सुपौल : सैकड़ों की तादाद में उर्दू के छात्र होने के बाबजूद उर्दू शिक्षक नही

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एन के शुशील

शिक्षा में गुणात्मक सुधार की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। इसमें आमूलचूल परिवर्तन के लिए नए-नए प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच बुनियादी सुविधा की तरफ शायद ही किसी का ध्यान जा रहा है। हर साल स्थिति को बेहतर करने के लिये करोड़ों की योजनाएं बनती हैं। लेकिन जब स्कूलों की गुणात्मक सुधार की बात तो दूर शिक्षा की बात आते ही छात्र से लेकर अभिभावक तक में मायूसी का आलम छा जाता है। क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की घोर कमी, बदहाल व्यवस्था की तस्वीर दिखाने के लिए काफी है। शिक्षा के प्रति सरकार कितनी संवेदनशील है इसका अंदाजा जिले के छातापुर प्रखंड के घीवहा पंचायत के चकला गांव स्थित मिडिल स्कूल चकला मकतब की शिक्षा व्यवस्था को देखकर लगाया जा सकता है। कभी योग्य शिक्षकों से स्कूल भरा रहता था। लेकिन आज हालत यह है कि यहाँ नामांकित करीब 449 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई लिखाई का जिम्मा, सिर्फ पांच शिक्षकों के भरोसे हैं। सैकड़ों की संख्या में बच्चें रोज स्कूल तो आते है। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पूर्ण रूपेण शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते है। स्कूल के कई छात्रों ने बताया कि स्कूल में घंटों समय बर्बाद करने के सिवाय कुछ नहीं मिलता है। शिक्षक की कमी के चलते ढंग से पढ़ाई नही हो पाती है।

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मजेदार बात यह है की इस स्कूल में 350 छात्र-छात्रा उर्दू पढ़ने वाले हैं। लेकिन इस विद्यालय में 15 वर्षों से एक भी उर्दू शिक्षक नहीं है। जानकारी हो कि बिहार में उर्दू को द्वितीय राजकीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। बावजूद इसके इस स्कूल में इस भाषा की पढ़ाई मकतब स्कूल होने के बाद भी नही हो पा रही है। अभिभावकों ने बताया की स्कूल में उर्दू शिक्षक की मांग को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को लिखित आवेदन भी दिया गया है। बाबजूद समस्या का निदान नही हुआ है।

प्रभारी प्रधानाचार्य रामप्रवेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में यहाँ महज 5 शिक्षक पदस्थापित है। इन्हीं के ऊपर नामांकित छात्रों को पढ़ाने का जिम्मा है। उन्होने बताया कि स्कूल में भवन के अभाव में पठन-पाठन काफी प्रभावित हो रहा है। इस स्कूल में तीन कमरा है, जिसमें से एक विद्यालय के कार्यालय के रूप में उपयोग होता है, दो कमरा में पढाई होती  है। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को भी है। लेकिन अभी तक यहाँ न सिर्फ शिक्षकों की बल्की भवन की समस्याओं पर भी अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। स्थानीय ग्रामीण  मौलाना अब्दुल जलील,  आबिद हुसैन, मो. जहरुद्दीन,  मो. रियाज़, मो. सलीम,  मो. यूनुस, मो. कलिम,  मो. तस्लीम आदि ने डीईओ से अविलम्ब समस्या समाधान की मांग की है।

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