अलविदा 2019 : सोशल मीडिया पर छाये रहे ये गुरू, इनके शैक्षणिक कार्यशैली की हो रही देश-विदेश में प्रशंसा।

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स्पेशल डेस्क
कोसी की आस@पटना

आनंद कुमार, ममता मिश्रा और आरके श्रीवास्तव हिन्दुस्तान की कोख से पलकर अपने शैक्षणिक कार्यशैली से बन चुके हैं लाखों युवाओ के रोल मॉडल, सोशल मीडिया पर इनके शैक्षणिक कार्यशैली की खुब प्रशंसा हो रही है।

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#आनंद कुमार—

शिक्षा के क्षेत्र में पटना के आनंद कुमार और उनकी संस्था ‘सुपर 30’ को कौन नहीं जानता। हर साल आईआईटी रिजल्ट्स के दौरान उनके ‘सुपर 30’ की चर्चा अखबारों में खूब सुर्खियाँ बटोरती हैं। आनंद कुमार अपने इस संस्था के जरिए गरीब मेधावी बच्चों के आईआईटी में पढ़ने के सपने को हकीकत में बदलते रहते हैं। सन् 2002 में आनंद कुमार ने सुपर 30 की शुरुआत की और तीस बच्चों को नि:शुल्क आईआईटी की कोचिंग देना शुरु किया। पहले ही साल यानी 2003 की आईआईटी प्रवेश परीक्षाओं में “सुपर 30” के 30 में से 18 बच्चों को सफलता हासिल हो गई। उसके बाद 2004 में 30 में से 22 बच्चे और 2005 में 26 बच्चों को सफलता मिली। इसीप्रकार सफलता का ग्राफ लगातार बढ़ता गया। सन् 2008 से 2010 तक सुपर 30 का रिजल्ट सौ प्रतिशत रहा।
आज आनंद कुमार राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मंचों को संबोधित करते हैं। उनके सुपर 30 की चर्चा विदेशों तक फैल चुकी है। कई विदेशी विद्वान उनका इंस्टीट्यूट देखने आते हैं और आनंद कुमार की कार्यशैली को समझने की कोशिश करते हैं। हाल ही में आनंद कुमार को विश्व के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय हार्वर्ड ने अपने यहाँ लेक्चर के लिए बुलाया है। आज आनंद कुमार का नाम पूरी दुनिया जानती है और इसमें कोई शक नहीं कि आनंद कुमार बिहार का गौरव हैं। उनके इस अनुखे कार्य पर “super30” नाम का बायोपिक ऋतिक रोशन अभिनीत भी बन चुका है, जो काफ़ी सफल रहा।

#ममता मिश्रा—

उत्तरप्रदेश के एक प्राइमरी सरकारी स्कूल की टीचर ममता मिश्रा ने मिसाल कायम किया है, पीएम मोदी भी कर चुके हैं सलाम। प्राइमरी स्कूल की इस टीचर ने अपने संसाधनों से स्मार्ट क्लास बनवाया। साथ ही यूट्यूब, ग्रीन बोर्ड और मोबाइल एप दीक्षा के जरिए बच्चों को डिजिटल एजुकेशन दे रही हैं। सोशल मीडिया पर इनकी शैक्षणिक कार्यशैली की खुब प्रशंसा हो रही है।

वो कहते हैं न कि “एक चिराग पूरे अंधेरे को दूर नहीं कर सकता लेकिन अंधेरे से लड़ने का हौसला तो दे ही सकता है।” कुछ ऐसी ही हौसला अफजाई करने वाली कहानी है, जनपद के सरकारी स्कूल की एक टीचर की, जिन्होंने अपने निजी संसाधनो से सरकारी स्कूल को कान्वेंट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है। इनकी इस पहल को पीएम मोदी भी सलाम कर चुके हैं।

यह टीचर प्रयागराज जिले के यमुनापार इलाके में चाका ब्लाक के मॉडल प्राइमरी स्कूल तेदुंआवन में सहायक अध्याप​क के पद पर तैनात हैं। इनकी नियुक्ति 2015 में दूसरे शिक्षकों की तरह ही हुई थी। लेकिन इन्होंने दूसरे शिक्षकों से अलग हटकर प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चों को कान्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह ही डिजिटल तरीके से पढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिससे कि वो बदलते समय के साथ कदम-से-कदम मिला कर चल सकें। ममता अपने क्लास में आने वाले पहली कक्षा के बच्चों को घर में मोबाइल के जरिए पढ़ाई करने के गुर सिखा रही है।

‘दीक्षा ऐप’ के जरिए पढ़ाई के गुर,

ममता क्लास में बच्चों को पढ़ाने के साथ ही, उन्हें मोबाइल में ‘दीक्षा ऐप’ के जरिए पढ़ने के तरीके भी सिखा रही हैं।
उनकी क्लास के बच्चे भी पढ़ाई की इस डिजिटल तकनीक को बखूबी सीख रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं सहायक अध्यापक ममता मिश्रा ने अपनी सैलरी के पैसों से अपने क्लास के बच्चों के लिए डेस्क व बेंच भी मंगवाई। इस बारे में बात करते हुए ममता मिश्रा कहती हैं कि जब तक उनके बच्चे दरी पर बैठते थे तो उन्हें कुर्सी पर बैठ कर उन्हें पढ़ाना अच्छा नहीं लगता था। इसलिए बच्चों के डेस्क व बेंच के लिए पैसे जोड़ने तक वो भी बच्चों के साथ दरी पर बैठकर ही उन्हें पढ़ाती थी। यही नहीं उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में अपनी कक्षा के साथ ही दूसरी कक्षाओं में भी ब्लैक बोर्ड की जगह ग्रीन बोर्ड लगवाएं हैं-

पीएम मोदी ने की तारीफ़—

ममता ने अपने निजी संसाधनों से सरकारी प्राइमरी स्कूल को कान्वेंट स्कूल के बराबर ला खड़ा किया है। उनकी इस उपलब्धि की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कर चुके हैं। एक तरफ जहाँ सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक, आए दिन संसाधनों का ही रोना रोते रहते हैं। वहीं ममता ऐसे लोगों के लिए मिसाल बन कर खड़ी हुई है।अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

टीचर ममता मिश्रा खेल-खेल में बच्चो को science और maths के गुर सिखा देती हैं। ऑन लाइन एजुकेशन स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ ममता बच्चों को ऑन लाइन एजुकेशन भी दे रही है। वो बच्चों को खेल-खेल में गणित और विज्ञान की बारीकियां इतनी आसानी से सिखा देती हैं, जिसे देख साथी अध्यापक और अभिभावक दोनों ही हैरान रह जाते हैं। ममता यू ट्यूब पर अपना चैनल भी चलाती हैं। जिस पर बच्चों को पढ़ाते हुए अब तक उन्होंने लगभग 500 वीडियो अपलोड किए हैं। उनके यू ट्यूब चैनल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंकित नाम से चलने वाले उनके इस चैनल को 5 लाख से ज्यादा लोगों ने सब्सक्राइबर किया है।

#आरके श्रीवास्तव:-

बिहार का मान सम्मान को विश्व पटल पर बढ़ाने वाले मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव ने अपने शैक्षणिक बगिया से सैकड़ो गरीब प्रतिभाओ के सपने को आईआईटी, एनआईटी, एनडीए, बीसीईसीई में सफलता दिलाकर लगा चुके है पंख। अमेरिकी विवि डॉक्टरेट की मानद उपाधि से कर चुका है सम्मानित।

पिछले 10 वर्षों से गरीब बच्चों को गणित पढ़ा रहा एक नौजवान प्रतियोगिता का दौर, गिरती शिक्षा स्तर और स्टूडेंट्स की मजबूरी– शायद इन्हीं कारणों से कोचिंग संस्थानों का बाजार गर्म है। लेकिन बाज़ारीकरण के इस दौर में भी बिहार के युवा गणितज्ञ मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव के लिए शिक्षा कोई ‘बजारू’ चीज नहीं है। वे छात्रों का भविष्य सवारने और कोचिंग संस्थानों को करारा जवाब देने के लिए पिछले 10 वर्षो से सिर्फ 1 रुपया गुरू दक्षिणा में गणित की शिक्षा दे रहे है।

आमतौर पर शिक्षा स्तर का गिरावट का सबसे बड़ा खामियाजा इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे तकनीकी विषयो की पढ़ाई करने वाले छात्र- छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। जिन्हें कोचिंग के लिए लाखों रुपये देने पड़ रहे है। पिछले कई वर्षो से आरके श्रीवास्तव ने शिविर लगाकर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारो गरीब स्टूडेंट्स को नाईट क्लासेज प्रारूप के माध्यम से पूरे रात लगातार 12 घण्टे तक गणित के सवाल हल करने की नई -नई तकनीको और बारीकियों की जानकारी दे रहे। आरके श्रीवास्तव के नाईट क्लासेज प्रारूप के तहत लगातार 12 घण्टे निःशुल्क शिक्षा देने हेतु इनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है।
उनका दावा है कि इस शिविर में पढ़ाई करने वाले में से प्रत्येक वर्ष 60% से अधिक छात्र-छात्राएं आईआईटी, एनआईटी, एनडीए सहित तकनीकी प्रवेश परीक्षाओं में सफल होते है। छात्रों के इस नाईट क्लासेज शिविर की ओर आकर्षित होने के चलते हजारो स्टूडेंट्स के रोल मॉडल बन चुके है। मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव न सिर्फ बिहार में लोकप्रिय है बल्कि अपने गणित पढ़ाने के जादुई तरीके एवम गणितीय शोध के लिए प्रायः सुर्खियों में भी रहते है। कबाड़ की जुगाड़ से 100 से अधिक चर्चित गणित के सूत्रो को सिद्ध कर चुके है ।क्लासरूम प्रोग्राम में पाइथागोरस प्रमेय को 50 से ज्यादा तरीको से सिद्ध कर आरके श्रीवास्तव ने गणित विरादरी में काफी वाहवाही लुटा। गूगल बॉय कौटिल्य पंडित के गुरु के रूप में भी देश इन्हें जानता है।

फिलहाल वह गरीब छात्रों को निःशुल्क शिक्षा देने में जुटे हुए है। उनके इस प्रयास से प्रभावित होकर अलग-अलग क्षेत्रों के उच्चे ओहदे के कुछ लोगो ने शिविर में अतिथि शिक्षक के बतौर छात्र- छात्राओ को पढ़ाया। बकौल आरके श्रीवास्तव कहते है की गणित की शिक्षा देना मेरा पेशा नहीं बल्कि शौक है, व्यवसायिक शिक्षण में छात्र- छात्राओं और शिक्षकों के बीच परस्पर प्रेम और विश्वास का संबंध नहीं रह पाता।

आपको बताते चले कि आरके श्रीवास्तव के नाईट क्लास के मॉडल को जानने और समझने के लिए अभिभावक सहित शिक्षक भी उनके क्लास में बैठते है की कैसे आरके श्रीवास्तव पूरे रात लगातार 12 घण्टे विद्यार्थियों को पूरे अनुसाशन के साथ मैथमेटिक्स का गुर सीखा रहे। सुबह क्लास खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स के माता-पिता इस बात से काफी चकित होते हैं कि मेरा बेटा-बेटी घर पर एक घण्टे भी ठीक से पढ़ नहीं पाता, उन्हें आरके श्रीवास्तव ने लगातार पूरे रात 12 घण्टे तक अनुसाशन के साथ बैठाकर मैथमेटिक्स का गुर सिखाया। उन्हें सेल्फ स्टडी के प्रति प्रेरित किया गया कि कैसे आप पूरे रातभर पढ़ सकते है। आर के श्रीवास्तव के नाइट क्लास के रूप मे लगातार पूरे 12 घंटे बच्चों को शिक्षा देने के मुहिम अब देशव्यापी रूप लेने लगा है। आर के श्रीवास्तव को देश के विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक संस्थाएँ गेस्ट फैक्लटी के रूप मे अपने यहाँ शिक्षा देने के लिए बुलाती है। शिक्षक भी बच्चों के साथ आर के श्रीवास्तव के क्लास लेने के तरीकों को समझने के लिए क्लास मे बैठते है की कैसे पूरे रात अनुशासन मे बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।

क्लास देखकर बच्चे सहित शिक्षक भी श्रीवास्तव को धन्यवाद देते है की पढ़ाने की ऐसी कला सारे शिक्षकों मे आ जाये तो कोई बच्चा शिक्षा से अपने को दूर नही कर पायेगा और सफलता उसके कदम चूमेगी। रोहतास निवासी आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गणित में बहुत अधिक रुचि थी जो नौंवी और दसवी तक आते-आते परवान चढ़ी। आर के श्रीवास्तव का बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है, परन्तु अपने कड़ी मेहनत, ऊँची सोच, पक्के इरादे के बल पर आज पूरे देश में मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर हैं। वे कहते हैं कि मेरे बचपन के हालात जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते। आरके श्रीवास्तव अपने छात्रों में एक सवाल को अलग-अलग तरीक़े से हल करना भी सिखाते हैं। वे सवाल से नया सवाल पैदा करने की क्षमता का भी विकास करते है।

महान गणितज्ञ रामानुजम है आदर्श —

आरके श्रीवास्तव अपने छात्रों में एक सवाल को अलग – अलग मेथड से हल करना भी सिखाते है। वे सवाल से नया सवाल पैदा करने की क्षमता का भी विकास करते है। रामानुजम और वशिष्ठ नारायण को आदर्श मानने वाले आरके श्रीवास्तव कहते हैं कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के युग में गणित की महत्ता सबसे अधिक है। इसलिए इस विषय को रुचिकर बनाकर पढ़ाने की जरुरत है।

यूँ तो हमारे देश ने दुनिया को कई सारे महान व्यक्ति दिए हैं। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में काफी बड़ा योगदान दिया है। किसी ने कला और साहित्य को बढ़ाने का काम किया तो किसी ने खेल के क्षेत्र मे देश का नाम रोशन किया है। इसी तरह आनंद कुमार, ममता मिश्रा और आरके श्रीवास्तव अपने शैक्षणिक कार्यशैली से बेहतर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।

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