सरकार आवास कर्मियों को जीवन रक्षक सामग्री उपलब्ध करायें-दिलीप कुमार सर्राफ

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अनिश चौरसिया
कोशी की आस@खगड़िया

वैश्विक महामारी कोरोना और इससे बचने के लिए लागू लॉकडाउन की स्थिति में ग्रामीण आवास कर्मियों को विभिन्न जीवन रक्षक सुविधा उपलब्ध कराने, कार्यस्थल पर उपस्थित होने से छुट देने, नियोक्ता व कर्मी दोनों की तीन महीने का ईपीएफ जमा कराने, 50 लाख का जीवन बीमा कराने एवं लंबित मानदेय का भुगतान कराने इत्यादि मांगों को लेकर राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार सर्राफ ने पत्र के जरिये विभागीय प्रधान सचिव व मुख्यमंत्री से मांग की है। साथ ही पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, बिहार एवं सभी जिला पदाधिकारी को भी दी गई।

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प्रदेश अध्यक्ष के हवाले से संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह खगड़िया जिला अध्यक्ष आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने बताया कि हमारे संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार सर्राफ के द्वारा पूरे बिहार के आवास कर्मियों के हितार्थ लगातार प्रयास किया जा रहा है। श्री सर्राफ के द्वारा विभाग व सरकार को दिये गये पत्रों का जिक्र करते हुए आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के अधीन बिहार रुरल डेवलपमेंट सोसाईटी के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्तर्गत संविदा पर नियोजित एवं कार्यरत ग्रामीण आवास कर्मियोंं यथा ग्रामीण आवास सहायक, ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक व ग्रामीण आवास लेखा सहायक को नोवेल कोविड-19 कोरोना वायरस जैसे जानलेवा संक्रमण के प्रभाव को रोकने हेतु सरकार के द्वारा सम्पूर्ण भारत में लॉकडाउन लागू किये जाने के कारण कार्यस्थल पर आने-जाने एवं कार्य करने में काफी असुविधा हो रही है। क्योंकि लॉकडाउन के कारण बस-टे्न व अन्य आवागमन के साधन पर पूर्ण प्रतिबंध है ।

सर्व विदित है कि विश्व में फैले कोरोना वायरस के कहर से बचने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 14 अप्रैल 2020 तक संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है। आवागमन का सरकारी साधन एवं आवश्यक जीवन रक्षक कीट जैसे- मास्क, ग्लोब्स, सेनेटाईजर, पर्सनल प्रोटेक्सन इक्युपमेंट आदि सरकार या विभाग द्वारा इन्हें उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण इस महामारी व लॉकडाउन के समय में वे कार्यस्थल पर उपस्थित होंने या कार्य करने में असमर्थ हैं। इनका संपर्क वैसे लोगों से हो रहा है या होगा, जो देश के विभिन्न राज्यों से लौटे है या लौट रहे है। उपरोक्त आवश्यक जीवन रक्षक किट के बिना कार्यस्थल पर उपस्थित होने या कार्य करने से इन्हें कोरोना होने एवं कोरोना का वाहक बनने का खतरा है। इससे इनके परिवार, समाज व देश के लिए भी खतरनाक स्थिती उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने आगे बताया कि आवास कर्मियों की आर्थिक स्थिति भी दयनीय हैं। क्योंकि विगत 6 माह से इनके मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। ऐसी विकट पारिस्थिति में इनलोगों का परिवार भुखमरी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। किसी तरह कहीं से कर्ज लेकर परिवार का भरण-पोषण संभव हो पा रहा है । समाज व देश में फैले कोरोना का कहर के बीच वरीय पदाधिकारी के आदेश पर वे कार्यस्थल पर उपस्थित हो सकते हैं, लेकिन इसका सरकारी व विभागीय स्तर से कोई इंतजाम नही है। आज तक कभी भी इन्होंने किसी आदेश की अवहेलना नहीं की हैं और भविष्य में भी नहीं करेंगे। वरीय पदाधिकारियों का आदेश हो तो वे कार्यस्थल पर उपस्थित होकर अपना व अपने परिवार का ज़िन्दगी कुर्बान करने को तैयार हैं। परन्तु, इस महामारी के कारण पुरे देश में लागु लॉकडाउन में पुलिस-प्रशासन किसी को कही आने-जाने नहीं दे रही है। इन्हें कार्यस्थल पर उपस्थित होंने व कार्य करने के लिए क्रमशः आवागमन हेतु सरकारी वाहन एवं जीवन रक्षक किट जैसे- मास्क, ग्लोब्स, सेनेटाईजर, पर्सनल प्रोटेक्सन इक्युपमेंट आदि मुहैया कराये जाने की आवश्यकता है।

साथ ही केंद्रिय वित्त मंत्री द्वारा घोषित स्वास्थ कर्मियों व सफाई कर्मियों को देय 50 लाख का जीवन बीमा की घोषणा इनके लिए भी की जाए। इनके 6 माह का लंबित मानदेय का भुगतान कराया जाए। राज्य सरकार द्वारा इन्हें कोरोना कमांडो घोषित की जाए। उपरोक्त सभी जीवन रक्षक सामग्रियों के साथ कार्य करने पर भी भविष्य में वे कोरोना का शिकार होते हैं तो इसकी सारी जवाबदेही वरीय पदाधिकारी, जिला प्रशासन, विभाग व सरकार की होगी । ज्ञात हो कि श्रम मंत्रालय भारत सरकार ने भी एडवाजरी जारी क़ि है किसी भी कर्मी का जो कार्यालय नहीं आ पाते हैं, उनका वेतन नहीं काटा जाए या उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाए। इसिलिए राज्य सरकार द्वारा सभी ग्रामीण आवास कर्मियों को भी एक दिन के अंतराल पर कार्य हेतु उपस्थित होंने की छुट दी जाए। उसमें भी जिनको बस-टे्न से आना-जाना पड़ता हो उन्हें कार्य से अलग रखा जाए। जिन ग्रामीण आवास कर्मियों का वेतन 21,000 रुपये से कम है, उसके ईपीएफ खाते में सरकार द्वारा अगले तीन महीने तक कर्मी और सरकार दोनों की ओर से पैसे डाले जाए। सरकार दोनों के तरफ से 12-12 फीसदी का योगदान करें । इन सबसे राज्य के लगभग 10 हजार ग्रामीण आवास कर्मियों को लाभ मिलेगा र्क्योंकि सुरक्षा देना व जीवन बचाना इस देश की तमाम सरकारों का पहला कर्तव्य है।

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