सुपौल : मानवता को किया शर्मसार, अजनबी की मौत

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रिपोर्ट:-सोनू आलम / बलराम कुमार

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डॉक्टरों की मनमानी।

जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय क्षेत्र में ग्रामीणों ने बताया कि लतोंना वार्ड नं0 4 के पंचायत भवन के पास सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़ा एक व्यक्ति मिला। व्यक्ति सड़क किनारे जख्मी हालत में बेहोश पाया गया, जिसे ग्रामीणों द्वारा एम्बुलेंस से त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया लेकिन ग्रामीणों के अनुसार डॉक्टरों ने की मनमानी के कारण बिना प्राथमिक उपचार के उसे सुपौल सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। उक्त घायल व्यक्ति को एम्बुलेंस से सुपौल सदर अस्पताल ले जाने ही वाला था, कि अस्पताल में ही मौत हो गई। स्थानीय पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। पुलिस द्वारा लाश को पोस्टमार्टम के लिए सुपौल सदर अस्पताल भेजा गया।

ग्रामीणों ने बताया कि एक घायल व्यक्ति सड़क बाईक सवार चालक ने टक्कर मार दी थी। चालक बाईक छोड़ फरार हो गया। हालांकि घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने बाईक को अपने कब्जे में ले लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि घायल व्यक्ति को ईलाज के लिए लाया गया था, लेकिन यहाँ करीब 10 वर्षो से एक ही अस्पताल में जमे रहने के कारण डॉक्टरों की मनमानी चलती है। ज्यादा दिनों से एक ही अस्पताल में जमे रहने से उनका रवैया दिखाई देता है। ग्रामीणों का कहना है कि यूँ तो पृथ्वी पर डॉक्टरों को भगवान का दर्जा है इन डॉक्टर ने भगवान शब्द को कलंकित करने का काम किया है।

अस्पताल प्रभारी डॉ0 आर पी सिन्हा से पूछा गया की किस डॉक्टर की ड्यूटी थी? मरीज के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया? तो उन्होंने बताया कि डॉ0 इन्द्रदेव यादव की ड्यूटी है, अगर मरीज का ईलाज नहीं किया तो सरासर उसकी गलती है। स्वास्थ्य के नाम बिहार सरकार द्वारा दावा किया जाता है कि मेरी सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी चल रही है लेकिन धरातल पर तो कुछ और ही बयां हो रही है। डॉक्टर अपनी मनमानी से बाज नहीं आते हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अजनबी घायल व्यक्ति का ईलाज किया जाता तो आज वो जिंदा रहते। ईलाज समय से नहीं होने की वजह से व्यक्ति की मौत हो गई।

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