सुपौल : न्याय के लिए दर-दर भटकता दुष्कर्म पीड़ित युवती का परिवार

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सोनू आलम / बलराम कुमार

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सुपौल : जिले के छातापुर थाना क्षेत्र में सनसनीखेज का मामला सामने आया है, जहाँ एक दुष्कर्म पीड़ित युवती न्याय के लिए चार दिनो से दर-दर भटक रही है लेकिन अब तक थाने में मामला भी दर्ज नहीं हो सका है, क्योंकि सुशासन बाबू के राज में अफसरों की मनमानी चल रही है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि बीते रविवार को गाँव के ही दो युवक द्वारा अपहरण कर दो दिन तक लगातार सामूहिक दुष्कर्म भी किया।

बताया जा रहा है की इस मामले को लेकर पीड़िता द्वारा छातापुर थाना में आवेदन भी दिया गया है। आरोप पत्र में लिखा गया है कि 23 जून को करीब 10 बजे दिन में गाँव के ही दो युवक मो0 सरफराज एवं करीमन मो बबलू, साफी, के द्वारा घर के नजदीक से ही उसे जबरन हथियार के बल से बाईक पर बैठा लिया और मुँह को दुपट्टे से बांध कर उसे सुपौल की ओर ले जाकर अज्ञात स्थान पर रखा। उक्त दोनों युवक ने दो दिनों तक लगातार बारी-बारी से दुष्कर्म किया और उसे धमकाते रहा। दो दिन बीत जाने के बाद 25 जून को दुष्कर्म आरोपी दोनो युवक ने उसे मधुबनी पंचायत के क्वाटर चौक एनएच 57 पर छोड़कर, दोनों युवक वहाँ से फरार हो गए। पीड़िता ने कहा कि वहाँ से वो किसी तरह अपने घर लौटी।

इस बीच उसके पिता ने 24 जून को अपने पुत्री के अपहरण हो जाने का लिखित आवेदन छातापुर थाना में दिया था। लेकिन थानाध्यक्ष द्वारा दो दिन बीत जाने के बाद भी अपहरण का मामला दर्ज किया। जब 25 जून को अपहरणकर्ता द्वारा मुक्त किया तो खुद पीड़ित युवती ने 26 जून को पुनः छातापुर थाना में लिखित आवेदन दिया, जिसके बाद थानाध्यक्ष ने 27 जून को सुबह फिर थाने बुलाया। पीड़िता अगले सुबह पिता के साथ थाने पहुँची। थानाध्यक्ष के इंतजार मे घंटों बैठे रहे, लेकिन थानाध्यक्ष राघव शरण से जब मुलाकात नहीं हुई। तब बीरपुर DSP से फोन पर सम्पर्क कर थानाध्यक्ष के बारे में बताने के बाद थानाघ्यक्ष पहूंचे। लेकिन थानाध्यक्ष द्वारा आवेदन बदलने को कहा गया। यह भी कहा कि आवेदन नहीं बदलेगा तो एफआईआर दर्ज नही किया जाएगा। वही हुआ अब तक मामला दर्ज नही किया है। मामले में अभी तक प्राथमीकि दर्ज नहीं की गई है।

थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार ने बताया कि थानाध्यक्ष द्वारा कार्यालय कक्ष में पीड़िता को बुलाया। वही पीड़िता के माँ और पिता दोनो को बाहर निकाल दिया गया और बिना महिला पुलिस के थानाध्यक्ष ने अपने कक्ष में पुछताछ के दौरान दिए गए आवेदन बदलने का दबाब देने लगे तथा पीड़िता के कथनानुसार थानाध्यक्ष द्वारा दिए जा रहे दबाव के कारण वो परेशान हैं। वहीं पीड़िता के परिजनों ने बताया कि वो अपनी पुत्री को न्याय दिलाने के लिए परेशान हैं और इस मामले को लेकर छातापुर थाना के अलावे महिला थाना से लेकर बीरपुर DSP तथा सुपौल SP से भी गुहार लगाई लेकिन सुशासन बाबू के राज में तो प्रशासन की ही मनमानी चलती है, गरीबों का सुनता कौन है। पुलिस की मिलीभगत, मनमानी रवैये से उनकी पुत्री को न्याय मिलने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। पुलिस की इस मनमानी रवैये से थाना क्षेत्र में इस घटना को लेकर काफी चर्चा भी हो रही है।

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