आख़िर क्या है जैविक या ऑर्गेनिक खेती? आइये जानते हैं….

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भारत अभी भी कृषि प्रधान राष्ट्र है। हलांकि आजादी के बाद से हमने विभिन्न क्षेत्रों में काफी तरक्की की है किन्तु अभी भी हमारे देश की आधी से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है।
“कोसी की आस” टीम खेतिहर किसानों के लिए अपने इस लेख के माध्यम से संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रही है कि पैदावार को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके कैसे बढ़ाया जाए और भारत सरकार अथवा बिहार सरकार द्वारा किसानों को खेती के लिए किस-किस प्रकार की सहायता दी जाती है।
उसी क्रम में आज से प्रस्तुत है “किसानों को समर्पित” इस नई श्रृंखला की पहली कड़ी जिसमें जैविक या ऑर्गेनिक खेती के बारे में हमलोग जानेंगे।
ऑर्गेनिक खेती कैसे करते हैं? और किस प्रकार हम कम खर्च में अधिक पैदावार कर सकते हैं? इसी क्रम में आज ऑर्गेनिक खाद बनाने की विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।
जैविक खेती के लिए उपयोगी तरीके
गोबर, गुमूत्र डालकर खेती कैसे की जाती है इसका एक सरल उपाय बताना चाहता हूँ जो भी किसान हैं या बनना चाहते हैं ध्यान से पढ़ें, क्या पता यह आपका खर्चा पूरा काफी कम कर दे। यूरिया का एक दाना भी नहीं डालना पड़ेगा और फसल बहुत अच्छी होगी।
गाय का हो या बेल का हो या फिर भैंस का गोबर खेत में डालना है। कई बार हम गोबर को गढ़ढ़े में डालते जाते हैं और जब सूख जाता है तो उठा कर खेत मे दाल देते हैं। इससे उतना फायदा नहीं होता अगर खेत में डालना है तो गीला गोबर डालना चाहिए। वो सबसे ज्यादा फायदा करता है।


ऐसे में एक बात आपको समझाता हूँ। मैं आपको एक सूखी रोटी दू खाने के लिए, आप जल्दी नहीं खा पाओगे उसी रोटी को दूध में डालकर दे दूँ तो आप फटाफट खा लेंगे। गीली चीज जल्दी हजम होती है मिट्टी को भी और शरीर को भी। तो खेत की मिट्टी में गोबर डालें तो  गीला कर के डालना है।
मान लेते हैं की हमारे पास एक एकड़ जमीन है। तो हमें एक एकड़ खेत के लिए गाय या बेल या भैंस का 15 किलो गोबर और और 15 लीटर मूत्र चाहिए ।
आप सोचेंगे कि गोबर इकट्ठा करना तो आसान है, मूत्र कैसे इकट्ठा करेंगे। मूत्र इकट्ठा करना भी आसान है। गाय, बैल, भैंस जब मूत्र देते हैं तो उसका समय एकदम पक्का होता है गाय के बछड़े को दूध पीने के लिए छोड़ते हैं तो गाय तुरंत मूत्र करती हैं ,ऐसे ही बैल करता है ज्यादातर बैठा हुआ बैल जब खड़ा होता है तो प्रायः मूत्र करेगा तब कोई डब्बा लगकर भर लें। दूसरा तरीका है कि जहाँ जानवर रखते हैं वहाँ ईट बिछाकर या पक्की नाली बना दें और नाली को एक पक्के गड्ढा से जोड़ दें। मूत्र इस प्रकार इकट्ठा कर सकते हैं।
गाय, बैल और भैंस के मूत्र की एक विचित्र विशेषता है कि इसकी एक्सपायरी डेट नहीं होती। कभी खराब नहीं होती। 1 साल, 2 साल, 20 साल, 50 साल कभी खड़ाब नहीं होती बस जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करते रहिए। 15 किलो गोबर 15 लीटर मूत्र दोनों को मिलाकर एक प्लास्टिक का ड्रम लें, उसमें दोनों को मिला दें। मिलाने के बाद इसमें 1 किलो पुराना गुड़ और कोई भी दाल या आटा का चोकर 1 किलो डाल दें और 1 किलो पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी। इस प्रकार 1 किलो मिट्टी, 1 किलो दाल या आटा का चोकर, 1 किलो गुड़, 15 लीटर मूत्र और 15 किलो गोबर पांच चीजें एक ड्रम में मिला लें। मिलाने के बाद 15 दिन इस ड्रम को धूप में नहीं रखना है, छांव में रख दें। छांव में रखने के बाद 15 दिन में खाद तैयार हो जाता है। इसके बाद इसमें 200 लीटर पानी मिला दें और पानी मिलाने के बाद तैयार हुआ घोल को खेत की मिट्टी में छिड़क दीजिये।

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अगर खेत खाली है तो सीधे छिड़क दीजिये और अगर खेत में फसल खड़ी है तो पानी के साथ इसको लगा दें। असल में, जब आप खेत में पानी देते हैं उसी समय डब्बे से मिला कर दे दें  तो पूरे खेत में पहुंच जाएगा। ये खाद जो गोबर, गोमूत्र, दाल या आटा, गुड़ और मिट्टी से तैयार होता है, यह यूरिया से 6 गुना ज्यादा ताकतवर होता है। जब इसका प्रयोगशाला में जांच किया गया तो यह यूरिया, डीएपी में जितनी ताकत है मिट्टी को देने के लिए उससे भी ज्यादा ताकतवर निकला। इसलिए इससे उत्पादन ज्यादा होंगे और इस खाद के इस्तेमाल से नुकसान भी नहीं होती है और इसको हर 21 दिन में मिट्टी में डालना चाहिए, हर 21 दिन में हम अपनी मिट्टी में डालें तो पूरे साल की एक साइकिल बन जाती है। जो 3 महीने की फसल है तो 4 बार, 4 महीने की फसल है तो 5 बार, 6 महीने की फसल है तो 7 बार डालना चाहिए।
परिणाम मिट्टी बहुत अच्छी हो जाएगी और यह खाद डालने से मिट्टी में केंचुए बहुत हो जाते हैं और केंचुए के बारे में आप जानते हैं कि “केंचुए को किसान का मित्र कहा जाता है” केंचुए मिट्टी में ऊपर-नीचे घूमते रहते हैं और मिट्टी को खोदते रहते हैं और मिट्टी को भुरभुरा बनाते हैं जिससे फिर बारिश का पानी मिट्टी पर जब गिरता है तो एक-एक बूंद पानी अंदर चला जाता है, अगर केंचुए ज्यादा हैं, पानी पूरा नीचे चला जाता है थोड़ा भी पानी बेकार नहीं जाता है। और अगर केंचुए ज्यादा हैं, तो ये और ही अच्छी बात है क्योंकि केंचुए मिट्टी खाते हैं और जो कुछ भी मल के रूप में त्याग करते हैं, दुनिया की सबसे अच्छी खाद है ।
Pic Source- DD Kisan Chanel, Google kishan related portal

आज हमनें इस कड़ी में ओर्गेनिक खाद बनाने की बात की । अगली कड़ी (यानि ठीक बृहस्पतिवार) को हम फिर एक नई जानकारी के साथ उपलब्ध होगें। तब तक के लिए नमस्कार, आदाब और शुक्रिया।

(यह “कोसी की आस” टीम के सदस्य द्वारा संग्रहित जानकारी पर आधारित है।)

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टीम- “कोसी की आस” ..©

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