सुपौल : चिलौनी नदी में पुल नहीं रहने से स्कूली बच्चे और आम-जनमानस परेशान।

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सोनू आलम बलराम कुमार

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कोसी की आस@त्रिवेणीगंज,सुपौल

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय मुख्यालय स्थित चिलौनी नदी को ग्रामीण बांस की बनी चचरी पुल के सहारे नदी पार करने पर मजबूर हैं। कई वर्ष पूर्व नदी का पुल ध्वस्त हो जाने के बाद दो बार डायवर्सन बनाया गया। लेकिन प्रत्येक वर्ष बारिश में के समय टूट जाती है। मयूरवा वार्ड नं0 1 के ग्रामीण किसान, कपलेश्वर यादव ने बताया कि यहां कई वर्ष पूर्व में ही नदी का पुल ध्वस्त हो चुका है, लेकिन प्रतिनिधिगण एवं प्रशासन सो रही है। स्कूली बच्चे एवं हमसभी परेशान हैं।

वहीं यह भी बताया गया कि दो बार डायवर्सन बनाने में 52 लाख रुपये खर्च हो चुका है लेकिन सफल नहीं हो सका है। इतने में पुल बन सकती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे कमाने का जड़िया खत्म हो जाता न। अभी बांस की बनी चचरी के सहारे नदी पार करने पर मजबूर हैं। जहाँ कभी भी दुर्घटना हो सकती है। कई बार तो दुर्घटना भी हो चुकी है, जबकी यह नदी एक दूसरे जिले को जोड़ती है। प्रतिदिन हजारों लोगों का आना जाना लगा रहता है। साथ ही गरीब, किसान, मजदूरों को बाजार के लिए प्रतिदिन जाना पड़ता है। रोजी-रोटी कमाने के लिए या खेती के लिए खाद, बीज या घर का सामान हो जाना ही पड़ता है।

वहीं स्कूली छात्राओं ने बताया कि सैकड़ों स्कूली बच्चों को पठन-पाठन के लिए बांस की बनी चचरी का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि कभी भी मौत को दावत दे सकती है। हमलोगों का भविष्य जुड़ा हुआ है। हमलोग डरे, सहमे, चचरी, पार करने को मजबूर हैं।

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