सुपौल: त्रिवेणीगंज, भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण की खुलेआम उड़ाई गई धज्जियाँ

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सोनू आलम बलराम कुमार, कोशी की आस@त्रिवेणीगंज सुपौल।

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सुपौल: मामला सुपौल जिला के त्रिवेणीगंज अनुमंण्डलीय स्थित टाऊन हॉल की है। 23 सितम्बर 19 को भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय नई दिल्ली के आदेशानुसार त्रिवेणीगंज टाऊन हॉल में GPDP, का प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम के साथ समय सीमा की अवधि दी गई थी। लेकिन यहाँ आदेश का पालन करता कौन है पदाधिकारी अपने मनमानी तरीके से कागज पेन पर ही कर लेते हैं।
जिसका नजारा खाली कुर्सियां बयाँ कर रही है।

आज दूसरे दिन भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए सिर्फ 2 पदाधिकारी 1,मनरेगा PO, जीविका BPM,कई पदाधिकारी तो आए भी नहीं। जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम का सारा व्यवस्था BDO, ममता कुमारी की थी लेकिन नहीं तो BDO, ममता कुमारी आई ओर ना ही तो कोई व्यवस्था थी। पदाधिकारी भी दो ही थे तो प्रतिनिधिगण भी कुव्यवस्था को देखकर नहीं आए। BPM, एवं PO, ने ब्लॉक के ही कुछ सदस्यों को प्रशिक्षण दिए। वहीं व्यवस्था ठीक नहीं रहने एवं प्रतिनिधिगण,पदाधिकारी,की कमी रहने के कारण वेलोग शर्मिंदा महसूस कर रहे थे। जब जीविका BPM, से प्रशिक्षण के बारे पूछा गया तो उन्होंने बताया की प्रशिक्षण कार्यक्रम का सारा जिम्मा BDO, ममता कुमारी, को दिया गया था लेकिन वो खुद ही नहीं आई। व्यवस्था ठीक नहीं है सिस्टम नाम की चीज ही नहीं है।ये शर्मिंदगी की बात है।मेरा मानना है इससे त्रिवेणीगंज प्रखंड ओर नीचे की जाएगा।

जबकि प्रशिक्षण का समय था। 09:30 बजे से पंजीकरण एवं उदघाटन,10:30 तक 10:30 बजे से अच्छे प्रशिक्षण के गुण एवं प्रभावी संवाद संप्रेषण,12:00 बजे तक 12:00 बजे से1:30 बजे तक बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 में योजना के प्रावधान 1:30 बजे से 2:15 बजे नाश्ता 2:15 बजे से 3:30 बजे तक ग्राम पंचायत विकास योजना GPDP, क्यों एवं उद्देश्य तथा चरण एवं प्रक्रिया 3:30 बजे से 3:45 तक चायकाल 3:45 से 5 बजे तक role, enviroment, for GPDP, पर्सीसिप्टरी रूरल अप्रेजल था । लेकिन नियम कानून को ताक पर रख कर पदाधिकारी मनमानी करते हैं।सिर्फ कागज पेन पर कार्य को पूर्ण कर देते हैं। सरकार गरीब,दलित, महादलित, मजदूर,किसानों के लिए योजना की जानकारी एवं योजना का लाभ दिलाने के लिए यथा सम्भव प्रयास कर रही है लेकिन पदाधिकारी हैं की अपनी मनमानी से बाज हीं नहीं आते हैं।

कानूनी कार्यवाही का डर ही नहीं है। मरते हैं जनता जनार्दन ही न । खाते पीते जनता जनार्दन के हैं तनख्वाह जनता जनार्दन से वसूला जाता है टेक्स के रूप में हो या कर के रूप में लेकिन मरता कौन है, सरकारी लाभ से वंचित कौन है, जनता जनार्दन। जब भाड़े का जरनेटर ऑपरेटर से पूछा गया कि कार्यक्रम कब शुरू किया गया खत्म इतनी जल्दी हो गई तो उन्होंने कहा कि मुझे क्या पता पदाधिकारी जाने।जबकि भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय नई दिल्ली के आदेशानुसार GPDP, प्रशिक्षण कार्यक्रम का सारा कार्य भार प्रखंड पदाधिकारी को दिया गया था। सुशासन बाबू के राज में पदाधिकारियों की मनमानी चल रही है।

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