बिना सुरक्षा, क्वारंटाईन सेंटरों पर काम करने पर मजबूर शिक्षक, आफ़त को आमंत्रण

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सुपौल जिले के छातापुर प्रखण्ड के विभिन्न क्वारंटाईन
सेंटरों पर आनन फानन में शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति का आदेश तो दे दिया गया है लेकिन, न तो इनको क्वारंटाईन
सेंटर के प्रबंधन के संदर्भ में कोई प्रशिक्षण ही दिया गया है और न ही सुरक्षात्मक उपकरण जैसे पीपीई किट, मास्क, ग्लबज, सैनेटाईजर आदि उपलब्ध कराये गये हैं।

इससे शिक्षकों में आक्रोश के साथ-साथ डर गहराता जा रहा है। बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ (मूल) के जिला प्रवक्ता सह सोशल मीडिया प्रभारी नरेश कुमार निराला ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर ड्युटी में लगाये गये शिक्षकों को सुरक्षा किट मुहैया कराने की मांग की है।श्री निराला ने कहा कि प्रखण्ड क्षेत्रों में कोरोना प्रबंधन हेतु दर्जनों क्वारंटाईन सेंटर बनाये गये हैं। इन सेंटरों में देश के विभिन्न इलाकों से आये प्रवासी मजदूरों को रखा गया है, जिनकी संख्या सैकड़ों में है।

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उन्होंने बताया कि प्रशासन ने इन क्वारंटाईन सेंटरों की व्यवस्था के लिए आनन फानन में शिक्षकों का ड्यूटी तो लगा दिया है। किन्तु न तो इनको सेंटर के प्रबंधन के संदर्भ में कोई प्रशिक्षण ही दिया गया है और न ही सुरक्षात्मक उपकरण जैसे पीपीई किट, मास्क, ग्लबज, सैनेटाईजर आदि उपलब्ध कराये गये हैं। उक्त सामग्री के अभाव में इन शिक्षकों में कोरोना संक्रमण का खतरा का भू बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई गंभीर स्थिति निर्मित होती है तो इन शिक्षकों के भविष्य और बीमा को लेकर भी किसी भी प्रकार की कोई गारंटी प्रशासन ने नहीं ली है। श्री निराला ने जिलाधिकारी से मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को 8-8 घंटों की ड्यूटी पर तैनात कर दिया है। जिसे 6-6 घंटों की ड्यूटी लगाये जाने की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर ड्यूटी में तैनात किये जा रहे नियोजित शिक्षकों को हर हाल में 50 लाख का बीमा कवर करने की भी मांग की है।

एन के सुशील
कोशी की आस @सुपौल

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