अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में युवा कवि नरेश कुमार निराला को मिला योग साधक सम्मान

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सुपौल : वजन में कमी, एक मजबूत एवं लचीला शरीर, सुन्दर चमकती त्वचा, शांतिपूर्ण मन, अच्छा स्वास्थ्य-जो आप चाहते हैं, योग आपको देता है। योग को केवल कुछ आसनों द्वारा आंशिक रूप से समझा जाता हैं परंतु इसके लाभ का आकलन केवल शरीर स्तर पर समझा जाता है। हम ये जानने में असफल रहते हैं कि योग हमें शारीरिक, मानसिक रूप से तथा श्वसन में लाभ देता हैं। जब आप सुन्दर विचारो के संग होते हैं तो जीवन यात्रा शांति, ख़ुशी और अधिक ऊर्जा से भरी होती हैं। उक्त बातें शिक्षक सह युवा कवि नरेश कुमार निराला ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में कही।

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मालूम हो कि अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय लोक साहित्य मंच, उत्तराखंड के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वर्चुअल रूप से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि राज्यों से विद्धान कवि व कवियित्रियों ने इस काव्य सम्मेलन में अपनी रचना से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरूआत होशंगाबाद के मशहूर कवियित्रि रेखा कापसे ने सरस्वती वंदना से की जबकि अध्यक्षता ललित डोभाल अल्पज्ञ ने किया। संस्थापक आशुकवि नरेश मेहता, नीरज उत्तराखंडी,मदन मोहन जोशी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन नवोदित कवि कुमार शुभम ने किया। शिक्षक सह युवा कवि नरेश कुमार निराला ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी काव्य प्रस्तुति से लोगों को योग के बारे में अपनी रचना से संवाद स्थापित कर जागरूक किये।

श्री निराला ने कहा कि योग हमारे देश की प्राचीन पद्धति है जिसके द्वारा शरीर, मन और आत्मा तीनों पर एक साथ काम कर सकते हैं। नियमित योग करने से शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं तथा इसका मानसिक रूप से भी लाभ होता है।उन्होंने कहा का मन मस्तिष्क पर योग का बहुत ही अच्छा प्रभाव होता है जिससे मन हमेशा प्रसन्न रहने लगता।उन्होंने कहा कि योग की शुरुआत भारत ने की थी लेकिन अब पूरी दुनिया के लोग इसे अपना रहे हैं जो देश के लिए गौरव की बात है।

मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून, 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का निर्णय लिया। श्री निराला ने कहा कि योग, ध्यान, आसन, प्राणायाम और व्यायाम सभी के लिए जरूरी है।इस अवसर पर बेहतर काव्य पाठ करने के लिए अखिल भारतीय लोक साहित्य मंच के द्वारा युवा कवि श्री निराला को ‘योग साधक सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

मौके पर कवि वैशाली से प्रीतम कुमार झा, किशनगंज के मशहूर कवियित्रि व गजल लेखिका अनुपमा अधिकारी, पूर्णिया से रीना कुमारी, ब्रह्मकुमारी मधुमिता, दरभंगा से रितु प्रज्ञा,उज्जैन से सत्यनारायण उपाध्याय बना,गढ़वाल से डाॅ राजेश कुमार जैन, बड़कोट उत्तरकाशी से ललित डोभाल अल्पज्ञ, उत्तराखंड से आदेश सिंह राणा अल्फाज, अरविन्द अवि सहित दर्जनों कवियों ने अपनी बेहतर काव्य पाठ से योग दिवस को यादगार बनाये।इस मौके पर मंच के द्वारा सभी कलमकारों को योग साधक सम्मान से सम्मानित किया गया।

श्री निराला को योग साधक सम्मान मिलने पर साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उन्हें बधाईयाँ दी।बधाई देने वालों में युवा साहित्यकार डॉ.रणधीर कुमार राणा, डाॅ राजेश कुमार,कवियित्रि अभिलाषा कुमारी, सोनी कुमारी, नीलू कुमारी,लक्ष्मी कुमारी, प्रतिभा परासर, कुमारी उमारवती, मिथिलेश पाठक, राजेश कुमार, सतीश कुमार मंडल, शंभु महासेठ, संजय कुमार, सोनू कुमार भगत आदि के नाम शामिल है।

सोनू कुमार भगत
कोशी की आस@सुपौल।

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