लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बिहार की विपक्षी पार्टियों को मानो लकवा मार गया है : जाप

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सोनू आलम: सुपौल

 

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लोकसभा चुनाव परिणाम जब से आया है तब से बिहार की विपक्षी पार्टियों को मानो लकवा मार गया है, यह बातें छात्र नेता (जन अधिकार छात्र परिषद बिहार) सह समाजसेवी मिथुन यादव ने कही। इस बार विपक्ष का संकट सिर्फ चुनावी हार का बुखार नहीं है, जो कुछ महीनों में अपने-आप उतर जाएगा। यह अस्तित्व का संकट है।

श्री मिथुन ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बिहार में कोई विपक्ष भी है, का पता नहीं चलता यदि मधेपुरा के पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के जन अधिकार पार्टी (लो०) को छोड़ दिया जाय। आए दिन बिहार में लूट, हत्या, मर्डर, रेप, सुखार आदि से आम-जनमानस परेशान है, लेकिन राज्य सरकार चुनाव परिणाम के बाद संगठन मजबूती, मंत्रिमंडल विस्तार और समीक्षा बैठक करने में लगे हुए हैं और विपक्ष मौन व्रत रखी हुई है। राज्य और केंद्र सरकार की लापरवाही से मुज्जफरपुर में 100 से अधिक गरीब परिवार के बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने आगे सवाल किया कि आखिरकार चुनाव परिणाम के बाद जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर विपक्ष क्यों चुप्पी साध रखा है?

अगर सरकार जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरती तो उसकी आलोचना और विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार और जिम्मेदारी है। जरूरी है जनता की आस्था-में-आस्था बनाई रखी जाय। देश पर आसन्न खतरे के प्रति आगाह करना, सच का आइना दिखाना और विनम्रता से अपनी बात सुनाना विपक्षी दलों का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर खतरे की आशंका अगर सही साबित होती है तो सिर्फ जुबानी विरोध नहीं बल्कि जमीन पर प्रतिरोध करना भी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। सहयोग और प्रतिरोध की इस दोहरी जिम्मेदारी को निभाना आज लोकतांत्रिक शक्तियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

 

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