोग दिनभर (सुबह 6 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक) पानी लेने के लिए आया करते हैं। पानी के लिए आई महिलाओं ने बताया कि अपने चापाकल की पानी से कपड़ा भी नही धो पाते हैं, सिर्फ मवेशी को पिलाते हैं। अगर कभी-कभार परिवार के लोग और बच्चें चापाकल का पानी पी लेते हैं तो तुरन्त बीमार पड़ जाते हैं। अतः बीमारी से बचने के लिए और आयरन युक्त पानी न पीना पड़े, इसलिए तीन किमी दूर से रोजेदार महिलायेँ पानी ले जाते हैं।जब से रोजा शुरू हुआ है, तब से तो इस नल से पानी ले जाने वालों की आवश्यकता और बढ़ गई हैं।

सरकार के द्वारा चलाए जा रहे सात निश्चय योजना से प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायत में बिजली तो हर घर पहुँच गया लेकिन नल का जल लोगों को मिलना नसीब नहीं हो पा रहा है और जल योजना विफल साबित हो रहा है।

फोटो- दिबरा में पुराना नल पर पानी भरती रोजेदार महिलायेँ।

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