सुपौल : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अनुपलाल यादव महाविद्यालय सभागार में स्कूली बच्चों ने किया नाट्य कला का प्रदर्शन।

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सोनू कुमार भगत/एन के सुशील
कोशी की आस@सुपौल

जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय मुख्यालय स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर स्कूली बच्चों ने किया नाट्य कला प्रदर्शन किया। दिनांक 8 मार्च 2020 को राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई अनूपलाल यादव, महाविद्यालय त्रिवेणीगंज सुपौल बिहार के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 जयदेव प्रसाद यादव,की अध्यक्षता में एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रोफेसर विद्यानंद यादव द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत एनएसएस के स्वयं सेवक सोनाली कुमारी सिंह, कुमारी अनुजा भारती, मेघा राई ,वर्षा कुमारी ,पूनम कुमारी, प्रीति दर्शन ,अनिकेत कुमार ,अमित कुमार, आलोक आनंद द्वारा बाल विवाह और दहेज प्रथा पर एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉक्टर जयदेव प्रसाद यादव ने बताया कि राष्ट्र के विकास में महिलाओं की अहम भूमिका है। महिलाओं में अधिकार का ज्ञान बिना महिलाओं का हर एक क्षेत्र में विकास संभव नहीं है।
आज हर क्षेत्र में हमारी बेटियां परचम लहरा रही है, जबकि बेटे ही पीछे पड़ रहे हैं।

फिर भी बाल-विवाह, दहेज-प्रथा जैसे दानव की हमारी बेटियां शिकार हो रही है। खासकर देहाती क्षेत्रों में महिलाओं को अधिकार एवं कर्तव्य का बोध कराना आवश्यक है। प्रोफेसर कमलाकांत यादव ने बताया कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता” अर्थात जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहीं देवता वास करते हैं। नारी जननी है, जिसके बिना समाज अधूरा है फिर भी नारिया सुरक्षित नहीं है।

कार्यक्रम पदाधिकारी प्रोफेसर विद्यानंद यादव ने बताया कि सदियों से समाज ने नारियों को उपयोग का वस्तु समझकर उनका दोहन किया है। यहां तक कि महाभारत के समय में भी महाराज युधिष्ठिर नारी को वस्तु समझकर जुआ में दाव पर लगा लगा दिये थे। हर एक व्यक्ति को समझने की आवश्यकता है कि नर नारी एक समान है। माता ही संपूर्ण सृष्टि की जननी मानी गई है।

इसलिए महिलाओं की महत्ता को समझकर उनका आदर करना और हर क्षेत्र में उनके साथ मिलकर चलना हमारा कर्तव्य है 8 मार्च 1975 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपूर्ण विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। ताकि संपूर्ण विश्व में महिलाओं का उत्थान हो सके सर्वप्रथम 1911 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने महिला दिवस मनाया था। जिस आधार पर वर्तमान में हम लोग 109 वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में एनएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत बाल विवाह और दहेज प्रथा से संबंधित नुक्कड़ नाटक समाज सुधार में सहायक है। कार्यक्रम में शिक्षक डॉ सुरेश कुमार, प्रोफेसर कमला कांत यादव, प्रोफेसर रामचंद्र यादव तथा अन्य एवं शिक्षकेतर कर्मचारी गण गगन, राजू एवं मुकेश कुमार तथा अन्य एवं एनएसएस के स्वयं सेवक नवदीप कौर, प्रिया गौर, पूजा कुमारी ख्याति सुमन मधुर कुमारी, रश्मि कुमारी, आशा कुमारी, निधि कुमारी, पूजा कुमारी, संगीता कुमारी ,निधि कुमारी, कल्पना कुमारी, निकिता आनंद, सिंधु कुमारी , रुचि कुमारी, सोनी कुमारी, गायत्री कुमारी, विकास कुमार, अभिषेक आनंद ,नंदन कुमार, रोशन कुमार ,अनुपम कुमार ,कौशल कुमार लक्ष्मी कुमारी ,सुगंधा कुमारी, अमिता कुमारी ,नेहा कुमारी ,खुशबू कुमारी, तान्या कुमारी ,मुस्कान कोर जानू प्रवीण ,शिखा कुमारी ,पूनम कुमारी, रितु कुमारी आदि उपस्थित थे।

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