सुपौल : महज़ चचरी पर सिमटती विकास की गाथा

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एन के शुशील

विकास के इस दौड़ में जब गाँव, गली, मोहल्ले में अब सड़कों का जाल बिछ गया है। छोटी-बड़ी नदियों पर समुचित पूल बनाये गए हैं। वहीँ जिले के झखारगढ़ और लालगंज बस्ती के लोगों के आवाजाही का सहारा आज भी चचरी पुल ही बन कर रह गया है। छातापुर प्रखंड कार्यालय से महज आठ और सात किलोमीटर दूर अवस्थित झखारगढ़ और लालगंज गांव है। जहाँ सुरसर नदी के कारण आबादी दो भागों में विभक्त है। मालूम हो कि नदी के उस पार करीब दस हजार की आबादी है। लेकिन पुल नहीं रहने के कारण लिहाजा लोग सालों भर चचरी के सहारे ही नदी पार करने को विवश हैं। आए दिन लोगों को यातायात में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि चचरी होने के कारण बीमार लोगों को काफी परेशानी होती है। मरीजों को बड़ी मुश्किल से चचरी पार करवाया जाता है। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं को हॉस्पिटल ले जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि इस चचरी के सहारे हजारों लोग प्रत्येक दिन आवाजाही करते हैं।

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हालाँकि नदी पर पुल बना हुआ है लेकिन इन आबादी से वो करीब पांच किलोमीटर दूर है लिहाजा लोग दुरी से बचने के लिए चचरी का सहारा लेते हैं, ख़ास कर गाँव वालों को बारिश के महीने में ज्यादा कठिनाइयां झेलनी पड़ती है, जब सुरसर की लबालब धारा में नाव के सहारे लोगों को पार करना पड़ता है, बाबजूद इसके नदी पर पुल बनाने की दिशा में आज तक पहल नहीं की गयी है। लालगंज के ग्रामीणों ने तो पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान आवाज भी बुलंद किया था। लेकिन पंचायत के नदी पर पुल नही बन सका। बीडीओ ने बताया नदी पर पुल का होना जरूरी है, लेकिन लागत बड़ी  होने के कारण वरीय पदाधिकारियों को लिखा जायेगा।

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