कब तक सुनते रहेंगे कि “जाँच के आदेश दे दिये गए हैं, दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा” :- संदर्भ सूरत हादसा

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आशुतोष सिंह :

बड़ा अजीब है हमारे देश में, जब भी कोई घटना होती है, तो जाँच का आदेश देने में तनिक भी देरी नहीं की जाती है। जैसे लगता है कि अब तो आगे से कभी, ऐसा हादसा हो ही नहीं सकता, लेकिन ऐसा नहीं है, हम हर बार उम्मीद करते हैं किन्तु फिर से एक नई घटना और एक बार फिर से नए जाँच का आदेश, और-तो-और मुआबजे की घोषणा ऐसे की जाती है, जैसे उन लोगों के जान की कीमत दे दी जा रही है। मैं कल गुजरात के सूरत शहर में घटी बेहद ही दुखद घटना की बात कर रहा हूँ। ये कोई नई घटना नहीं है, हमारे देश में हजारों इस तरह की आग लगने घटना घट चुकी है, परंतु हम सीखने वाले कहाँ हैं?….

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गुजरात के सूरत के तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगने से मरने वालों की संख्या 20 (अधिकांश बच्चे) हो गई है, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल हैं। जैसा कि बताया जा रहा है आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। गुजरात के मुख्यमंत्री ने इस हादसे के कारण की जाँच के आदेश दिए हैं। हादसे के कई वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया में वायरल हो गए, जिन्हें देखकर लोग सहम गए।

 

 

आज जहाँ एक तरफ हम भारत के विश्वशक्ति बनने की बात करते हैं कि हमारे अर्थव्यवस्था का एक सूचक सेंसेक्स रॉकेट की तरह ऊपर उर रहा है, हम दुश्मनों को उसके घर में गुसकर मारने की क्षमता रखने लगे हैं, साथ ही विकास की बात तो हम ऐसे करते हैं जैसे……… हाँ, इसमें कोई शक नहीं कि बीते कुछ वर्षों में हमारे देश में विकास ने रफ्तार न पकड़ा हो। हम एक अच्छे रफ्तार से हर क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच दुर्भाग्य, नहीं-नहीं दूरदर्शिता और योजनाबद्ध परियोजना की कमी देखिये कि बड़े-बड़े शहरों में आज भी बिल्डिंगों की संरचनाओं ऐसी हो चुकी है / हो रही है, जहाँ आये दिन ऐसी अनहोनी होती रहती है और इससे बचने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होती है। साथ ही प्रशासन का ध्यान तब तक नहीं जाता है, जब तक कि कोई अनहोनी न हो जाय। कल जो घटना व्यापारों की नगरी सूरत में घटी….उपर्युक्त बातों को एक बार फिर से दुहरा रही है। इतने बड़े कोचिंग में Fire Extinguisher अर्थात आग से बचने की कोई पुख्ता इंतजाम का न होना यही दर्शाता है। ये सिर्फ एक कोचिंग या संस्थान की बात नहीं है। आग से बचाने की मशीन तो चमचमाते हुए शीशे में ऐसे कैद रहती है कि वह आग से बचाने का नहीं बल्कि दर्शकदीर्घा में रखा एक उपकरण हो। समय-समय पर उसके अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग नहीं होने और उपकरणों का सांकेतिक प्रयोग नहीं होने के कारण, हादसा होने पर उससे शत-प्रतिशत फायदा नहीं लिया जा सकता है।

हम प्रशासन से विनम्र निवेदन है कि समय-समय पर इन उपकरणों की न सिर्फ जाँच की जाय बल्कि इस तरह के हादसे को रोकने के लिए वर्तमान में मौजूद कानून के अनुसार जहाँ भी बेसिक (मूलभूत) चीजों की कमी, जैसे किसी मकान या कॉम्प्लेक्स बनाने की अनुमति के साथ उन शर्तों का सही से पालन हो रहा है अथवा नहीं, उसका कड़ाई से पालन हो और यदि उसमें अनियमितता पाई जाती है, तो आवश्यक करवाई की जाय ताकि आगे से कोई भी लापरवाही करने की कोशिश न करें, क्योंकि जिस भी परिवार के लोग इन हादसों के शिकार होते हैं, उसका दर्द सिर्फ उसी परिवार के लोग जान सकते हैं, हम-आप तो कुछ समय के लिये उन्हें ढांढस देते हैं, मुआबजे की घोषणा करते हैं कि उनके घाव पर कुछ मरहम पट्टी हो जाय लेकिन जिस लापरवाही बरतने या जिस भी वजह से लोगों की जान जाती है, उनके परिवार वालों का जख्म / घाव जन्मों तक नहीं भरता है।

अतः प्रशासन से विनम्र निवेदन है कि समय-समय इस तरह की ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों में आगजनी और इस तरह की अनहोनी से बचने के लिए लोगों में आवश्यक प्रशिक्षण और जागरुकरता की व्यवस्था की जाय तथा ऐसे भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर उन सभी चीजों की जाँच करनी चाहिए, जिससे किसी प्रकार के हादसे में जान माल का नुकसान न हो। साथ ही हम सभी आम आदमी का भी कर्तव्य है कि हर कुछ की ज़िम्मेदारी हमें सरकार या प्रशासन पर नहीं थोपनी चाहिए बल्कि हमें भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए और अगर हम सब अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाने लगे तो अधिकांश दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है।

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