जीवन जीने के दो रास्ते, अब चुनना आपके हाथ में कि किस पथ पर चला जाय- उपेंद्र कुमार योगी

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राहुल यादव
कोशी की आस@मधेपुरा

पतंजलि योग पीठ के जिला योग प्रशिक्षक मधेपुरा उपेंद्र कुमार योगी ने बताया की अनेक लोग, अनेक प्रकार से अपना-अपना जीवन जीते हैं। कोई जीवन को सुहाना सफर कहता है, तो कोई कहता है जीवन एक यात्रा है, इस यात्रा को आज तक कोई समझ नहीं पाया। कोई कहता है यह प्यार का गीत है। कोई इसे दु:ख का सागर बताता है आदि। इस प्रकार से सबके अपने-अपने विचार हैं, अपने-अपने अनुभव हैं और अपने-अपने ढंग हैं, जीवन जीने के।

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हर एक व्यक्ति की दृष्टि अलग-अलग है। परंतु एक चीज सभी लोग चाहते हैं, जिसका नाम है सुख। आप भी निश्चित रूप से सुख चाहते ही होंगे। क्योंकि इसमें किसी का भी कोई मतभेद नहीं है। यदि आप भी जीवन को सुख पूर्वक, आनंद पूर्वक जीना चाहते हों, तो इसको ऐसे ढंग से जीएँ, जैसे कोई खेल चल रहा हो। कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, बैडमिंटन इत्यादि की तरह।

यदि आप इस भावना से अपना जीवन जीएँ, तो शायद यह जीवन जीना, अधिक आसान लगेगा। मनोरंजक और सुखदायक भी होगा। परंतु कोई भी खेल, तभी मनोरंजक और सुखदायक होता है, जब खिलाड़ी उस खेल के नियमों का पालन करें।

इसी प्रकार से जीवन जीने के भी कुछ नियम हैं। यदि आप उन नियमों का पालन करेंगे, तो वास्तव में यह जीवन भी आपको खेल की तरह सरल ही लगेगा। और बड़ी आसानी से हंसते खेलते आप आनंद पूर्वक अपना जीवन पूरा कर जाएंगे। यदि खेल के नियमों का पालन नहीं किया, तो जीवन में दु:ख भी अधिक भोगने पड़ेंगे और बाद में बदनामी भी अधिक होगी। दोनों रास्ते आपके सामने हैं जो अच्छा लगे उस पर चलना आपके हाथ में है।

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