“तथाकथित समाज के खोटे सिक्के वाले ताने को साकारात्मक लेने वाले सफल इंजीनियर की कहानी”

0
832
- Advertisement -

कोसी की आस” टीम आज अपने प्रेरक कहानी शृंखला की 17 वीं कड़ी में आपके सामने एक ऐसे सफल इंजीनियर की कहानी प्रस्तुत करने जा रही है जिन्हें महज़ 8 वीं कक्षा में अपने पापा के देहांत के उपरांत गरीबी से पहचान हुई और पिता के देहांत के बाद, यूँ समझिए कि दुखों के पहाड़ ने, ना सिर्फ उनके बचपन को बल्कि युवा अवस्था के भी काफी अहम हिस्सों को तबाह कर दिया था। उनके दुखों और बेरोजगारी में इस तथाकथित समाज ने नमक-मिर्ची लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ा।

 

- Advertisement -

कोसी की आस” टीम आज जिनकी कहानी आपके सामने बताने जा रही है उसमें इस तथाकथित समाज ने ताने मार-मारकर कि “तु खोटा सिक्का है, तुमसे कुछ नहीं होगा” से उनको इतना ठोकर पहुँचाया, अरे नहीं समाज के उसी ताने की वजह से, उसी समाज को कुछ कर दिखाने का प्रण लेकर लगातार कई मुश्किलों का सामना करने के उपरांत सफल इंजीनियर की कहानी है। और इनकी कहानी देख अपनी-अपनी सफलता के लिए प्रयासरत युवाओं के लिए एक प्रसिद्ध पंक्ति समर्पित करता हूँ कि

 

“बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है”।

 

साथ ही एक और महत्वपूर्ण बात जो प्रयासरत युवाओं के लिए अत्यावश्यक है कि खुद पर विश्वास करना होगा क्योंकि

“विश्वास वह शक्ति है जिससे उजड़ी हुई दुनियाँ में प्रकाश लाया जा सकता है।”

 

आइये मिलते हैं पलसाना, सीकर, राजस्थान के परिश्रमी और कुछ कर गुजरने की जिद और उसी ताने देने वाले समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने स्व. बाबूलाल जंगीद & श्रीमती कमला जंगीद के सुपुत्र मनीष जंगीद से “कोसी की आस” टीम के बातचीत के प्रमुख अंश :-

 

  1. व्यक्तिगत परिचय

 

नाम            :-      मनीष जंगीद

पिता&माता का नाम:-      स्व. बाबूलाल जंगीद & श्रीमती कमला जंगीद

शिक्षा:- 10वीं     :-      शासकीय विद्यालय पलसाना, सीकर, राजस्थान।

 

             12वीं     :-             सीकर विद्यापीठ, राजस्थान।

      स्नातक   :-        B. Tech. Sobhasaria Engineering College (Mechanical Engineering).

  1. 2. ग्राम :- पलसाना।

3 जिला         :-         सीकर।

 

  1. पूर्व में चयन :- Technician at Bucon Engineers & Infrastructure Pvt. Ltd. in Bahrain.

 

  1. वर्तमान पद :- General manager at Bucon Engineers & Infrastructure Pvt. Ltd. in Bahrain
  2. अभिरुचि:- बास्केटबाल।

 

  1. किस शिक्षण संस्थान से आपने तैयारी की:- किसी ख़ास संस्थान से नहीं लेकिन इंजीनियरिंग में जो पढ़ा था उसका फायदा मिला।
  2. आपको इसकी तैयारी के लिए प्रेरणा कहाँ से मिला:- कुछ अजीब सा जबाब है किन्तु सच यही है कि तथाकथित समाज के ताने कि “तु खोटा सिक्का है, तुमसे कुछ नहीं होगा” ने ही मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
  3. आप इस सफलता का श्रेय किसे देना चाहते हैं:- ईश्वर की असीम अनुकंपा, माता-पिता का आशीर्वाद के साथ-साथ मेरी सफलता में सबसे महत्वपूर्ण योगदान मेरे बड़े भाई का है।
  4. वर्तमान में प्रयासरत युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे:- कठिनाइयाँ जीवन में आती रहती है, लेकिन हार मत मानिए कठिन परिश्रम करते रहिए सफलता अवश्य मिलेगी।

 

  1. अपनी सफलता की राह में आनेवाली कठिनाई के बारे में बताएं:- “मनीष जी” से जब यह सवाल किया गया, वो भावुक हो गए और बताने लगे कि जब तक पापा थे तब तक तो सब ठीक था, किन्तु जब मैं महज़ 8वीं कक्षा में था, तो पापा का देहांत हो गया। उसके बाद गरीबी ने अपना परिचय करना शुरू किया। रिश्तेदारों ने भी साथ देना बंद कर दिया। पढ़ाई का ख़र्च नहीं हो पाने और निजी विद्यालय में फीस नहीं दे पाने के कारण निजी विद्यालय से नाम कट गया और सरकारी विद्यालय में नामांकन कराना पड़ा। सरकारी विद्यालय से 10वीं उत्तीर्ण करने के उपरांत घर को समस्या से निकालने के लिए हम दोनों भाई ने मिलकर पापा के व्यापार (परंपरागत व्यापार) को फिर से प्रारंभ किया और 11वीं -12वीं सीकर विद्यापीठ से पूरा किया। व्यापार ठीक-ठाक चलने लगा, फिर भैया ने मुझे आगे पढ़ाने का फैसला किया। उस दौरान आस-पास इंजीनियर बनने की होड़ थी, मैं भी “सोभसरिया इंजीनियरिंग कॉलेज” में नामांकन ले लिया। बहुत मुश्किल से कमाये पैसे और भाई की मदद की वजह से जैसे-तैसे इंजीनियरिंग पूरा कर पाया।

एक बार फिर से यह मेरे लिए परीक्षा की घड़ी थी, अब नाम के आगे इंजीनियर तो लग गया लेकिन काम नहीं मिल पा रहा था, साथ ही पापा का दिया व्यापार भी बंद हो गया। यूँ तो पहले भी काफी तरह के मुश्किल से इस जीवन ने अपना परिचय कराया था लेकिन इंजीनियरिंग के बाद वाला दृश्य मेरे लिए बेहद डरावना था,  बेरोज़गारी की वजह से मैं खुद परेशान था लेकिन परिवार वालों के साथ-साथ समाज के भी खोटा सिक्का – खोटा सिक्का बता ताने मारने की वजह से मैं बहुत परेशान हो गया था, मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर क्या करूँ? रिश्तेदार उधार देने से डरते थे। मैं काम की तलाश में आए दिन कभी जयपुर, तो कभी मुंबई, तो कभी कहीं और भटक रहा था। आख़िर में मुझे 2011 में जयपुर में महज़ 5000/- रु प्रति माह की नौकरी मिली। आप सोच सकते हैं महज़ 5000/- रु में मेरा जयपुर में रहकर काम करना और फिर घर का ख़र्च किन्तु तभी मेरे लिए वो भी बहुत आवश्यक था, मैं काम के साथ-साथ बेहतर संभावना भी तलाश रहा था, लगभग 1 वर्ष बाद सूरत, गुजरात में जुनियर इंजीनियर के पद पर 13000/- रु प्रति माह की नौकरी मिली देखते-देखते 4-5 महीने निकल गए लेकिन मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही थी और घर के हालात ख़राब होने लगे थे, एक बड़ी मुसीबत में फँस गया, लोग उधार भी सोच समझकर देते थे लेकिन एक दोस्त  के मदद से मुसीबत से निकल पाया। कभी-कभी जब काफी परेशान होता तो सोचता था कि भगवान मेरे साथ ही ऐसा क्यों कर रहे हैं, आख़िर मैं पैदा ही क्यों हुआ हूँ?

लेकिन माइकल जार्डन की प्रसिद्ध पंक्ति मुझे हर बार हिम्मत देती जिसे मैं आप सब के साथ भी साझा करना चाहूँगा कि

“मैं असफलता को स्वीकार कर सकता हूँ,

हर कोई किसी-न-किसी चीज में विफल होता है

लेकिन मैं प्रयास न करना नहीं स्वीकार कर सकता”।

 

इन तमाम मुश्किलों के बाबजूद मैंने प्रयास जारी रखा, यही मेरी सफलता का कुंजी है और जब मयामा, बहरीन में Bucon Engineers & Infrastructure Pvt. Ltd में टेक्नीशियन पद के लिए मेरा चयन हुआ तो मैंने सोचा चलो कुछ न होने से, कुछ अच्छा,  मयामा, बहरीन आने के बाद भी बार-बार लोगों के बोल मन में गुंजते थे कि “तु खोटा सिक्का है, तुमसे कुछ नहीं होगा”

 

       “तु खोटा सिक्का है, तुमसे कुछ नहीं होगा” ने काफी परेशान किया और उसी ने मुझे उस कथन को गलत साबित करने को मजबूर भी किया और परिणाम आपके सामने है टेक्नीशियन से इंजीनियर और इंजीनियर से जनरल मैनेजर की यात्रा इतनी जल्दी पूरी की। अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि मैं किसी को (समाज या परिवार) को दोष नहीं देना चाहता हूँ क्योंकि आज मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें उनलोगों के ताने का अहम किरदार है, हाँ एक बात महत्वपूर्ण था कि मैंने हार नहीं माना और उनलोगों को गलत साबित, न-न अपने-आपको सही साबित करने के लिए लगातार प्रयास करते रहा।

 

Pic Source- Facebook, Google Image

 

 

(यह मनीष जंगीद से “कोसी की आस” टीम के सदस्य के बातचीत पर आधारित है।)

 

“कोसी की आस” टीम परिवार की ओर से मनीष जंगीद को उनके इस सफलता के लिए अनंत शुभकामनायें।

निवेदन- अगर यह सच्ची और प्रेरक कहानी पसंद आई हो तो लाइक/कमेंट/शेयर करें। यदि आपके आस-पास भी इस तरह की कहानी है तो हमें Email या Message करें, हमारी टीम जल्द आपसे संपर्क करेगी। साथ ही फ़ेसबूक पर कोसी की आस का पेज https://www.facebook.com/koshikiawajj/ लाइक करना न भूलें, हमारा प्रयास हमेशा की तरह आप तक बेहतरीन लेख और सच्ची कहानियाँ प्रस्तुत करने का है और रहेगा।

टीम- “कोसी की आस” ..©

- Advertisement -