चंद्राणी मुर्मू : ईश्वर हर किसी को एक मौका अवश्य दे।

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हाल ही में संपन्न लोकसभा के आम चुनाव में यूँ तो जनता ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने के लिए जनादेश दे दिया, लेकिन भारतीय राजनीति में हमेशा से यह सवाल उठता रहा है कि महिलाओं को उनकी संख्या के मुताबिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। इसीलिए लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण देने की बात वर्षों से उठती रही है लेकिन इसे दुर्भाग्य कहें कि यह कुछ तथाकथित हितैसी कहने वाली पार्टियों के वजह या सच कहूँ तो असल में कोई पार्टी दिल से चाहती ही नहीं है। फिर भी यह महिलाओं की सशक्तिकरण का असर है कि 17वीं लोकसभा में अब तक सबसे अधिक 76 महिला सांसद चुने गए हैं। इन्हीं 76 महिला सांसद में से एक है उड़ीसा की चंद्राणी मुर्मू, जिनकी अब तक की यात्रा को कोसी की आस” टीम अपने प्रेरक कहानी शृंखला की 22वीं कड़ी में आप सबके के सामने प्रस्तुत करने जा रही है।

बीजू जनता दल (बीजेडी) की क्योंझर, उड़ीसा की महिला सांसद चंद्राणी मुर्मू अबतक की लोकसभा की सबसे युवा महिला सांसद हैं की उम्र महज़ 25 साल 11 महीने है। इससे पहले हरियाणा के दुष्यंत चौटाला 26 साल की उम्र में 2014 में सबसे कम उम्र के लोकसभा सांसद के रूप में चुने गए थे। क्योंझर (उड़ीसा) जिले के टीकरगुमुरा गाँव की रहने वाली चंद्राणी मुर्मू ने 2017 में “इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च” से मकैनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है और वो सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही थीं। समय-समय पर प्रतियोगी परिक्षाएं भी दे रही थी किन्तु अब तक उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी। चंद्राणी के परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें हैं और वे संयुक्त परिवार में रहती हैं।

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लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने से पहले तक क्योंझर (उड़ीसा) की रहने वालीं चंद्राणी मुर्मू भी सामान्य लड़की की तरह थीं, जो बीटेक करने के बाद एक सामान्य लड़की की भाँति जनरल कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रही थीं। चंद्राणी बताती हैं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति करूंगी और सांसद बनूंगी। सचमुच मेरे लिए मेरा लोकसभा सदस्य के प्रत्याशी के रूप में नामांकन ही अप्रत्याशित घटना थी। और उक्त घटना ने उनके करियर की दशा-और-दिशा ही बदल दी।

चंद्राणी से जब पूछा गया कि आपके पास यह मौक़ा कैसे आया?इस सवाल के जबाब में चंद्राणी बताती हैं कि ”मैं राजनीति में अचानक ही आ गई, पढ़ाई करते हुए कभी सोचा भी नहीं था कि राजनीति में आऊंगी। इसे मेरी क़िस्मत कहिए या सौभाग्य कि मैं आज यहाँ हूँ और इसके लिए मैं आप-सबका आभारी हूँ।” इस अप्रत्याशित घटना ने उस विश्वास को एक बार फिर से मज़बूत किया कि “ईश्वर हर किसी को एक मौका अवश्य देता है”। आगे बताती हैं कि ”दरअसल, क्योंझर महिला आरक्षित सीट है। इस पर चुनाव लड़ने के लिए सीधे मुझसे तो बात नहीं हुई, लेकिन मेरे मामा जी के ज़रिए मुझसे पूछा गया था। बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक एक पढ़ी-लिखी महिला उम्मीदवार ढूंढ रहे थे। शायद मैं उन्हें इस क़ाबिल लगी कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर पाऊंगी और इसलिए उन्होंने मुझे मौका दिया”।

चंद्राणी से जब उनके रोल मॉडल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, सुनिए उन्हीं की जुबानी:- मैं अपने नाना को अपना रोल मॉडल मानती हूँनाना जी के कारण घर में राजनीतिक माहौल पहले से ही था। हालांकि, उनके बाद कोई भी सक्रिय राजनीति में नहीं आया लेकिन राजनीति में जो भी दिलचस्पी है, वो नाना जी के ही कारण है। आज सभी बोलते हैं कि ये हरिहर सोरेने की नातिन हैं। उनका नाम फिर से लिया जा रहा है”। इस प्रकार चंद्राणी मुर्मू को राजनीति एक तरह से विरासत में मिली है। यूँ तो उनके पिताजी के परिवार में तो कोई राजनीति में नहीं है लेकिन उनके नाना हरिहर सोरेन (1980-1989) दो बार कांग्रेस पार्टी के टिकट से सांसद रह चुके हैं। इस बार ओडिशा में सत्ताधारी पार्टी बीजेडी ने सबसे अधिक महिलाओं को टिकट दिया था। चुनाव आयोग में दिए गए हलफनामे के मुताबिक चंद्राणी मुर्मू के पास सिर्फ 20,000 रुपये कैश हैं और सबसे अच्छी बात ये है कि उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक केस नहीं है। उन्होंने अपना पेशा समाज सेवा बताया है। चंद्राणी ने इतनी कम उम्र में लोकसभा पहुँचकर इतिहास रचा है। उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी और दो बार से सांसद रहे अनंता नायक को 67,822 मतों के भारी अंतर से मात दी।

 

चंद्राणी से जब पूछा गया कि आप इस सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?- चंद्राणी स्पष्ट शब्दों में बताती हैं कि मैं इस सफलता का श्रेय क्योंझर (उड़ीसा) की जनता और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक को देती हूँ। वह कहती हैं, ”सबसे युवा सांसद होने की मुझे बहुत ख़ुशी है और ये मेरी ज़िंदगी का गौरवान्वित करने वाला पल है। इसका संपूर्ण श्रेय मैं मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को देना चाहूंगी क्योंकि उन्होंने मुझे ये मौक़ा दिया है।

चंद्राणी से जब उनके आगे के कार्य योजना के बारे में बताइये:- एक आदिवासी इलाक़े से होने के कारण मैं यहाँ मुख्य तौर पर शिक्षा पर काम करना चाहती हैं। आगे कहती हैं, कि ”हमारा ज़िला आदिवासी इलाक़ा है, यहाँ लोगों के विकास के लिए सरकार की तरफ़ से बहुत सारी योजनाएं हैं, लेकिन लोग शिक्षा से वंचित हैं। मैं इसके लिए काम करूंगी क्योंकि किसी भी इलाक़े के विकास के लिए वहाँ के लोगों का जागरूक होना ज़रूरी है।” मतदान से कुछ समय पहले ही चंद्राणी मुर्मू को लेकर एक विवादित वीडियो भी प्रचारित किया गया था। चंद्राणी इसे उनको बदनाम करने की साज़िश बताती हैं। उनका कहना है, ”मेरे लिए चुनावी प्रचार बिल्कुल भी आसान नहीं था। वो उतार-चढ़ाव वाले मुश्किल दिन थे। उस वीडियो से मुझे बहुत हैरानी हुई थी लेकिन आख़िर में जीत सच की ही होती है। मैं चाहूँगी कि “जिस तरह से मुझे मौक़ा मिला है, ईश्वर सभी को उसी तरह मौका दें”

Pic Source- Google Image/बीबीसी

(यह “चंद्राणी मुर्मू” से की गई बातचीत पर आधारित है।)

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टीम- “कोसी की आस” ..©

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