CBSE Board: 10वीं-12वीं के छात्रों को भी बिना Exam लिए आंतरिक परीक्षा के आधार पर Pass किया जाए : सिसोदिया

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शायद ही कोई ऐसा सेक्टर बचा होगा जो कोरोना बीमारी की वजह से प्रभावित नहीं हुआ हो। देश की अर्थव्यवस्था से लेकर इसने शैक्षणिक संस्थानों व शिक्षा व्यवस्था को इस बीमारी ने चरमरा कर रख दिया है। खासकर शैक्षणिक सत्र से जुड़े छात्र व उनके माता पिता इस बात को लेकर काफी परेशान हैं कि 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले उनके बच्चे जिनका कुछ पेपर कोरोना की वजह से नहीं हो सका उनका क्या होगा।

यह सभी परेसानी को देखते हुए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत में कहा कि “देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति को देखते बोर्ड परीक्षा देने वाले 10वीं और 12वीं के छात्रों के बचे हुए पेपर न लिए जाएं। ऐसे छात्रों को उनकी आंतरिक परीक्षा के आधार पर उत्तीर्ण किया जाए ताकि वे अगली कक्षा में प्रवेश ले सकें।” ज्ञात हो कि निशंक ने मंगलवार को देशभर के शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलाई थी।

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बैठक में सिसोदिया ने कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से आज नहीं तो कल हम कोरोना से बाहर निकल ही जाएंगे, लेकिन इसका शिक्षा और अर्थव्यवस्था पर जो प्रभाव पड़ेगा वह दूरगामी होगा। सिसोदिया ने कहा कि 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों को भी आंतरिक मूल्यांकन के जरिये ही पास किया गया है। ऐसी व्यवस्था 10वीं व 12वीं के छात्रों के लिए भी लागू करनी चाहिए। क्योंकि निकट भविष्य में भी शारीरिक दूरी की वजह से बचे हुए पेपर कराना संभव नहीं होगा।

साथ ही सिसोदिया ने आग्रह किया कि अगले शैक्षणिक सत्र में सीबीएसई सभी कक्षा के पाठ्यक्रम में तीस फीसद की कटौती करे। अगले जेईई व नीट परीक्षा के सिलेबस में भी तीस प्रतिशत की कटौती करे।

 

 

Source:dj

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