सहरसा: “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून”

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राजेश कुमार सहरसा…

 

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“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून” की मशहूर पंक्ति बढ़ते गर्मी व दहकते अंगारों के बीच एक बार फिर चरितार्थ हो रही है, चारों तरफ पानी का हाहाकार मचा हुआ है। पोखर, तालाब, कुआँ तथा चापाकल सभी सुख रहे है। ऐसे में लोगों के लिए पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लिया है। रेलवे स्टेशन सहरसा जंक्शन पर रेलयात्रियो को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती हैं। जंक्शन पर पाँच प्लेटफॉर्म है लेकिन सभी प्लेटफॉर्म पर पानी की समस्या बनी हुई है। प्लेटफार्म नम्बर एक और दो पर कहने को एक-एक चापाकल है तथा कुछ जगहों पर पानी का नल भी है, लेकिन यात्रियों की संख्या अनुसार नल काफी कम है। ट्रेन जब प्लेटफॉर्म पर आती है तो नल पर लोगों की भीड़ लग जाती है। वहीं जंक्शन पर बोतलबंद पानी का व्यापार लाखो में होता है।

हालांकि रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए सस्ते दरो पर रेल नीर का प्रावधान किया गया है लेकिन रेल अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता के पुरे जंक्शन पर रेलनीर के बदले अन्य लोकल ब्रांड का पानी बेचा जा रहा है, जिसके कारण रेल राजस्व में भी काफी घाटा हो रहा है। भेन्डिग ठीकेदार से पूछे जाने पर बताया गया कि रेल नीर की अनुपलब्धता के कारण रेलवे बोर्ड द्वारा अनुशंसित पानी बेचा जा रहा है। रेलयात्रियो ने बताया कि सहरसा जंक्शन पर प्रतिदिन हजारों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं लेकिन रेलवे द्वारा कही भी शीतल पेयजल की व्यवस्था नहीं है। रेलयात्रियो ने रेल प्रशासन से यात्रियों के हित में शीतल पेय जल की व्यवस्था करने की मांग की है ।

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