आज भी हैं नायक, हमारे इसी समाज में…

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भारत की धरती ने समय-समय पर ऐसे व्यक्तित्व को जन्म दिया है, जिनके उपर पूरी मानवता की आस टिकी होती है। जिनके कंधों पर हमारी परम्पराएँ गर्व करती है, जिनकी आंखों में समाज अपने उम्मीदों को ज़िंदा देखता हैं, जिनके होंठों पर सच्चाई की मुस्कान हमेशा दमकती है, जिनके हृदय में असहाय और निर्बल लोगों के लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा कभी कम नहीं होती। गमों के दौर में भी जिनकी हिम्मत कमजोर तो होती है, लेकिन टूटती नहीं।

आज हम आपको ऐसे ही व्यक्तित्व से परिचय करवाने जा रहे हैं। आज हम जिनकी बात करने जा रहे हैं, वे हैं मुंगेर, बिहार के बहुत ही सम्मानित समाज सेवक “श्री फुलेंद्र चौधरी और उनकी धर्म-पत्नी श्रीमती नूतन कुमारी जयसवाल”। निःस्वार्थ समाज सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए “चौधरी दंपति” घोसी टोला, मुंगेर में मूक बधिर लड़कियों के लिए एक निःशुल्क आवासीय स्कूल चला रहे हैं। 1991 से चल रहे इस विद्यालय में मूक बधिर लड़कियों का लालन-पालन, पढ़ाई-लिखाई, स्पीच थेरेपी, व्यवसायिक प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं निःशुल्क प्रदान करते हैं। इस विद्यालय से निकली कई लड़कियों ने अपना सफल स्वरोजगार शुरू किया, कई लड़कियों की विलक्षण प्रतिभाओं को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है।

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हाल में बिहार में ही घटित “बालिका गृह कांड” ने जहाँ समूचे समाज को शर्मसार किया, लोगों का भरोसा समाजसेवियों से उठा किन्तु उसी समाज में “चौधरी दंपती” द्वारा चलाये जा रहे “बाबा वैद्यनाथ बालिका मूक बधिर आवासीय निःशुल्क विद्यालय” की सभी लड़कियाँ “चौधरी दंपती” को माँ और पापा बुलाते है। 18 वर्ष के बाद इन लड़कियों को घर वापस भेजते हुए “चौधरी दंपती” काफी भावुक हो जाते हैं, क्योंकि प्रारंभ से 18 वर्ष तक वे इन लड़कियों को अपनी बेटी की तरह पालते हैं।

श्री फुलेंद्र चौधरी को उनके उत्कृष्ट समाज सेवा के लिए कई राजकीय और राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके है। वर्ष 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति “श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल” ने श्री चौधरी को “राजीव गांधी मानव सेवा सम्मान” से सम्मानित किया। उनकी ईमानदारी और लोकप्रियता का आलम यह है कि वे मुंगेर जिलास्तरीय 17 सदस्यीय समितियों में नामित सदस्य हैं। मुंगेर जिला का कोई भी कार्यक्रम श्री चौधरी के बिना अधूरा ही होता है।

इनके स्कूल को समय-समय पर सरकारी अनुदान भी मिला है। लोगों ने भी हृदय से दान दिया है। लेकिन वर्तमान में इनका स्कूल काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पिछले एक वर्ष से कोई सरकारी अनुदान नहीं मिल पाया है। स्कूल में कार्यरत शिक्षकों को एक वर्ष से सैलरी नहीं दी जा सकी है। श्री चौधरी ने इस विपरीत दौर में भी लड़कियों के रख रखाव, खाना और स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया, भले ही लाखों रुपये के कर्ज में डूब गए हों। कभी-कभी टूटते हैं और सब कुछ छोड़ देने का सोचते हैं किन्तु अगले ही पल जब उन बेटियों के भविष्य का ख्याल आता है तो फिर उनके लिए कुछ करने की कोशिश में जुड़ जाते।

हम “कोसी की आस” के द्वारा आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन करते हैं कि इस अनुपम विद्यालय को स्व-विवेक से जितना सहयोग हो सके प्रदान करें, ताकि इनकी निःस्वार्थ समाज सेवा की प्रेरणा कभी कम न हो। एक बार हो सके तो 28 वर्षो से चल रहे इस अद्भुत निःशुल्क विद्यालय को घूमने का सपरिवार कार्यक्रम बनाएं, आप अहसास करेंगे कि बिहार की धरती पर एक अद्भुत जगह हैं, जहाँ NGO के प्रति बनी हुई हमारी नकारात्मक धारनाएं ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो जाएगी। अगर आप किसी भी तरह की उनकी मदद करना चाहते हैं तो निम्न फ़ोन नंबर पर उनसे संपर्क करें:-

मोबाइल नम्बर 9525238805, 9204342317

अनुदान हेतु बैंक खाता नम्बर 0326000100216751

Punjab National Bank, IFSC PUNB0032600

हौसले के धनी “चौधरी दंपती” को “कोसी की आस” टीम सलाम करती है और उनका यह नेक कार्य अनवरत चलता रहे ऐसी कामना करती है तथा अपने पाठकों से विनम्रता से निवेदन करते है कि उक्त संस्थान के बारे में अवगत होकर मदद हेतु स्व-विवेक से निर्णय लें।

(यह “कोसी की आस” टीम को उपरोक्त वर्णित NGO में गए एक हमारे सम्मानित व्यक्ति द्वारा प्रेषित जानकारी पर आधारित है।)

निवेदन- अगर यह सूचना पसंद आई हो तो लाइक/कमेंट/शेयर करें। अगर आपके आस-पास भी इस तरह की सूचना उपलब्ध है तो हमें MESSAGE करें, हमारी टीम जल्द आपसे संपर्क करेगी। साथ ही फ़ेसबूक पर कोसी की आस का पेज https://www.facebook.com/koshikiawajj/ लाइक करना न भूलें, हमारा प्रयास हमेशा की तरह आप तक बेहतरीन और उपयोगी ख़बर, रोजगार सूचना, लेख और सच्ची कहानियाँ प्रस्तुत करने का है और रहेगा।

टीम- “कोसी की आस” ..©

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