कहते हैं जल ही जीवन है, आइये जानते हैं उन जलयोद्धाओं के बाड़े में जिन्होंने अपनी पूरी जीवन लगा दी जल संरक्षण में

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कहते हैं जल है तो कल है, या फिर जल ही जीवन है, जल नहीं तो कल नहीं, आदि। न जाने कितने तरह से जल को संबोधित करते हैं। लेकिन ये सच है अगर हम अब भी समय रहते नहीं सचेत होंगें तो शायद हमारे आनेवाली पीढ़ी को जल संकट जैसी मुसीबतों का सामना करना पर सकता है। परंतु देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समाज और देश के लिए पानी को बचाने के प्रयास बड़े स्तर पर कर रहे हैं जो जल योद्धा के नाम से जाने जाते हैं। ऐसी ही कुछ खास शख्सियतों पर एक नजर :

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आबिद सूर्ती

उम्र 84 साल। पानी बचाने का इनका जोश युवाओं को पछाड़ देता है। मुंबई में 2007 से घर-घर जाकर लीकेज की निशुल्क मरम्मत करवाते हैं। ड्रॉप डेड फाउंडेशन नामक उनका एक एनजीओ है। 2007 में ही उन्होंने 1,666 घरों में दस्तक दी। 414 लीकेज पाइप ठीक करवाए और करीब 4.14 लाख लीटर पानी बचाया। यह सिलसिला जारी है।

अयप्पा मसागी

कर्नाटक निवासी अयप्पा ने हजारों लोगों को वर्षा जल संचयन सिखाया। गडग गांव में उन्होंने रबर और कॉफी की खेती के लिए छह एकड़ जमीन खरीदी। वह दिखाना चाहते थे कि कम वर्षा के बाद भी वह खेती कर सकते हैं। वर्षों की रिसर्च के बाद जल स्रोतों को रिचार्ज करने और बिना सिंचाई के खेती की तकनीक खोजी। 11 राज्यों में वर्षा जल संचयन के हजारों प्रोजेक्ट विकसित कर चुके हैं। साथ ही छह सौ झीलों का निर्माण भी किया है।

राजेंद्र सिंह

1959 में राजस्थान में स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के उद्देश्य से गए, लेकिन उनको लगा कि लोगों को स्वास्थ्य से अधिक पानी की जरूरत है। उन्होंने ग्रामीणों के संग मिलकर जोहड़ (छोटे तालाब) बनाने शुरू किए। अब तक उनके द्वारा करीब 8,600 जोहड़ बनाए गए जो राजस्थान के 1,058 गांवों को लाभांवित कर रहे हैं।

शिरीष आप्टे

महाराष्ट्र के पूर्वी विदर्भ में लघु सिंचाई विभाग में बतौर इंजीनियर काम कर रहे शिरीष ने वहां सरकारी मुकदमों में फंसे तालाबों के पुनरुद्धार का 2008 में बीड़ा उठाया। दो साल में ही पहला तालाब ठीक हो गया। इससे इलाके में भूजल स्तर में बढ़ोतरी हुई, कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और मछली पालन बढ़ा। बाद में उनके नक्शेकदम पर सरकार भी सक्रिय हुई। वहां करीब एक हजार तालाब मुकदमे में फंस सूख रहे थे।

अमला रुइया

मुंबई की अमला ने चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर राजस्थान के सर्वाधिक सूखा प्रभावित सौ गांवों में जल संचयन की स्थाई व्यवस्था की। 200 से अधिक चेक डैम बनाए गए। दो लाख लोग लाभांवित हुए।

  • Source: dainik jagran
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