दारोगा पद पर चयनित निखिल के लिए यह परिणाम, लक्ष्य का महज़ एक पड़ाव

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बिहार सरकार ने बिहार अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2019 के ताजा अंतिम परिणाम जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा परिणाम के आंकलन करने से पता चलता है कि जहाँ एक तरफ सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने इसमें सफलता प्राप्त कर न सिर्फ परिवार का बल्कि समूचे समाज का मान बढ़ाया है, वहीं लाखों न चयनित होने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह एक सबक है, अपनी गलतियों को सुधारने का।

खैर, इन ज्ञान देने वाली बातों को छोड़ आगे बढ़ते हैं और कोशी की आस के प्रेरक कहानी शृंखला की 46वीं कड़ी में आज बात करते हैं एक ऐसे होनहार युवा की जो विपरीत परिस्थितियों से लगातार संघर्ष करते हुए खुद को सफलता के शिखर पर पहुँचाने के क्रम में एक पड़ाव पार किया है।

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जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज प्रखंड अंतर्गत शाहजादपुर के स्व० श्री नागेश्वर सिंह के पौत्र एवं संजय सिंह और नीलू सिंह के पुत्र निखिल कुमार सिंह की। यूँ तो अब निखिल के बारे में अब कई बातें कही जा रही है कि निखिल प्रारंभ से ही मेधावी रहा है, निखिल तो..  ये, निखिल…. वो, लेकिन सच में यदि निखिल के अभी तक के एक छोटे जीवनकाल को देखा जाय तो निखिल ने एक प्रतिभाशाली, आत्मविश्वास से लबरेज़, मुश्किल वक़्त में भी हिम्मत बनाये रखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्र के रूप में अपना परिचय दिया है।

कोशी की आस “निखिल प्रारंभ से ही मेधावी रहा है” इससे असहमत नहीं है बल्कि अपने पाठकों को यह बताना चाहता है कि निखिल मेधावी होने के साथ-साथ मेहनती और अपने लक्ष्य के लिये दृढ़ संकल्पित लड़का है, जिसने बिहार अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2019 के दरोगा पद पर अंतिम रूप चयनित हो महज़ अपने लक्ष्य का एक पड़ाव पार किया है।

आये दिन कम होती सरकारी नौकरियों के दौर में निखिल के गाँव वालों और रिश्तेदारों के लिये दरोगा  पद पर अंतिम रूप से चयन होना ही बहुत बड़ी सफलता है। इस शानदार सफलता के लिए खुशी स्वभाविक भी है, क्योंकि आज के दौर में भी उद्दोगधंधों के अभाव के कारण बिहारी छात्रों के लिये एक मात्र उम्मीद सरकारी नौकरी है और एक कहावत चरितार्थ हो गया है कि “भगवान मिलना आसान है लेकिन नौकरी मिलना बहुत मुश्किल”।

कोशी की आस से बातचीत के दौरान निखिल ने बताया कि 2011 में दसवीं, 2013 में बारहवीं और 2013-16 सत्र में स्नातक जिसका परिणाम 30-12-17 को आया। स्नातक के बाद बिहार अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2019 में शामिल होने का मौका मिला औऱ परिणाम आपके सामने है।

निखिल के इस शानदार सफलता के बाबजूद सामान्य अभिव्यक्ति के बारे में हमारे टीम के सदस्य ने जब सवाल किया तो निखिल ने सहज भाव के साथ कहा कि हाँ, खुश हूँ कि अपने लक्ष्य के मार्ग में मैंने महज़ एक कदम बढ़ाया है।

किस शिक्षण संस्थान से आपने प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी की?

अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित निखिल ने स्पष्ट किया कि  मेरी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी स्वाध्याय (self-study) पर ही आधारित रहा, मैंने अपनी पूरी तैयारी सहरसा में ही रहकर की। हाँ, मामा पंकज सिंह प्रवीण का मार्गदर्शन लगातार मिलता रहा।

आपको प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरणा कहाँ से मिली?

बेहद सधे शब्दों में निखल कहते हैं कि बिहार के सामान्य परिवार से आने वाले युवाओं के लिए समाज और परिवार के लिए कुछ करने का सबसे सहज और सरल माध्यम सरकारी नौकरी है। लिहाजा मैंने भी प्रयास प्रारंभ किया।

सफलता का श्रेय किसे देना चाहते हैं?

सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले निखिल ने अपने सफलता का श्रेय शाहपुर, सोनवर्षा (सहरसा) निवासी अपने मामा पंकज सिंह प्रवीण (शिक्षक) को देते कहा कि सच पूछें तो प्रेरणास्रोत भी हमारे मामा जी ही हैं।

सफलता की राह में आनेवाली कठिनाइयों को किस तरह दूर किया?

सौम्य स्वभाव के निखिल से उनके मुश्किल दिनों के बारे में सवाल किया गया तो पहले उन्होंने सब सामान्य की बात कही लेकिन जब बार-बार सवाल पर जोड़ डाला गया तो उन्होंने बताया कि बचपन में पापा का कामकाज ठीक चल रहा था, सब अच्छे से चल रहा था लेकिन फिर समय के साथ ख़राब होते गया और हमलोग मुश्किल में आते गए। लेकिन वो कहते हैं न कि “मुश्किल वक़्त आपका परीक्षा लेता है कि आप अपने आपको उस स्थिति से बाहर निकालने चाहते हैं या नहीं”। हमसबने उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए अपना प्रयास जारी रखा।

वर्तमान में प्रयासरत युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

कोशी की आस टीम के उपरोक्त सवाल के जबाब में निखिल कहते हैं कि अभी मैं उस स्थिति में नहीं हूँ कि संदेश दूं बस इतना कहना चाहूंगा कि अगर आप मुश्किल में हैं तो मुश्किल वक़्त भी टल जाएगा, इसी उम्मीद के साथ अपना प्रयास लगातार जारी रखिये, वक़्त के साथ सब ठीक हो जाएगा।

“निखिल” के बिहार अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2019 में दरोगा पद पर चयन होने से उनके पैतृक गाँव शाहजादपुर में काफ़ी खुशी देखी गई। राजपा के जिला अध्यक्ष आशीष कुमार बाबुल ने बधाई देते हुए कहा कि निखिल गाँव का सीधे तौर पर दरोगा पद के लिए चयनित होने वाला पहला लड़का है। यह हम सभी के लिए बहुत ही गर्व की बात है और साथ ही सभी प्रयासरत युवाओं के लिए प्रेरणाश्रोत है कि एक सामान्य किसान परिवार का लड़का भी अपने मेहनत और लगन से मुकाम पर पहुंच सकता है। बधाई देने वालों में जदयू के वरिष्ठ नेता अमर सिंह, आलमनगर ने पूर्व प्रत्याशी नवीन कुमार निषाद, प्रसून सिंह, हीरा प्रसाद सिंह, बिभु सिंह, निशांत राज, सौरव सिंह, रुमन सिंह, दीपक सिंह आदि शामिल थे।

“कोशी की आस” परिवार की ओर से “निखिल” को उनके इस बेहतरीन सफलता के लिए शुभकामनायें, साथ ही हम उनके उत्तरोत्तर नई सफलता आने वाले दिनों में पाने की कामना करते हैं।

साथ ही “कोशी की आस” परिवार अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि किसी के सफल होने के बाद उसे बधाई देने से बेहतर है कि उसके संघर्ष के दिनों में मदद करें, पैसों से न सही, दो अच्छी बात जो उस संघर्षरत बच्चे का उत्साह वर्धन कर सके, संभव हो तो उसकी तारीफ़ करें ताकि वह और जोश से मेहनत कर सके। और हाँ, यदि इतना भी नहीं कर सकते तो कम-से-कम इससे कुछ नहीं होगा, ये तो बेकार लड़का है आदि बात कहने के बाद, सफल होने के बाद तारीफ वाले शब्द का नौटंकी न करें।

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टीम- “कोसी की आस” ..©

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