बड़ा सवाल : क्या छात्र राजनीति की अतिसक्रियता, गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक व्यवस्था के अभाव का दुष्परिणाम है?

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स्पेशल डेस्क

कोसी की आस@पटना

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जे एन यू कैम्पस में ०५/०१/२०२० की शाम हुई हिंसक घटना ने देश वासियों का बरबस ध्यान खींचा है। छात्र राजनीति के बदलते स्वरूप एवं आए दिन देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में हो रहे प्रदर्शनों एवं गुटबाजी के कारण शिक्षा का मंदिर राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। विचारधारा की लड़ाई कब वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील हो गया पता ही नहीं चला।

ऊपर से अपनी वजूद खो रहे कई राजनीतिक दल इसे अपनी पुनर्वापसी का सुअवसर मानकर हवा देने में लगे हुए हैं।आरोप-प्रत्यारोप का अंतहीन सिलसिला भी शुरू हो चुका है।जहाँ विपक्ष इस प्रकरण में सरकार की संलिप्तता सिद्ध करने में जुटी है, वहीं सरकार इसे विपक्ष की साजिश मान रही है।लेकिन इस प्रकरण सर देश की शैक्षणिक व्यवस्था एवं जे एन यू जैसी उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थाओं को अपूरणीय क्षति हो रही है। बात-बात पर छात्रों को राजनीति में घसीटना एवं गुंडागर्दी के लिए उकसाना राजनीतिक शुचिता के बिल्कुल खिलाफ है। सियासत, आरोप-प्रत्यारोप एवं साजिश के लिबास में लिपटे इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सच शायद ही सामने आ पाए।

२०२० का आरंभ ही वैश्विक स्तर पर अनेक चिंताजनक घटनाओं के साथ हुई है जैसे- आॅस्ट्रेलिया के जंगलों की आग ने लाखों जीव-जंतुओं का जीवन लील लिया, साथ ही करोड़ों एकड़ का जंगल नष्ट हो चुका है। ईरान-अमेरिका के बीच चल रही तनातनी विश्व को युद्ध के कगार पर खड़ा कर दिया है।पाकिस्तान में पवित्र स्थल ननकाना साहिब पर हमला का हम ठीक से विरोध भी नहीं कर पाए कि खुद देश के विभिन्न अस्पतालों में मासूम बच्चों की अकाल मृत्यु से गमगीन माहौल में जे एन यू की घटना काफी विचलित एवं स्तब्ध करने वाली है।

हम किस ओर जा रहे हैं-युवाओं की फौज बेरोजगारी एवं गलत शिक्षा नीति का शिकार होकर, बात-बात पर विध्वंसक रूप ले रही है। यदि देश के नीति-नियंता (निर्माता) सचमुच राष्ट्र का कुछ भला करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम कठोर जनसंख्या नियंत्रण नीति लाए तथा तकनीकी एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर बल दे। शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की सख्त आवश्यकता है। क्या हम जापान से सीख लेकर प्राथमिक स्तर से तकनीकी आधारित शिक्षा लागू नहीं कर सकते? आखिर रोजगारविहीन शिक्षा का दंश कब तक हमारी युवा पीढ़ी झेलती रहेगी?

(उपर्युक्त आलेख कोसी की आस टीम को भारत सरकार के रेल मंत्रालय में कार्यरत प्रतापगंज, सुपौल के “विजेंद्र जी” ने भेजा है। यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।)

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