गणित से डरने वाला बना गणित का महारथी

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“छपरा, बिहार के बेहद ही गरीब परिवार से आने वाले और गणित विषय में बेहद ही कमजोर छात्र के गणित विषय में ही महारथ हासिल करने की” कहानी को आज “कोसी की आस” टीम अपने प्रेरक कहानी शृंखला की 10वीं कड़ी में आपको बताने जा रही है। यह कहानी उन सभी छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो अपनी असफलता का कारण जानने के बाबजूद, अपनी कमियों पर काम करने के बजाय, उसे अपनी कमजोरी मान लेते हैं, और-तो-और जो विषय पूर्व से ही ठीक रहता है, उसे ही पढ़ते रहते हैं, यही उनकी असफलता का कारण बनता है। वो कहते हैं न किभीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है।” अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता”।

 

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“कोसी की आस” टीम अपने पाठकों से यही कहना चाहती है कि आप जिस भी क्षेत्र में सफलता ढूँढ रहे हैं, सबसे पहले उसके समस्त पहलू से अवगत हों और अपने आपको उसके संदर्भ में देखें कि किस क्षेत्र में हमको कितना काम करना है, जो विषय हमारा पहले से ही ठीक है, उसके आलावा हमको ऐसे विषय जिसमें हम कमजोर हैं, उसमें ज्यादा काम करने की जरूरत है, और हम विश्वास दिलाते हैं कि यदि आपने इस तरह योजनाबद्ध तरीके से प्रयास जारी रखा तो आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।

हमेशा याद रखें कि ……..

“कद्र किरदार की होती है,

वरना कद में तो,

साया भी इंसान से बड़ा होता है”

 

आज “कोसी की आस”  टीम जिनकी कहानी आपको बताने जा रही है, वो न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की चाह रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बल्कि उन सभी युवाओं के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जो अपना एक अलग मुकाम बनाना चाहते हैं। आइये  मिलते हैं छपरा, बिहार के श्री जिवेंद्र कुमार श्रीवास्तव के सुपुत्र और पटना, बिहार में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे युवाओं के बीच “सौरभ सर गणित वाले” के रूप में काफ़ी चर्चित ऐसे ही शख़्सियत श्री सौरभ कुमार श्रीवास्तव से।

 

  1. व्यक्तिगत परिचय

 

नाम :-             सौरभ कुमार श्रीवास्तव

                

पिता का नाम:-   श्री जिवेंद्र कुमार श्रीवास्तव

 

 

शिक्षा:- 10वी :-   पाटलिपुत्र हाई स्कूल,पटना,  2003

            12वी :-   टीपीएस कॉलेज, 2006

 स्नातक :-   बी डी कॉलेज, 2010

 

 

  1. ग्राम :- छपरा

 

3. जिला :-      छपरा, बिहार

 

  1. पूर्व में चयन :- विभिन्न सरकारी बैंकों में क्लर्क और पीओ पद के लिए 10 से अधिक बार चयन, Former Faculty Member at “BSC Academy” Delhi (NCR), Former Faculty Member at “Paramount Coaching Centre Pvt. Ltd” Delhi (NCR).

 

  1. वर्तमान पद :- Founder and Director “Mathematics Point, Patna”.
  2. अभिरुचि:- पढ़ाना और खाना।

 

  1. किस शिक्षण संस्थान से आपने तैयारी की:- स्व-अध्ययन।

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  8.आपको इसकी तैयारी के लिए प्रेरणा कहाँ से मिला:- बचपन में मुझे गणित विषय से बहुत डर लगता था लेकिन जब मैं 9TH क्लास में गया तो सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति ने मेरे इस डर को भगा दिया और जिसे मैं अब तक अपनी कमजोरी समझ बैठा था, वही आज मेरी सबसे बड़ी ताकत हो गई है। जिस विषय से मैं भागता था, छात्र आज उसी विषय को सिखने-जानने मेरे पास आते हैं। अपने बीते अनुभव से मैंने यह निश्चय किया कि अब गणित के क्षेत्र में ही कुछ करना है और गणित विषय से डरे युवाओं के ज़ेहन से इस डर को भगाना है। दूसरे शब्दों में यूँ कहें कि आज गणित ही मेरी पहचान बन चुकी है।

एक पंक्ति जो मुझे हर मुश्किल वक़्त में आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करती थी……..

“जो मंजिलों को पाने कि चाहत रखते हैं,

वो समंदरों पर भी, पत्थरों के पुल बना देते हैं।”

 

  1. आप इस सफलता का श्रेय किसे देना चाहते हैं:- बहुत ही सरल भाव के साथ “श्री सौरभ” बताते हैं कि मैं अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ और जीवन में उत्पन्न कठिन परिस्थितियों को दूँगा।

  1. वर्तमान में प्रयासरत युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे:- बड़े ही बेबाकी से “श्री सौरभ” बताते हैं कि आज के समय में सफलता पाना बहुत आसान है, चाहे आप पढ़ाई, खेल, राजनीति या फिर किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए प्रयासरत हों, बस आपको पूरी ईमानदारी से उसे पाने की जिद करनी  होगी और हर दिन उसमें इनोवेशन करना होगा ताकि आप जमाने से पीछे ना हो जाए आप निश्चित रूप से सफल होंगे।

 

11.अपनी सफलता की राह में आनेवाली कठिनाई के बारे में बताएं:- बचपन बहुत गरीबी में बीता लेकिन वो कहते हैं न कि “अभाव का बहुत प्रभाव होता है” और आप अभाव की वजह से छोटे से उम्र में ही बहुत कुछ सीख लेते हैं, यही मेरे साथ हुआ। घर में ऐसी आर्थिक मजबूरी थी कि मैंने दसवीं पास करते ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया और फिर ट्यूशन पढ़ा-पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखा। वर्ष 2010 में ग्रेजुएशन पास करने के बाद कई सरकारी बैंकों की नौकरी में सफल होने के बाद, मात्र 20 वर्ष के उम्र में प्रतियोगी परीक्षा के लिए पढ़ाना शुरू किया। मुझे लगा कि नौकरी कर अपने साथ न्याय नहीं कर पाऊँगा, इसलिए मैंने नौकरी के बजाय गणित पढ़ाने को ही अपने कैरियर के लिए चुना। लगभग 8 वर्षों तक पटना और दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया और उस दौरान मेरे द्वारा पढ़ाये बच्चों में से लगभग 1000+ बच्चे सरकारी नौकरी पाने में सफल रहे। कुछ व्यक्तिगत कारणों की वजह से मुझे 2018 में अपने संस्थान “मैथमेटिक्स पॉइंट” की शुरुआत करनी पड़ी। एक बार फिर ये सफर मेरे लिए मुश्किलों से भरा था। आप जब कहीं सिर्फ एक शिक्षक के रूप में पढ़ा रहे हों और जब आपने ख़ुद के संस्थान चलाना प्रारंभ किया तो आपकी ज़िम्मेदारी काफ़ी बढ़ जाती है, साथ ही उस क्षेत्र में पूर्व से मौजूद अपने प्रतिस्पर्धीयों से आगे बढ़ने में भी विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वो कहते हैं न कि यदि कुछ कर गुजरने की जिद हो, तो भला आपको सफल होने से कौन रोक सकता है।

 

बेहद कम समय में “मैथमेटिक्स पॉइंट” के मैथेमेटिक्स गुरु सौरभ कुमार श्रीवास्तव को गणित के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के द्वारा युवा शक्ति सम्मान से पुरस्कृत किया। आज के युवाओं से आख़िर में बस इतना कहना चाहूँगा कि

“सफलता को सिर पर चढ़ने ना दें,

और असफलता को दिल में उतरने ना दें”।

 

 

 

(यह “सौरभ कुमार श्रीवास्तव” से “कोसी की आस” टीम के सदस्य के बातचीत पर आधारित है।)

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टीम- “कोसी की आस” ..©

 

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